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Editorial : इजराइल-हमास के बीच हिंसा तत्काल रोके यूएन

इजराइल हमास को आतंकवादी गुट मानता है। अभी इजराइली सुरक्षा बल के खिलाफ हमास का विरोध मामूली झड़प से हिंसक जंग में तब्दील हो रहा है। एक सप्ताह के अंदर सौ से अधिक बेकसूर मारे गए हैं। दोनों ही मुल्क में महज लाखों में आबादी है, फिर भी दोनों एक-दूसरे के खून के प्यासे बने हुए हैं।

Editorial : इजराइल-हमास के बीच हिंसा तत्काल रोके यूएन
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संपादकीय लेख

Haribhoomi Editorial : इजराइल और फिलिस्तीन के बीच जारी हिंसक संघर्ष का तत्काल अंत होना चाहिए। भारत ने इस हिंसा की निंदा की है। विश्व जब कोरोना महामारी से जूझ रहा है, ऐसे में दो मुल्कों का आपस में खून बहाना कहीं से भी उचित नहीं है। इजराइल व फिलीस्तीन के बीच 1967 से ही दुश्मनी है। यरूशलम में इस्लाम, ईसाई व यहूदी तीनों की पवित्र धर्म स्थली है। पूर्वी यरूशलम में अल अक्सा मस्जिद है। यह मक्का व मदीना के बाद मुस्लिमों का तीसरा सबसे पवित्र धर्म स्थल है। समूचे यरूशलम पर इजराइल का कब्जा है। वह पूर्वी यरूशलम से मुस्लिम आबादी को खाली करना चाहता है। फिलिस्तीन चाहता है कि इजराइल 1967 से पहले की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं तक वापस लौट जाए और वेस्ट बैंक तथा गाजा पट्टी में स्वतंत्र फिलिस्तीन राष्ट्र की स्थापना हो। इजराइल पूर्वी यरूशलम से अपना दावा छोड़े। अभी रमजान के मौके पर इजराइल ने पूर्वी यरूशलम से मुस्लिम आबादी को खाली कराना शुरू किया, जिसका हमास विरोध कर रहा है। ताजा संघर्ष इसलिए है। इसके चलते इजराइल में यहूदी व अरब आबादी के बीच सांप्रदायिक हिंसा भी फैल गई है। हमास का गाजापट्टी पर कब्जा है।

इजराइल हमास को आतंकवादी गुट मानता है। अभी इजराइली सुरक्षा बल के खिलाफ हमास का विरोध मामूली झड़प से हिंसक जंग में तब्दील हो रहा है। एक सप्ताह के अंदर सौ से अधिक बेकसूर मारे गए हैं। दोनों ही मुल्क में महज लाखों में आबादी है, फिर भी दोनों एक-दूसरे के खून के प्यासे बने हुए हैं। चिंता की बात है कि इजराइल व फिलिस्तीन के बीच विवाद केवल दो मुल्कों का संघर्ष नहीं है, बल्कि यह इस्लाम, यहूदी व ईसाई सभ्यता व मान्यता के बीच के टकराव की परिणति भी है। इजराइल वेस्ट बैंक, गाजा पट्टी, गोलन हाइट्स को अपना क्षेत्र बताता रहा है। मुस्लिम देशों से घिरे इजराइल को हमेशा इस्लामिक कट्टरता के विरोध का सामना करना पड़ता है, जिसमें फिलिस्तीन के पक्ष में इजराइल के खिलाफ मुस्लिम देश गोलबंद हो जाते हैं तो इजराइल की मदद को पश्चिमी देश आ जाते हैं। अभी ताजा संघर्ष के बाद जहां अमेरिका, जर्मनी आदि देश इजराइल के आत्मरक्षा पक्ष को सही मान रहे हैं, तो मुस्लिम देशों के संगठन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) फिलिस्तीन के साथ है। आईओसी के 57 देशों ने 16 मई को आपात बैठक बुलाई है।

ओआईसी के सदस्य तुर्की, सऊदी अरब व पाकिस्तान ने यूएन जाने का फैसला किया है। विश्व स्तर पर रूस व चीन अपरोक्ष रूप से फिलिस्तीन के पक्ष में खड़े दिखेंगे। इसमें वैश्विक विभाजन साफ दिख रहा है। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने इजराइल व हमास से खूनी संघर्ष बंद कर शांति की अपील की है। यूएन के महासचिव एंटोनियो गुतेरेस ने कहा कि इस लड़ाई से दोनों देशों में कट्टरता बढ़ेगी। भारत ने यूएन में दो टूक कहा कि वह सभी तरह क हिंसक गतिविधियों की भर्त्सना करता है। भारत चाहता है कि हिंसा तत्काल बंद हो। एक भारतीय नागरिक की मौत पर भी भारत ने इजराइल से अपनी चिंता जाहिर की है। भारत ने सभी पक्षों से सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2334 का पालन करने की भी अपील की जो कहता है कि पूर्वी यरूशलम समेत फिलिस्तीन के कब्जे वाले क्षेत्र में इजरायल द्वारा 1967 से अन्य बस्तियों की स्थापना की कोई कानूनी वैधता नहीं है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत घोर उल्लंघन है। इजराइल व फिलिस्तीन को अंतरराष्ट्रीय संधि का पालन करना चाहिए। 1948 में इजराइल की आजादी के बाद से ही अरब देश और इजराइल कई बार आमने-सामने आ चुके हैं, हालात 2008-09 या फिर 2014 जैसे नहीं हो, इसलिए यूएन को चाहिए कि इजराइल व हमास के बीच शांति स्थापित करने की दिशा में तेजी से पहल करे।

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