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संसद को बाधित करना सांसदों का दायित्व नहीं

कांग्रेस वोटिंग के प्रावधान के तहत लोकसभा में चर्चा की मांग कर रही है।

संसद को बाधित करना सांसदों का दायित्व नहीं
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संसद का शीत सत्र विपक्षी जिद की भेंट चढ़ता जा रहा है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की सांसदों से संसद चलने देने की अपील का भी विपक्षी दलों पर असर नहीं पड़ा। पिछले 16 दिनों से संसद को बाधित कर रहे विपक्ष ने सत्रहवें दिन भी सत्र नहीं चलने दिया। विमुद्रीकरण पर बहस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संसद के दोनों सदनों में मौजूदगी और उनके जवाब की मांग पर अड़े विपक्षी दलों को यह भान भी नहीं है कि वे भी जनता के चुने हुए प्रतिनिधि हैं और संसद को चलने देने की जनता के प्रति उनकी भी जिम्मेदारी है। राष्ट्रपति हंगामा कर सत्र को बाधित कर रहे सांसदों को उनकी इसी जिम्मेदारी का एहसास करा रहे थे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि संसद की कार्यवाही बाधित करना कतई स्वीकार नहीं है, लेकिन विपक्षी सांसद हैं कि उनके कानों पर जूं तक नहीं रेंगा। विपक्षियों ने राष्ट्रपति की नसीहत की लाज भी नहीं रखी।
विमुद्रीकरण पर संसद में चर्चा
अब अगर देखा जाए तो 16 नवंबर को सत्रावसान होगा। 10, 11, 12 व 13 नवंबर को अवकाश रहेंगे। यानी कि बस तीन दिन और कार्यवाही चलेगी। विपक्ष के रवैये को देखते हुए अभी यह भी नहीं कहा जा सकता है कि शीतसत्र के बाकी बचे तीन दिन संसद चलेगी। इस सत्र में दो दर्जन से अधिक विधेयकों पर चर्चा होनी थी, लेकिन एक पर भी बात नहीं हुई। सरकार विमुद्रीकरण पर संसद में चर्चा करना चाहती है। सत्र के शुरू दिन से सरकार ने चर्चा का प्रस्ताव दिया। लेकिन चर्चा शुरू होने के बाद विपक्षी संसद को ठप करने के अलग-अलग पैंतरे अपनाने लगे। चालू सत्र में अब तक कांग्रेस ने संसद को सबसे अधिक बाधित किया है।
सरकार पर हमला
कांग्रेस वोटिंग के प्रावधान के तहत लोकसभा में चर्चा की मांग कर रही है, इसके लिए सरकार तैयार नहीं है। इस कारण कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमले कर रहे हैं। विमुद्रीकरण को वे कभी बेकार फैसला करार दे रहे हैं, तो कभी इसे अब तक का सबसे बड़ा घोटाला बता रहे हैं। लेकिन सरकार पर हमला करते वक्त वे भूल जाते हैं कि कांग्रेस सरकार के दौरान हुए अनगिनत घोटालों के चलते ही जनता ने उन्हें सत्ता से बेदखल किया है। जनता जानती है कि राहुल के सामने ही कांग्रेस शासन के दौरान अनेक घोटाले हुए।
सरकार से चर्चा की मांग
गौर करने वाली बात है कि जब संसद में किसी विषय पर बहस होगी, तभी तो विपक्ष और सत्ता पक्ष को अपनी-अपनी बात रखने रखने का मौका मिलेगा। इस प्रक्रिया में देश की जनता चीजों को जान-समझ सकेगी। सरकार बार-बार विपक्षी दलों से चर्चा में शामिल होने देने की अपील कर रही है, इसके बाद भी राहुल का सरकार से चर्चा की मांग करना हास्यास्पद लगता है। इस समय देशहित में यही है कि हंगामा कर रहे सांसद जनता के प्रति अपने दायित्वों को समझें व बाकी बचे तीन दिन संसद चलने दें। सरकार भी देखे कि जरूरी हो तो सत्र बढ़ाया जाए।
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