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Editorial : नदियों में शव फेंकना अपराध, हो कार्रवाई

नदी में तैरते शवों के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) का संज्ञान लेना मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है। एनएचआरसी ने केंद्र, यूपी और बिहार की सरकारों को नोटिस जारी कर चार हफ्तों में कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।

Editorial : नदियों में शव फेंकना अपराध, हो कार्रवाई
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संपादकीय लेख

Haribhoomi Editorial : कोरोना से जिनकी मौत हो रही है, कम से कम वे सम्मानजनक अंतिम संस्कार के हकदार हैं। यदि मौत कोरोना से नहीं भी हुई है, तब भी उनके शव का यथोचित संस्कार किया जाना चाहिए। सरकार को इस बात का ध्यान रखना चाहिए। प्रशासन ने खुद कोरोना से होने वाली मौतों का अंतिम संस्कार कोविड प्रोटोकॉल करने का तय किया है, फिर प्रशासन की जिम्मेदारी होती है कि वे ऐसे शवों की अंत्येष्टि सुनिश्चित करे। बीते कुछ दिनों में गंगा नदी में दर्जनों शव तैरते मिले हैं। दृश्य डरावने व मानवता को शर्मसार करने वाले थे। इसको लेकर बिहार और यूपी सरकार में आरोप-प्रत्यारोप भी हुए और विपक्ष ने सत्तधारी दलों पर आरोप भी लगाए।

नदी में तैरते शवों के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) का संज्ञान लेना मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है। एनएचआरसी ने केंद्र, यूपी और बिहार की सरकारों को नोटिस जारी कर चार हफ्तों में कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने कहा है कि ऐसा लगता है जैसे प्रशासन जनता को गंगा नदी में आधे जले हुए या बिना जले शवों को बहाने के नुकसानों के बारे में शिक्षित नहीं कर सका है। पवित्र नदी गंगा में शवों को बहाना साफ तौर पर जल शक्ति मंत्रालय के स्वच्छ गंगा अभियान के तहत जारी किए दिशानिर्देशों का उल्लंघन है। आयोग में 11 मई को यह शिकायत की गई थी, जिसमें कई मीडिया रिपोर्ट्स में जाहिर की गई आशंका कि नदी में बहाए जा रहे शव कोरोना संक्रमितों के हो सकते हैं, का जिक्र किया गया है। ऐसे में शवों को इस तरह बहाना उन लोगों के लिए गंभीर हो सकता है जो अपनी रोजमर्रा के जीवन में नदी पर निर्भर है। अगर ये शव कोरोना संक्रमितों के नहीं भी हैं तो भी इस तरह नदी में लाशें बहाना समाज के लिए शर्मिंदा करने वाला कृत्य है, क्योंकि यह मृत व्यक्ति के मानवाधिकारों का भी हनन है।

मानवाधिकार आयोग को इस मामले मे हस्तक्षेप करना चाहिए और इन मामलों को रोकने में असफल रहे जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। कांग्रेस ने गंगा में शव मिलने की न्यायिक जांच की मांग की है। केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश और बिहार सरकार को गंगा में शव कैसे आए, इसे रोकने की जिम्मेदारी किसकी थी, शवदाह गृह का पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं था, आदि सवालों का न केवल जवाब देना चाहिए, बल्कि इन समस्याओं का समाधान करना चाहिए। गंगा में शव बहाना अमानवीय भी है और कानूनन आपराधिक भी। ऐसा करना दंडनीय है। इसलिए प्रशासन का दायित्व है कि वह पता करे कि गंगा में इतनी बड़ी संख्या में शव कैसे पहुंचा। राज्य सरकार व स्थानीय प्रशासन का दायित्व है कि अपनी जनसंख्या के अनुपात में श्मशान का इंतजाम करे। आज जब देश में कोविड की दूसरी लहर घातक सिद्ध हो रही है, अचानक लोगों की जान जाने लगी है, तो जैसे श्मशान में शवों की भीड़ लगने लगी है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन को त्वरित इंतजाम करना चाहिए।

प्रशासन लोगों की तकलीफ समझे, सरकार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करे। यूं नदियों में शव बहाने से एक तो उसका जल दूषित होगा, दूसरा लोगों में दहशत फैलेगी, तीसरा शव वाले क्षेत्र के आसपास बीमारियां फैलेंगी। शव बहाने वाले परिवार को भी पकड़े जाने की आवश्यकता है। लोगों की भी इतनी नैतिकता होनी चाहिए कि वे अपने परिजन के शवों को उचित तरीके सं अंतिम संस्कार करे, नदियों में नहीं बहाए। अस्पताल प्रशासन को भी कोरोना से हुई मृतकों के शवों का कोविड प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार सुनिश्चित करना चाहिए। गंगा में शव बहाने के दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही सरकारों को कोविड से या सामान्य मौत के बाद शवों के अंतिम संस्कार को लेकर संजीदगी दिखानी चाहिए।

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