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संपादकीय : कोरोना काल में योग को आत्मसात करने का वक्त

दशमलव व जीरो के बाद भारत की विश्व को योग बड़ी देन है। भारत के जीवन दर्शन में योग समाहित है, प्राचीन काल से ही भारतीय मनीषियों ने अनवरत शोध व अध्ययन के बाद योग और ध्यान को विकसित किया। भारत की कई पीढ़ियों की मेहनत के बाद योग पूर्ण रूप में सामने आया। पाणिनी, पतंजलि, याज्ञवल्क्य ने योग सूत्रों का प्रतिपादन किया, उपनिषदों व गीता में योग पर अनेक सूत्र हैं। भारत में योग के कई रूप व विधा प्रचलित हैं।

संपादकीय : कोरोना काल में योग को आत्मसात करने का वक्त
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संपादकीय लेख

Haribhoomi Editorial : लगभग डेढ़ साल से कोरोना से जूझ रही दुनिया को स्वस्थ जीवनशैली का महत्व समझ में आया है। प्राकृतिक रहन-सहन व खानपान और योग-व्यायाम को अपनी जीवनशैली में अपनाने वाले लोग कोरोना से या तो अछूते रहे या कम प्रभावित हुए। दशमलव व जीरो के बाद भारत की विश्व को योग बड़ी देन है। भारत के जीवन दर्शन में योग समाहित है, प्राचीन काल से ही भारतीय मनीषियों ने अनवरत शोध व अध्ययन के बाद योग और ध्यान को विकसित किया। भारत की कई पीढ़ियों की मेहनत के बाद योग पूर्ण रूप में सामने आया। पाणिनी, पतंजलि, याज्ञवल्क्य ने योग सूत्रों का प्रतिपादन किया, उपनिषदों व गीता में योग पर अनेक सूत्र हैं। भारत में योग के कई रूप व विधा प्रचलित हैं। आज जब विश्व अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रहा है, तो इसके पीछे कई बीकेएस अयंगर, श्रीश्री रविशंकर, रामदेव समेत अनेक भारतीय योगाचार्यों की अथक मेहनत थी, जिन्होंने दुनिया को योग से न केवल परिचित करवाया, बल्कि उसके फायदे भी बताए। इस बार योग फॉर वेलनेस अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम है। विश्व याग दिवस पर हर साल अलग-अलग थीम रखी जाती है। कोरोना महामारी के चलते पिछले साल 2020 में इसकी थीम 'सेहत के लिए योग- घर से योग' रखी गई थी।

चूंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक शारीरिक, मानसिक व आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ ही पूर्ण स्वास्थ्य है, जिसमें योग व ध्यान का अहम योगदान है। 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र के 177 सदस्य देशों ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाए जाने के भारत के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। पीएम मोदी के इस प्रस्ताव को 90 दिन के अन्दर 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा सर्वसम्मति से पूर्ण बहुमत से पारित किया गया, जो संयुक्त राष्ट्र संघ में किसी दिवस प्रस्ताव के लिए सबसे कम समय है। यह दिन वर्ष का सबसे लम्बा दिन होता है और योग भी मनुष्य को दीर्घ जीवन प्रदान करता है। इसके बाद 21 जून 2015 को विश्व में पहली बार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया था, जिसकी पहल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 27 सितम्बर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण से की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि 'योग भारत का एक अमूल्य उपहार है। यह दिमाग और शरीर की एकता का प्रतीक है, मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य है, विचार, संयम और पूर्ति प्रदान करने वाला है तथा स्वास्थ्य के लिए एक समग्र दृष्टिकोण प्रदान करने वाला है। यह केवल व्यायाम के बारे में नहीं है, बल्कि अपने भीतर एकता की भावना, दुनिया और प्रकृति की खोज के विषय में है।

हमारी बदलती जीवनशैली में यह चेतना बनकर, हमें जलवायु परिवर्तन से निपटने व स्वस्थ रहने में मदद कर सकता है। तो आइए, एक अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस को गोद लेने की दिशा में काम करते हैं।' दरअसल, योग न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि मन और मस्तिष्क का संतुलन भी बनाए रखता है। योग से कई शारीरिक और मानसिक विकारों से निजात पाया जा सकता है। वायरस से दूर रखने के लिए खुद की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में योग बेहद मददगार है। इस सातवें योग दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 21 जून सोमवार की सुबह 6.30 बजे जब कार्यक्रम को संबोधित करेंगे, तो निश्चित ही शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग को आत्मसात करने का संदेश देंगे। स्वस्थ रहने के लिए प्रत्येक दिन 45 मिनट श्रम करना जरूरी है, इसके लिए वैज्ञानिक रूप से विकसित योग से बेहतर विकल्प कुछ नहीं हो सकता है। भारत में योग को पांचवीं से स्नातक तक योग को अनिवार्य शिक्षा पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए। योग में रोजगार सृजन की भी अपार क्षमता है। आज कोरोना से जूझ रहे विश्व को योग की अधिक जरूरत है, इसलिए आइए योग को दैनिक जीवन में अनपाएं।

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