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नरेन्द्र सिंह तोमर का लेख : कृषि आत्मनिर्भरता की ओर

अर्थव्यवस्था को संकट के समय में अन्नदाता के परिश्रम का संबल मिला है। चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में देश के सकल घरेलु उत्पाद की दर में कृषि क्षेत्र में 3.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। कोरोना के कारण प्रभावित हुए उद्योग-धंधों के कारण वैश्विक स्तर पर अर्थवयवस्था में प्रतिकूलता आई है, किन्तु कृषि क्षेत्र ने इन विपरीत परिस्थतियों में भी अपेक्षा से बहुत बेहतर कार्य किया है। इससे साफ है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर कृषि आत्मनिर्भर की ओर चल दी है।

नरेन्द्र सिंह तोमर का लेख : कृषि आत्मनिर्भरता की ओर
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नरेन्द्र सिंह तोमर

देश की अर्थव्यवस्था को संकट के समय में अन्नदाता के परिश्रम का संबल मिला है। चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में देश के सकल घरेलु उत्पाद की दर में कृषि क्षेत्र में 3.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। कोरोना महामारी और लॉकडाउन के कारण प्रभावित हुए उद्योग-धंधों के कारण वैश्विक स्तर पर अर्थवयवस्था में प्रतिकूलता आई है, किन्तु देश के कृषि क्षेत्र ने इन विपरीत परिस्थतियों में भी अपेक्षा से बहुत बेहतर कार्य किया है।

भारतीय जीवनशैली की यह विशेषता रही है कि हम संकट के काल को भी अवसर में परिवर्तित कर देने की अद्भुत क्षमता रखते हैं। संघर्ष में हम आगे बढ़ते हैं और विपरीत परिस्थितयों में अचंभित कर देने वाले परिणाम देने की योग्यता रखते है। कोरोना संक्रमण काल ने जब पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को लड़खड़ा दिया तो भारत के किसानों ने इस संकट काल में भी अपने परिश्रम से धरा की कोख से सोना उपजाया। किसानों की इसी सक्रियता के के कारण लाकडाउन में भी गांवों की अर्थ व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रही और अर्थव्यवस्था को जो सहारा मिला वह जीडीपी के ताजा आंकड़ों में स्पष्ट परिलक्षित हो रहा है।

किसानों के परिश्रम को सार्थक परिणाम तक पहुंचाने में इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में भारत सरकार के कृषि मंत्रालय, कृषि विज्ञानियों-अधिकारियों एवं राज्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कृषि मंत्रालय ने लाॅकडाउन की घोषणा के तत्काल बाद कृषि उत्पादों की खरीद, मंडी संचालन, खेत-खलिहान में किसानों के कार्यों, उर्वरको-कीटनाशकों और बीजों के विनिर्माण एवं पैकेजिंग यूनिट्स को छूट देने का मामला गृह मंत्रालय के सामने उठाया और इस छूट के माध्यम से ही लाॅकडाउन में कृषि कार्य निर्विघ्न चलते रहे। किसानों को कस्टम हायरिंग केंद्र के माध्यम से फार्म मशीनरी उपलब्ध कराना हो या फसल कटाई के लिए हारवेस्टरों को एक राज्य से दूसरे राज्यों में प्रवेश का मामला हो, किसानों के हित में सारे प्रावधान किए गए। किसानों के उत्पादों की निर्बाध खरीद सुनिश्चित करने के लिए सरकार की व्यवस्थाओंका ही परिणाम है कि इस वर्ष समर्थन मूल्य पर बंपर खरीद हुई है।

खाद्यान्न में हमारी आत्मनिर्भरता सुखद भविष्य के संकेत दे रही है। खाद्यान्न उत्पादन के अंतिम आंकलन के अनुसार भारत ने 2018-19 में कुल उत्पादन 285.21 मिलियन टन उपलब्धि हासिल की है। 2019-20 के तीसरे अग्रिम अनुमानों के अनुसार खाद्यान्न उत्पादन 296.50 मिलियन टन अनुमानित है जो अब तक का सर्वाधिक है। कोविड लाकडाउन के दौरान ई-नाम नेटवर्क के अंतर्गत 415 मंडियों को जोड़ा गया है। अब देश की लगभग एक हजार मंडिया ई-नाम नेटवर्क से जुड़ गई हैं। लाकडाउन में किसानों ने इस आनलाइन प्लेटफार्म का उपयोग किया है।

कोविड महामारी के दौरान रबी फसल का बंपर उत्पादन, उसकी कटाई और समर्थन मूल्य पर खरीद ने किसानों की समृद्धता में तो वृद्धि की ही है, राष्ट्र के खाद्यान्न भंडार को भर दिया है। वर्तमान खरीफ मौसम 2020 में, रिकॉर्ड 1082.22 लाख हेक्टेयर (28 अगस्त 2020 तक)क्षेत्र को कवर किया गया है जो 2019 की तुलना में 12 लाख हेक्टेयर अधिक है।

