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बंगला छोड़ने में दर्द क्यों

उमर अब्दुल्ला को यह बंगला 1999 में उस समय आवंटित किया गया था जब वह जम्मू-कश्मीर से संसद सदस्य थे।

बंगला छोड़ने में दर्द क्यों
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जम्मू-कश्मीर. के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की पूर्व पत्नी पायल अब्दुल्ला को 7, अकबर रोड के बंगले से सोमवार को जबरदस्ती निकाल दिया गया। वो उसमें 1999 से रह रही थीं। पायल उसमें रहने के लिए सुरक्षा कारणों की बात कर रही थी। मुमकिन है कि उनकी बात में दम हो, पर सच्चाई ये है कि एक बार राजधानी के लुटियन जोन में रहने के बाद वहां से निकलना कोई आसान काम नहीं है। हरियाली से ढका लुटियन जोन तो दिल्ली की आपाधापी के बीच सुकून का अहसास दिलाता है। उमर अब्दुल्ला को यह बंगला 1999 में उस समय आवंटित किया गया था, जब वह जम्मू-कश्मीर से संसद सदस्य थे और केंद्र की तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेई सरकार में मंत्री बने थे।
दरअसल बाबा साहेब अबंडेकर के अलावा कोई भी नेता लुटियनजोन के बंगले में एक बार रहने के बाद इसे आराम से खाली करने के लिए तैयार नहीं हुआ। बाबा साहेब ने 1951 में नेहरूजी की कैबिनेट से त्यागपत्र देने के अगले दिन ही अपना पृथ्वीराज रोड का सरकारी आवास खाली कर दिया था। उसके बाद वो सपत्नीक 26 अलीपुर रोड चले गए थे। कुछ समय पहले फिर समाजवादी पार्टी के सर्मथन से राज्य सभा में आए अमर सिंह ने भी बड़े ही बेमन से अपने लोधी एस्टेट के बंगले को खाली किया था जब उनका राज्यसभा का कार्यकाल खत्म हो गया था। उनके बंगले को फाइव स्टार बंगला माना जाता था।
उसे लेने के लिए तमाम सांसद से लेकर मंत्री जुगाड़ कर रहे थे पर वह बंगला मिला भाजपा सांसद गिरिराज सिंह को। अमर सिंह ने इस बंगले में शानदार बार से लेकर स्वीमिंग पूल बनवा लिया था। इसके अलावा इसमें तमाम दूसरी सुविधाएं भी हैं जैसे जुकाजी और पर्याप्त कार पाकिर्ंग। आपको याद होगा कि पूर्व केन्द्रीय मंत्री अजीत सिंह ने भी बड़ी मुश्किल से अपना तुगलक रोड के सरकारी बंगले को खाली किया था। वह बीता लोकसभा चुनाव बागपत से हार गए थे। उसके बाद उन्हें तुगलक रोड का बंगला छोड़ना पड़ा था। वह मांग कर रहे थे कि उनके बंगले को चरण सिंह स्मारक में तब्दील कर दिया जाए, लेकिन सरकार ने उनकी दलील नहीं मानी।
अजीत सिंह को उनके बंगले से निकाला गया। अजीत सिंह के बंगले की बिजली-पानी काट दी गई थी। वो तब कहीं जाकर निकले थे। पिछले लोकसभा चुनाव में राबड़ी देवी की हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को भी अपना 25 तुगलक रोड का बंगला छोड़ना पड़ा था। करीब 12 सालों तक लालू तुगलक रोड बंगले में रहे। कहने वाले कहते हैं लालू ने बहुत ही बेमन से इसे खाली किया। उनकी इस बंगले से बहुत सी यादें जुड़ी थीं। इधर ही उनकी दो बेटियों की शादियां भी हुईं।
इसमें वो जुलाई, 2002 से रह रहे थे। कांग्रेस नेता अंबिका सोनी और शैलजा के भी यूपीए सरकार के लोक सभा चुनाव हार जाने के बाद मंत्री पद गया तो उन्हें छोटे बंगले आवंटित हुए पर दोनों शुरू में उनमें जाने के लिए तैयार नहीं थीं। देखने में आया है कि लोकसभा या राज्य सभा चुनाव हार जाने वाले नेता अपने बंगलों को खाली करने में बहुत दिक्कत खड़ी करते हैं। बीते लोकसभा चुनाव में हार जाने के बाद कई मंत्री अपने बंगले खाली करने के लिए राजी नहीं थे। वे बड़ी मुश्किल से निकले अपने बंगलों से। दरअसल ये बंगले सरकार के हैं और सरकार नियम के मुताबिक ही बंगले आवंटित करती है, इसलिए जो बंगले में रहने के हकदार नहीं हैं, उन्हें खुद ब खुद खाली कर देना चाहिए।
इधर की हर सड़क के दोनों तरफ लगे घने दरख्तों की भारी-भरकम टहनियां सड़क के एक बड़े भाग को अपने आगोश में ले लेती हैं। इसके चलते सूरज की किरणें नीचे जाने से पहले ही रोक ली जाती हैं। इनकी मीठी बयार गर्मी में भी खुशनुमा अहसास देती हैं। लुटियन दिल्ली में मुख्य रूप से इमली, अमलतास, जामुन,बरगद वगैरह के पेड़ लगे हैं। पर शायद सबसे ज्यादा जामुन है। सफदरजंग रोड,सुनहरी बाग, राजाजी मार्ग, कुशक रोड, त्यागराज मार्ग, मोतीलाल नेहरु मार्ग में जामुन हैं। अकबर रोड और तीन मूर्ति मार्ग पर इमली के पेड़ हैं। अकबर रोड के पीछे कुछ अमलतास भी हैं। पृथ्वीराज रोड, औरंगजेब रोड, तीस जनवरी मार्ग, कृष्ण मेनन मार्ग पर नीम हैं। तो बाबा खड़क सिंह मार्ग,तिलक मार्ग, फिरोज शाह रोड, तीन मूर्ति मार्ग इमली के पेड़ों से लबरेज है।
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