Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

कश्मीर में शांति बहाली का प्रयास आवश्यक

जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब राज्य में अधिक अशांति है।

कश्मीर में शांति बहाली का प्रयास आवश्यक

इस समय जम्मू-कश्मीर में शांति की बहुत अधिक आवश्यकता है। पिछले कुछ समय से जिस तरह पत्थरबाजी जारी है, उसमें प्रदेश के विकास में बाधा पहुंच रही हैं। यह सभी जानते हैं कि कौन है जो कश्मीर में पत्थरबाजी करवा रहा है।

घाटी के चंद भटके युवाओं का इस्तेमाल कर कश्मीर में हिंसा और उपद्रव का खेल खेला जा रहा है। सीमा पार की ताकतें नहीं चाहती हैं कि जम्मू-कश्मीर में शांति बनी रहे। हिज्बुल आतंकी बुरहान वानी की मुठभेड़ में मौत के बाद से ही पाकिस्तान और वहां के आतंकी गुटों की कोशिश है कि घाटी में अशांति बनी रहे।

पाकिस्तान की इस चाहत में कश्मीर के अलगाववादी गुटों व नेताओं का भी पूर्ण सहयोग है। भारत और जेएंडके सरकार हमेशा चाहती हैं कि कश्मीर में हालात सामान्य रहें। इसके लिए सरकारें प्रयास भी करती रही हैं, लेकिन स्थिति बद से बदतर हुई हैं।

जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब राज्य में अधिक अशांति है। मुलाकात के दौरान सीएम महबूबा मुफ्ती ने वार्ता की वकालत की है।

उन्होंने कहा कि कश्मीर पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की वार्ता जारी रखने की नीति अपनाने की जरूरत है, लेकिन अहम सवाल है कि क्या कश्मीर में ऐसे हालात हैं कि वार्ता शुरू की जा सके। वार्ता की भी जाय तो किनसे? उन्हीं पाकपरस्त अलगाववादियों से जो कभी भी कश्मीर में शांति नहीं चाहते हैं, जिनकी निष्ठा भारत के प्रति संदिग्ध है।

कश्मीर में कानून व्यवस्था बनाए रखने की अहम जिम्मेदारी महबूबा सरकार की है। सरकार के प्रति जनता में भरोसा कायम रखना राज्य की मुखिया महबूबा का दायित्व है। घाटी में जब तक हालात सामान्य नहीं होते, तब तक वार्ता के लिए गुंजाइश नहीं बन पाएगी।

आज ही सत्तासीन पीडीपी के नेता अब्दुल गनी डार की आतंकियों ने हत्या कर दी है। इससे पहले भी आतंकी सुरक्षा बलों पर हमले करते रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा है कि कश्मीर में वार्ता शुरू करने से पहले हालात का सामान्य होना जरूरी है।

2016 में भी केंद्र सरकार का सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल वार्ता के लिए श्रीनगर गया था, लेकिन अलगाववादी नेता उनसे मिले तक नहीं। नतीजा सिफर ही रहा। उसके बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह खुद दो से तीन बार श्रीनगर गए, वार्ता की अपील की, लेकिन कोई नहीं आया।

इससे साफ है कि कश्मीर में उपद्रव व हिंसा चाहने वालों का मकसद वहां अशांति बनाए रखना है, इसलिए वे सरकार की ओर से वार्ता की किसी भी कोशिश को सिरे नहीं चढ़ने देते। नरेंद्र मोदी पीएम की शपथ से ही पड़ोसी के साथ शांति का पैगाम दिया था।

उन्होंने बार-बार संदेश दिया है कि भारत पाकिस्तान से शांतिपूर्ण संबंध के पक्षधर हैं, लेकिन पाकिस्तान के हुक्मरान हैं कि वे कश्मीर में उपद्रव जारी रखकर भारत को स्थिर नहीं होने देना चाहते हैं। पाकिस्तान का प्रयास कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाना है।

कारण पाकिस्तान को पता है कि कश्मीर का भारत में वैधानिक विलय है। अभी कश्मीर में जो हालात हैं, उसमें महबूबा सरकार को बड़ी भूमिका निभानी चाहिए। पहले उनकी कोशिश पत्थरबाजों पर लगाम लगाने की होनी चाहिए। कारण आतंकवादी सुरक्षा बलों को निशाना बनाने में पत्थरबाजों को ढाल के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

हमारी सेना को भी आतंकवाद के खिलाफ ऑपरेशन में स्थानीय पत्थरबाजों का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति ठीक नहीं है। महबूबा से अगर स्थिति नहीं संभलती है तो केंद्र राज्यपाल शासन के बारे में सोच सकता है, लेकिन यह स्थिति उत्पन्न नहीं होना चाहिए।

पीडीपी-भाजपा गठबंधन को भी एक-दूसरे पर आरोप के बजाय राज्य के शासन को मजबूत बनाने के लिए काम करना चाहिए। उपचुनाव में पीडीपी की हार बताती है कि उसकी जनता में लोकप्रियता कम हो रही है।

उपचुनाव में जिस तरह अब तक सबसे कम वोट पड़े हैं, उससे भी लगता है कि महबूबा सरकार पर जनता का भरोसा बेहद कम है। इस वक्त केंद्र और राज्य की कोशिश कश्मीर में शांति बहाली की होनी चाहिए। समस्या के समाधान के लिए सैन्य तरीका हमेशा सफल नहीं रहता है।

Next Story
Top