ग्रीष्मकालीन/जायद मौसम में भी इस वर्ष इस समय तक बुवाई का क्षेत्रफल 57.07 लाख हेक्टेयर था जबकि पिछले वर्ष इस मौसम के दौरान 41.31 लाख हेक्टेयर में बुवाई की गई थी। इस वर्ष अभी तक 389.81 लाख हेक्टेयर में धान की रोपाई की जा चुका है जो कि गत वर्ष इस समय तक के 354.41 लाख हेक्टेयर से लगभग 10 प्रतिशत अधिक है। वहीं इस वर्ष दलहन का क्षेत्रफल भी 4.6 प्रतिशत बढ़ कर 134.57 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। अरहर, उरद और मूंग, इन तीन दालों के क्षेत्रफल में विगत वर्ष के मुकाबले वृद्धि दर्ज की गई है। खाद्य तेलों के आयात को कम करना हमारी पहली प्राथमिकता है। इस वर्ष तिलहन के क्षेत्रफल में गत वर्ष की तुलना में 14 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है, सोयाबीन और मूंगफली का रकबा भी बढ़ा है। उम्मीद की जा सकती है कि तिलहनों का उत्पादन बढ़ने से खाद्य तेल की हमारी आवश्यकता पूर्ण हो सकेगी। किसानों के परिश्रम के परिणाम जब उपज के रूप में सामने आएगा तो समृद्धि उनके चेहरों पर खिल उठेगी।

किसानों के परिश्रम के बाद भी यह देखा जाता रहा है कि परिणाम उनके अनुरूप नहीं मिलते रहे है। कृषि के क्षेत्र में अब तक सर्वाधिक बाधाएं रही हैं। तीन माह पूर्व भारत सरकार द्वारा दो अध्यादेशों एवं नियमों के सरलीकरण से इस दिशा में क्रांतिकारी परिवर्तन की राह खुली है। प्रधानमंत्री शनरेंद्र मोदी जी दूरदर्शिता, दृढ़ संकल्पशक्ति और किसानों की आय दो गुना करने का ध्येय इन परिवर्तनों में सुस्पष्ट हो रहा है। कृषि उत्पाद व्यापार और वाणिज्य संवर्धन एवं सरलीकरण अध्यादेश 2020 से किसानों को मंडियों से आजादी मिल गई है। अब वे अपना उत्पाद देश में कहीं भी बेच सकते हैं। वहीं किसान-सशक्तिकरण और संरक्षण- मूल्य आश्वासन पर करार और फार्म सेवाएं अध्यादेश 2020 के माध्यम से किसान बुवाई से पहले ही अपनी फसल के दाम तय कर सकेगा। कांट्रेक्ट फार्मिंग से किसानों को सुनिश्चित दाम मिलेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत एक लाख करोड़ रुपये के कृषि अवसरंचना फंड ऐतिहासिक प्रावधान किया है। कृषि में सरकारी निवेश तो सदैव रहा है लेकिन निजी निवेश बहुत कम है और यदि यह आया भी है तो गांवों की जगह जिला मुख्यालयों या बड़े शहरों तक सीमित है। हमारा उद्देश्य है कि गोदाम, कोल्ड स्टोरेज और अन्य अवंसरचनाएं किसानों को उनके गांव में मिल सके। इस फंड के माध्यम से यह उद्देश्य पूर्ण हो पाएगा।

देश में दस हजार किसान उत्पादक संघ एफपीओ के गठन से छोटे एवं मझोले किसानों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचेगा। मंडी तक अपनी फसल ले जाने में अक्षम किसानों को उनकी फसल के उचित दाम तो मिलेंगे ही उन्हें खाद, बीज और सिंचाई की सुविधाएं भी सहजता से उपलब्ध हो सकेगी। सरकार के इन निर्णयों ने देश के कृषि सेक्टर की दशा और दिशा ही बदल दी है। किसानों के परिश्रम का एक-एक पैसा उन्हें मिले इसके लिए सरकार कृत संकल्पित है। 2015 में हजारीबाग में कृषि अनुसंधान संस्थान की नीव रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में दूसरी कृषि क्रांति का आह्वान किया था। विगत वर्षों में प्रधानंमत्री के नेतृत्व में भारत सरकार द्वारा कृषि के क्षेत्र में उठाए गए कदमों में उनके इस आह्वान की प्रतिबद्धता दृष्टिगोचर हो रही है। परिस्थितियां और प्रयास यही स्पष्ट कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान को पूरा करने का समय आ गया है। यह देश दूसरी कृषि क्रांति की ओर अग्रसर हो चला है।

(लेखक केंद्र सरकार में कृषि एवं किसान कल्याण व पंचायती राज मंत्री हैं)

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