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डॉ. मोनिका शर्मा का लेख : सैलानियों की सुरक्षा जरूरी

बढ़ती बेरोजगारी के दौर में पर्यटन उद्योग से जुड़े सभी पहलुओं से गम्भीरता से विचार करना और पर्यटकों के लिए सुरक्षित सहयोगी बने परिवेश बनाना है| पर्यटन उद्योग में संगठित और असंगठित दोनों ही क्षेत्रों से जुड़े लोगों को रोजगार मिलता है। इतना ही नहीं शहरों में बढ़ती भीड़ को देखते हुए यह सेवा क्षेत्र स्थानीय निवासियों को अपने ही क्षेत्र में आजीविका कमाने का अवसर देती है। हमारे देश के धार्मिक, ऐतिहासिक या प्राकृतिक दर्शनीय स्थल मौजूद हैं। साथ ही चिकित्सा और पारिस्थितिकी पर्यटन में लोगों दूसरे देशों के लोगों की रुचि बढ़ रही है। क्षेत्र कोई भी हो आने वाले लोगों को खुद को सुरक्षित महसूस करने का भरोसा मिलना चाहिए।

डॉ. मोनिका शर्मा का लेख : सैलानियों की सुरक्षा जरूरी
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डॉ. मोनिका शर्मा

हमारे देश के गौरवशाली इतिहास देखने- जानने और आतिथ्य सत्कार को अनुभूत करने के लिए देश ही नहीं दुनिया के कोने-कोने से पर्यटक आते हैं। दुखद है कि भारतीय संस्कृति के रंग देखने आने वाले पर्यटकों के साथ छेड़छाड़, लूटपाट और ठगने की घटनाएं भी खूब होती हैं| यहां तक कि महिला सैलानियों के साथ तो दुष्कर्म जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं। भारत भ्रमण के लिए आने वाले अतिथियों के साथ आपराधिक तत्व बाकायदा संगठित होकर कई तरह के दुर्व्यवहार अपराधों को अंजाम देते हैं| ऐसे में सराहनीय है कि पर्यटन ध्येय वाक्य पधारो म्हारे देश की मीठी मनुहार वाले राजस्थान में अब सैलानियों के साथ बदसलूकी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हेतु ऐसे अपराधों को गैरजमानती अपराध की श्रेणी में शामिल किया जाएगा।

गौरतलब है कि हाल ही पारित किए गए राजस्थान पर्यटन व्यवसाय विधेयक-2021 में संशोधन कर धारा 27-ए जोड़ी गई है, अब ऐसे अपराध गैरजमानती होंगे। साथ ही धारा 13 की उप-धारा 3 में अपराध दोहराया जाता है, तो यह भी धारा 13 की उपधारा 4 में गैरजमानती होगा। राज्य की सरकार के मुताबिक राजस्थान पर्यटन व्यवसाय विधेयक वर्ष 2010 में पर्यटन व्यवसाय विकास में सुधार लाने, राजस्थान के गौरव की अच्छी भावना के साथ पर्यटकों को लौटाने और उनके साथ बदसलूकी को रोकने के उद्देश्य से लाया गया था, लेकिन इसमें यह उल्लेख नहीं किया गया था कि सजा जमानती थी या गैर-जमानती, इसीलिए यह संशोधन किया गया है| इतना ही नहीं राजस्थान सरकार आने वाले दिनों में विदेशी और स्थानीय पर्यटकों की यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए एक आधिकारिक मोबाइल ऐप ला रही है। उम्मीद कि जा सकती है अब सख्त कार्रवाई की राह खुलने से न केवल ऐसे अपराधों पर लगाम लगेगी बल्कि तकनीकी सहायता भरोसेमंद साथी की तरह पर्यटकों की यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने में सहायक भी रहेगी।

