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लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने का प्रयास

कुछ ही दिनों के भीतर संसदीय क्षेत्र के लोगों का अपने सांसद से मोहभंग हो जाता है।

लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने का प्रयास

नई दिल्‍ली. अपने दम पर पूर्ण बहुमत लेकर आई भारतीय जनता पार्टी के आधे से ज्यादा सांसद पहली बार संसद पहुंचे हैं। अपने इन नए सांसदों को संसदीय व्यवस्था का पाठ पढ़ाने के लिए अनूठी पहल करते हुए भाजपा ने हरियाणा के सूरजकुंड में दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया था जो रविवार को समाप्त हो गया। सभी राजनीतिक पार्टियों को इसका स्वागत करना चाहिए। सांसदों को शुचिता का पाठ पढ़ाकर देश की संसदीय प्रणाली को मजबूत करने का यह एक कारगर प्रयास है। यदि सत्ताधारी दल द्वारा संसदीय व्यवस्था, संसदीय क्षेत्र, देशहित और संविधान के प्रति दायित्वों को लेकर सांसदों में शिक्षण-प्रशिक्षण के जरिए जागरूकता पैदा की जा रही है तो यह अच्छी पहल है।

खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो सूत्र दिए हैं जैसे-सांसद अपने-अपने क्षेत्रों में जनहित के काम करें, संसदीय र्मयादा का पालन करें, सभी सांसद एक खास विषय में विशेषज्ञता हासिल करें, भ्रष्टाचार व अहंकार से दूर रहें, अच्छा सार्वजनिक जीवन अपनाएं और अपने लिए लक्ष्य निर्धारित कर मिशन व विजन के साथ काम करें आदि। यदि इन पर अमल हो तो ये काफी कारगर सिद्ध हो सकते हैं। कई बार देखने को मिलता है कि चुनाव होने के कुछ ही दिनों के भीतर संसदीय क्षेत्र के लोगों का अपने सांसद से मोहभंग हो जाता है। लिहाजा, मोदी ने सभी को सीख देते हुए कहा है कि वे दिल्ली की बजाय अपने संसदीय क्षेत्र में ज्यादा दिखें और मीडिया में बयान देने की बजाय अपने काम पर ज्यादा ध्यान दें और जनता से संवाद करें। अकसर देखा जाता है कि सांसद राजनीतिक कारणों से संसद में शोरगुल करते हैं और विधायी कायरें के प्रति सजग व प्रतिबद्ध नहीं होते।

संसद में शून्यकाल और प्रश्नकाल अकसर हंगामे की भेंट चढ़ जाते हैं जबकि संसदीय लोकतंत्र में ये दो घंटे काफी महत्वपूर्णहोते हैं। जिसमें सांसद अपने संसदीय क्षेत्र से जुड़े प्रश्न और विभिन्न ज्वलंत मुद्दों को उठाते हैं। इस पर सरकार को जवाब देना पड़ता है। तो सांसद जिस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं उसके प्रति, संविधान के प्रति, संसद के प्रति और अंतत: राष्ट्र के प्रति ज्यादा जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें इसकी जरूरत महसूस की जाती रही है। देश ने यह भी देखा है कि कुछ सांसदों ने प्रश्न पूछने की एवज में भी मोटी रकम ली है। नरेंद्र मोदी ने सांसदों को आगाह किया है कि वो शुचिता का खयाल रखें और किसी भी प्रकार के प्रलोभन से दूर रहें।

इस प्रकार नरेंद्र मोदी ने सरकार के गठन के साथ ही बता दिया है कि उसकी दशा-दिशा क्या रहने वाली है। उन्होंने सभी मंत्रियों के लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर उन्हें जनता के विश्वासों पर खरा उतरने की नसीहत पहले ही दे रखी है। उन्हें सख्त हिदायत है कि वे अपने रिश्तेदारों को पीए या पीएस नहीं बनाएं। वहीं लचर पड़ी नौकरशाही में भी विश्वास जगाने के लिए उन्हें खुलकर निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अधिकारियों की मंशा सही है तो सरकार उनके साथ रहेगी। यह भी कहा कि कोई भी समस्या होने पर अधिकारी सीधे उन्हें फोने करें या ई-मेल लिखें। कह सकते हैं कि यह अच्छी शुरुआत है। देश के सभी राजनीतिक पार्टियों में भी इस तरह की परिपाटी शुरू हो जाए तो एक आदर्श वातावरण बनाने में बड़ी मदद मिलेगी।

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