Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

मतदाताओं की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की बारी

आलम यह है कि लोकसभा में विपक्षी दल का दर्जा पाने के लिए भी कांग्रेस को संघर्ष करना पड़ रहा है।

मतदाताओं की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की बारी

नई दिल्‍ली. सोलहवीं लोकसभा के चुनाव परिणाम से एक बात तो पूरी तरह स्पष्ट है कि मतदाताओं ने कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए सरकार की नीतियों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी को जिस तरह से ऐतिहासिक जनादेश दिया है, उससे साफ होता हैकि देश की जनता ने नरेंद्र मोदी की नीतियों, विजन और कार्यक्रमों को स्वीकारा है। उनमें विश्वास जताया है। चुनाव नतीजे सामने आने के बाद यह मानने में कोईगुरेज नहीं होना चाहिए कि देश में मोदी की लहर थी, जिसे उनके विरोधी और यहां तक कि विश्लेषक भी मानने को तैयार नहीं थे।

वहीं रही सही कसर सत्ता विरोधी लहर ने पूरी कर दी। सत्ताधारी कांग्रेस को ऐतिहासिक हार का सामना करना पड़ा। उसके सारे दिग्गज हार गए। यहां तक कि कैबिनेट के कई मंत्री तक हार गए। आलम यह है कि लोकसभा में विपक्षी दल का दर्जा पाने के लिए भी उसे संघर्ष करना पड़ रहा है। कांग्रेस का कई राज्यों में खाता नहीं खुलना चिंता की बात होनी चाहिए। हालांकि लोकतंत्र में हार जीत आश्चर्य की बात नहीं है, परंतु यह चुनाव उन दलों के लिए एक सबक के रूप में है, जो सत्ता को सुख भोगने का साधन मान बैठे हैं। यह उनके लिए भी एक सबक है, जो देश में जाति और धर्म की राजनीति करते हैं या करना चाहते हैं।

यह समझ लेना होगा कि देश इससे आगे निकल चुका है। उसे अब विकास चाहिए। चुनाव में मोदी ने विकास को ही मुख्य मुद्दा बनाया था और लोगों ने वोट भी उसी के आधार पर दिए हैं। यही वजह हैकि भारतीय जनता पार्टी ऐतिहासिक प्रदर्शन करने में सफल रही। ना केवल सीटों में बल्कि उसके वोट प्रतिशत में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। 1984 के बाद से भारत की संसदीय राजनीति में यह एक दल या उसके गठबंधन को सबसे बड़ा मिला जनादेश है। तीस वर्ष के बाद यह पहली बार है कि किसी एक पार्टी को लोकसभा में स्पष्ट बहुमत मिला हो। लिहाजा अब उसकी जिम्मेदारियां भी बहुत बढ़ गई हैं।

जिस पर खरा उतरने की उसकी चुनौती होगी। भ्रष्टाचार, महंगाई, कुशासन और परिवारवाद के चलते देश बदहाली की स्थिति में पहुंच गया है। नरेंद्र मोदी लोगों को यह भरोसा दिलाने में कामयाब रहे कि यदि भाजपा को बहुमत मिलता हैकि तो उनकी समस्याएं दूर हो जाएंगी। गुजरात सहित भाजपा के अन्य मुख्यमंत्रियों की कार्यशैली को देखते हुए मतदाताओं ने उनमें और पार्टी में यह भरोसा जताया है। अब यह साफ हो गया हैकि नरेंद्र मोदी देश के अगले प्रधानमंत्री होंगे।

लिहाजा उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान व अपने घोषणापत्र में जो वादे किये हैं, सपने दिखाएं हैं, उसके प्रति मतदाताओं की उनसे अपेक्षा भी बड़ी होगी। जिसे पूरा करने की नरेंद्र मोदी के सामने चुनौतियां भी उतनी ही बड़ी होंगी। क्योंकि भ्रष्टाचार, महंगाई, गिरती अर्थव्यवस्था से देश की जनता तो बेहाल है ही बेरोजगारी की समस्या भी विकराल है।

रोजगार के नए साधन सिरे नहीं चढ़ पा रहे हैं। आंतरिक सुरक्षा और विदेश नीति के मोर्चे पर भारत कमजोर हुआ है। वहीं मंत्रालयों में कामकाज बंद पड़ा है और देश को नेतृत्व की बार-बार कमी महसूस हुई। आशा हैमोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद इन समस्याओं का सार्थक और जल्दी हल निकालेंगे।

Next Story
Top