यह वाकई दुर्भाग्यपूर्ण है कि अतुल्य भारत के समृद्ध इतिहास को जानने की इच्छा रखने वाले विदेशी पर्यटकों को देश का वर्तमान संभवत और भी ज्यादा चौंकाता है। हैरानी लाजिमी है क्योंकि भारत भ्रमण पर आए पर्यटकों के साथ हर तरह की बदसलूकी के समाचार आए दिन अखबारों की सुर्खियां जो बनते हैं। राजस्थान ही नहीं कमोबेश सभी प्रदेशों में देशी-विदेशी सैलानियों के साथ दुर्व्यवहार और लूटपाट की घटनाएं होती हैं। देखा जाए तो किसी भी राज्य में भ्रमण के लिए आने वाले सैलानियों के साथ किए जाने वाले व्यवहार के लिए दिशा-निर्देशों या कानूनी सख्ती की दरकार होनी ही नहीं चाहिए। बावजूद इसके नियम-कानूनों की अनदेखी करते हुए ऐसे अपराध किए जाते हैं जो पूरे देश की छवि बिगाड़ते हैं। बीते कुछ बरसों में हुई ऐसी घटनाओं की खबरों में भारत को वैश्विक स्तर पर 'असुरक्षित भारत' कहकर संबोधित किया गया है। वैश्विक स्तर पर देश की यह छवि यकीनन नुकसानदेह ही है|कहना गलत न होगा कि 'पधारो म्हारे देस' और 'अतिथि देवो भव' की संस्कृति वाले भारत में पर्यटकों के साथ किया गया दुर्व्यवहार संस्कारित नागरिकों के जीवन मूल्यों के साथ-साथ प्रशासनिक मुस्तैदी की लचर स्थिति को भी सामने रखता है, जबकि भारत के सांस्कृतिक और पारंपरिक समाज की झलक देखने में संसार के हर हिस्से में बसे लोगों की रुचि है। सांस्कृतिक विरासत के ऐसे खास रंग हमारे देश की एक विशिष्ट पहचान भी बनाते हैं। खासकर राजस्थान की विरासत को देखने का चाव तो दुनियाभर के लोगों में हैं। साल 2020 में द न्यूयॉर्क टाइम्स की जिस सूची में दुनियाभर के मुख्य दर्शनीय स्थलों को शामिल किया गया उसमें सूर्यनगरी के नाम से प्रसिद्ध जोधपुर भी शुमार था|

यह वाकई विचारणीय है कि सैलानी बनकर आने वाले अतिथियों की यात्रा हमारी धरोहर को देखने से ही नहीं आर्थिक लाभ, रोजगार और सामाजिक-सांस्कृतिक बेहतरी से जुड़ी है। दुनिया के किसी भी देश में पर्यटकों का आना न केवल वहां की सांस्कृतिक-ऐतिहासिक विरासत का मान बढ़ाता है बल्कि आय का भी बड़ा स्रोत होता है। भारत की जीडीपी में भी पर्यटन का बड़ा योगदान है। हमारे यहां पर्यटन उद्योग सबसे बड़ा सेवा उद्योग है। वर्ष 2019 के आंकड़े बताते हैं कि देश के सकल घरेलू उत्पाद यानी कि जीडीपी में पर्यटन की 9.3 की हिस्सेदारी है। कुल निवेश में यह भागीदारी 5.9 प्रतिशत थी। पर्यटकों का आना विदेशी मुद्रा अर्जित करने और आजीविका का अवसर प्रदान के मोर्चे पर बेहद अहम है| इनके भ्रमण से होने वाली आमदनी के चलते ऐसे स्थलों की सार संभाल भी हो पाती है। देश के जनमानस और जनजीवन के रंग देखने के लिए आने वाले पर्यटकों से बड़ी संख्या में दूरदराज़ के गांवों तक लोगों को रोजगार मिलता है। गौरतलब है कि हमारे देश में कुल 39 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल मौजूद हैं। यह सूची भारत को पर्यटन के लिहाज से बहुत महत्त्वपूर्ण बनाती है। टाइम पत्रिका के मुताबिक केवल प्रेम के प्रतीक ताज को देखने ही हर वर्ष लाखों पर्यटक भारत आते हैं। गौरतलब है कि ताज को टाइम मैगज़ीन इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण स्थानों की सूची में भी स्थान दे चुकी है।

कोरोना काल में वैश्विक स्तर पर आए ठहराव के बाद अब परिस्थतियां धीरे-धीरे सहज होने की उम्मीद है। ऐसे में महामारी के बाद विरासत स्थलों की स्वच्छता और पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर विशेष प्रयास किए जाने आवश्यक हैं। बढ़ती बेरोजगारी के दौर में पर्यटन उद्योग से जुड़े सभी पहलुओं से गम्भीरता से विचार करना और पर्यटकों के लिए सुरक्षित सहयोगी बने परिवेश बनाना है| पर्यटन उद्योग में संगठित और असंगठित दोनों ही क्षेत्रों से जुड़े लोगों को रोजगार मिलता है। इतना ही नहीं शहरों में बढ़ती भीड़ को देखते हुए यह सेवा क्षेत्र स्थानीय निवासियों को अपने ही क्षेत्र में आजीविका कमाने का अवसर देती है। हमारे देश के कोने कोने में धार्मिक, ऐतिहासिक-पुरातात्विक या प्राकृतिक दर्शनीय स्थल मौजूद हैं। साथ ही अब चिकित्सा और पारिस्थितिकी पर्यटन में लोगों दूसरे देशों के लोगों की रुचि बढ़ रही है| क्षेत्र कोई भी हो आने वाले लोगों को खुद को सुरक्षित महसूस करने का भरोसा मिलना चाहिए। बड़ी संख्या में पर्यटकों को बुलाने के लिए सुरक्षित माहौल देने, पर्यटन स्थलों की सूचनाएं उपलब्ध करवाने और समय पर प्रशासनिक का सहयोग मिलने का वातावरण बनाया जाना आवश्यक है।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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