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तटस्थ विचारकों ने भी माना मोदी का लोहा

दिल्ली के लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स इंडिया समिट-2017 में गुहा ने 66 वर्षीय नेता मोदी का करिश्मा और अपील जाति और भाषा की सीमा के परे है।

तटस्थ विचारकों ने भी माना मोदी का लोहा
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सबसे सफल प्रधानमंत्री बनने की राह पर हैं। वे अब तक के तीसरे सबसे सफल प्रधानमंत्री हैं। यह बात अगर मोदी के किसी प्रशंसक ने कही होती तो उसके ज्यादा मायने नहीं होते, क्योंकि प्रशंसक अपने पसंदीदा नेता के लिए कुछ भी कह सकते हैं, लेकिन जो हमेशा नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व व नेतृत्व का आलोचक रहा हो और अब अगर वह कहे कि नरेंद्र मोदी देश के सफल प्रधानमंत्रियों में शुमार हो गए हैं, तो इसके बड़े मायने हैं।

मोदी के आलोचक माने जाने वाले जाने-माने इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा की है और कहा है कि पंडित जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बाद नरेंद्र मोदी भारत के तीसरे सबसे ज्यादा सफल प्रधानमंत्री बनने के करीब हैं। दिल्ली के लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स इंडिया समिट-2017 में गुहा ने 66 वर्षीय नेता मोदी का करिश्मा और अपील जाति और भाषा की सीमा के परे है।

उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की पकड़ और अखिल भारतीय दृष्टिकोण उन्हें उसी पंक्ति में खड़ा करता है, जिसमें नेहरू और उनकी बेटी इंदिरा हैं। हम उस समय में जी रहे हैं जब मोदी भारतीय इतिहास में अपनी सफलता के लिए जगह बना रहे हैं। गुहा ने मोदी के बारे में कहा कि वे एकलौते ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिनके पास पूरे देश के लिए एक स्वस्थ दृष्टिकोण है।

मोदी से पहले देश में कोई ऐसा प्रधानमंत्री नहीं हुआ जिसकी देश में ऐसी पकड़, ऐसे अधिकार और ऐसा करिश्मा हो और जाति, भाषा और क्षेत्रीयता से परे अपील हो। देर से सही लेकिन इतिहासकार और वामपंथी विचारधारा से प्रभावित गुहा ने आखिर मोदी के करिश्माई व्यक्तित्व को स्वीकार किया। मोदी गुजरात की सत्ता से निकलकर जब से केंद्र में आए हैं, वे एक अखिल भारतीय सोच व सबका साथ सबका विकास मंत्र के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

उन्होंने अपनी पुरानी छवि से अलग एक भविष्य दृष्टा नेता की छवि बनाई है। वे देश में तेजी से सुधार कर रहे हैं। 1947 में आजादी के बाद देश को विरासत अंग्रेजी शासन व्यवस्था का ढांचा मिला था। उस समय सरकार को अपने देश की जरूरतों के मुताबिक शासन व्यवस्था में व्यापक सुधार करना चाहिए था। पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने जरूर नए भारत की नींव रखी।

इसका भारत को लाभ भी मिला कि देश कृषि से उद्योग की ओर अग्रसर हुआ। आजादी के साथ ही देश की नौकरशाही व कानून व्यवस्था में बदलाव की जरूरत थी, शिक्षा प्रणाली में परिवर्तन की जरूरत थी। इस कारण देश बहुत सारी प्रशासनिक, कानूनी और नीतिगत खामियों के साथ आगे बढ़ा। हालांकि नेहरू ने अखिल भारतीय सोच के साथ देश का नेतृत्व किया और जनता पर अमिट छाप छोड़ी।

इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री के रूप में लौह महिला के रूप में ख्याति पाई। 1971 में पाक से युद्ध में विजय ने इंदिरा की लोकप्रियता को शिखर पर पहुंचा दी। उनके करिश्माई नेतृत्व का भी कई सालों तक जादू चला। हालांकि इंदिरा ने भी देश में व्यवस्था परिवर्तन के लिए कुछ खास नहीं किया, लेकिन नरेंद्र मोदी ने जब से देश की सत्ता की कमान संभाली है, तबसे वे देश की शासन व्यवस्था में तेजी से बदलाव ला रहे हैं।

वे शासन तंत्र में व्याप्त खामियों को दूर कर रहे हैं, भ्रष्ट नौकरशाही पर नकेल कस रहे हैं, देश को डिजिटल ट्रैक पर लेकर आ रहे हैं ताकि शासन में व्याप्त जड़ता खत्म हो। वे ब्लैकमनी संस्कृति को खत्म कर रहे हैं, वे सब्सिडी के दुरुपयोग बंद कर रहे हैं। वे आर्थिक नीतियों में सुधार ला रहे हैं। वे वोट बैंक की राजनीति की परवाह किए बगैर विमुद्रीकरण जैसे राष्ट्रीय फैसले कर रहे हैं।

दरअसल, वे देश की कार्यसंस्कृति को बदल रहे हैं। इसी के साथ वे कूटनीतिक मोर्चे पर भी विश्व में भारत की पहचान मजबूत राष्ट्र के रूप में बना रहे हैं। मोदी के करिश्माई नेतृत्व का जादू देशवासियों के सिर चढ़कर बोल रहा है। हाल-फिलहाल उनके कद का कोई नेता देश में नहीं दिखाई दे रहा है, इसलिए रामचंद्र गुहा ने मोदी के नेतृत्व का जो आकलन किया है, वह कोई अतिश्योक्ति नहीं है। अगर वे सबको साथ लेकर साथ चलने की सोच के साथ काम करते रहे तो मोदी देश के सबसे सफलतम प्रधानमंत्री साबित हो सकते हैं।

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