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मंगल मिशन में कामयाबी के मुहाने पर खड़ा भारत

इसे आंध्रप्रदेश के र्शीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से पीएसएलवी सी-25 की मदद से प्रक्षेपित किया गया था।

मंगल मिशन में कामयाबी के मुहाने पर खड़ा भारत
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भारत ने स्पेस साइंस में कामयाबी के एक और झंडे गाड़ दिए। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) के वैज्ञानिकों ने अपने मंगलयान ‘मार्स ऑर्बिटर’ में 300 दिनों से सुप्त पड़े इंजन को चलाने में सफलता हासिल की। 22 न्यूटन वाले सभी आठों इंजन समेत मार्स मिशन के मुख्य इंजन 440 न्यूटन तरल एपोगी मोटर को आज दोपहर बाद 2 बजकर 30 मिनट पर चालू किया गया। सभी इंजन लगभग 4 सेकेंड तक चालू रखे गए। वैज्ञानिक इसे इतने ही समय के लिए चलाना चाहते थे। यह एक टेस्ट था। मंगल ग्रह की कक्षा में प्रवेश से पहले इन इंजनों को चला कर देखना जरूरी था, ताकि मार्स आर्बिटर जब मंगल की कक्षा में प्रवेश करे तो उस समय ये तरल इंजन सफलतापूर्वक काम करे। ये इंजन ही मार्स आर्बिटर के मंग्रल ग्रह की कक्षा में प्रवेश करने पर उसकी स्पीड को कम करेंगे और मंगलयान मंगल के गुरुत्वाकर्षण में खींचा चला जाएगा। चार सेंकेड के इस टेस्ट में देखा गया कि मंगलयान की स्पीड में कमी आई। इस टेस्ट के बाद भारतीय वैज्ञानिकों के साथ-साथ समस्त देशवासी खुश हैं, क्योंकि अब भारत के मार्स मिशन के सफल होने की गारंटी बढ़ गई है। अपने पहले ही प्रयास में मार्स मिशन में कामयाबी के मुहाने पर खड़ा भारत के लिए 24 सितंबर बुधवार का दिन बेहद ऐतिहासिक होगा, जब मंगलयान ‘मार्स आर्बिटर’ मंगल ग्रह की कक्षा में प्रवेश करेगा और सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित होकर मंगल की परिक्रमा करना शुरू करेगा। इस ऐतिहासिक मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इसरो केंद्र में मौजूद रहकर वैज्ञानिकों का उत्साहवर्धन करेंगे। भारत ने पिछले साल पांच नवंबर को अपने मार्स मिशन की शुरुआत की थी। यह देश का पहला अंतरग्रही अभियान है। इसे आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से पीएसएलवी सी-25 की मदद से प्रक्षेपित किया गया था। अब तक किसी भी देश ने अपनी पहली कोशिश में मंगल ग्रह पर विजय नहीं पाई है। लाल ग्रह के नाम से प्रसिद्ध सौरमंडल के इस पृथ्वी से कई गुना बड़े ग्रह पर करीब 400 करोड़ रुपये की लागत वाले 1350 किलो वजनी मंगलयान को भेजने का मकसद वहां मीथेन की मौजूदगी का अध्ययन करना है। मीथेन से ही जल की संभावना की उम्मीद बनेगी। यह पता लगाना भी है कि जब पूर्व में वहां पानी था, तो अचानक क्या हुआ कि पानी खत्म हो गया। क्या पृथ्वी पर भी ऐसा हो सकता है? इस मिशन का खास आकर्षण उसकी लागत है। पीएम मोदी के शब्दों में हमारे मार्स मिशन पर हॉलीवुड की फिल्म ग्रैविटी (600 करोड़) से भी कम खर्च हुआ है। यूरोपीय, अमेरिकी व रशियन मिशन के बाद मंगल पर फतह करने वाला भारत चाौथ देश बन जाएगा। संयोग यह भी है कि अमेरिकी अंतरिक्ष संस्था नासा का मंगलयान ‘मैवेन’ 10 महीने में गत रविवार रात ही मंगल की कक्षा में पहुंचा है। यह भी मंगल की कक्षा में चारों ओर चक्कर काटेगा और वहां पानी और रिहाइश की संभावनाओं का अध्ययन करेगा। ‘मार्स मिशन’ के सफल होने से दुनियाभर में इसरो के लिए एक और व्यवसायिक द्वार खुल जाएंगे और विश्व में भारत स्पेस साइंस के क्षेत्र में एक महाशक्ति के रूप में अपनी धाक जमाने में सफल होगा।

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