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सतीश सिंह का लेख : बदल गई सिनेमा की दुनिया

तालाबंदी की वजह से फिल्म इंडस्ट्री भी पूरी तरह से बंद है। सिनेमाघरों के खुलने की संभावना अभी भी न्यून है। शूटिंग आंशिक रूप से शुरू हो गई है, लेकिन इसके परवान चढ़ने में लंबा समय लग सकता है। इसी वजह से डिजिटल माध्यम पर बेव-सीरिज और फिल्मों को रिलीज किया जाने लगा है। यह एक नया मंच है। इस नए मंच को ओवर द टॉप (ओटीटी) प्लेटफॉर्म कहा जाता है। इसके तहत इंटरनेट के माध्यम से वीडियो या अन्य मीडिया से संबंधित कंटेंट्स को प्रदर्शित किया जाता है।

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सतीश सिंह

छोटे-कस्बों से लेकर महानगरों में फिल्म रिलीज होने पर पहला शो देखने का चलन रहा है। कोरोना काल से पहले तक सिनेमाप्रेमी पहला शो देखने के लिए बेसब्री से फिल्म रिलीज होने का इंतजार करते थे। सिनेमा से होने वाली अरबों-खरबों की कमाई की वजह से सिनेमा निर्माण को इंडस्ट्री का दर्जा दिया गया है। हिट फिल्में 100 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई करती रही हैं, लेकिन कोरोना महामारी ने सिनेमा की दशा और दिशा दोनों को बदल दिया है। आज सिनेमा और बेव सीरिज ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म पर रिलीज की जा रही हैं।

तालाबंदी की वजह से फिल्म इंडस्ट्री भी पूरी तरह से बंद है। सिनेमाघरों के खुलने की संभावना अभी भी न्यून है। शूटिंग आंशिक रूप से शुरू हो गई है, लेकिन इसके परवान चढ़ने में लंबा समय लग सकता है। इसी वजह से डिजिटल माध्यम पर बेव-सीरिज और फिल्मों को रिलीज किया जाने लगा है। यह एक नया मंच है। इस नए मंच को ओवर द टॉप (ओटीटी) प्लेटफॉर्म कहा जाता है। इसके तहत इंटरनेट के माध्यम से वीडियो या अन्य मीडिया से संबंधित कंटेंट्स को प्रदर्शित किया जाता है। इसके लिए ग्राहक को ओटीटी प्लेटफॉर्म का सब्सक्रिप्शन लेना होता है। यह एक तरह का एप होता है, जिसमें टेलीविज़न कंटेंट, बेव-सीरिज एवं फिल्में दिखाई जाती हैं। ओटीटी प्लेटफॉर्म एप को मोबाइल या टेबलेट पर डाउनलोड किया जा सकता है। ओटीटी प्लेटफॉर्म सबसे पहले अमेरिका में लोकप्रिय हुआ था। फिर, विश्व के अन्य देशों में।

भारत में ओटीटी मनोरंजन के कार्यक्रम परोसने वाला सबसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म है। कोरोना काल में यह आपदा में अवसर की तरह उभर कर सामने आया है। वर्ष 2019 के अंत तक भारत में 150 मिलियन ओटीटी के उपभोक्ता थे, जिनमें से 50 प्रतिशत उपभोक्ता बड़े शहरों के थे।

कोरोना महामारी की वजह से इसके उपभोक्ताओं की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। जानकारों का कहना है कि आगामी एक-दो सालों में इसके बाजार का आकार दोगुना हो सकता है। हाल ही में अमिताभ बच्चन की फिल्म गुलाबो-सिताबो नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई। दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की फिल्में ड्राइव और दिल बेचारा भी इसी मंच पर रिलीज हुई। करण जौहर को भी गुंजन सक्सेना को अंतत: ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म पर रिलीज करना पड़ा। विद्या बालन अभिनीत बायोपिक फिल्म शकुंतला देवी अमेज़ॉन प्राइम वीडियो पर रिलीज़ हुई। इस प्लेटफ़ॉर्म पर उपभोक्ता जब चाहे अपना पसंदीदा कार्यक्रम या फिल्म इंटरनेट की मदद से देख सकता है। इस मंच पर उपलब्ध सामग्रियां ओरिजिनल एवं गुणवत्तापूर्ण होती हैं। कुछ प्लेटफॉर्म ऐसे हैं, जो खुद से फिल्म या बेव सीरीज या शार्ट स्टोरी बनाकर ओटीटी एप पर डालते हैं। मामले में अमेज़न प्राइम वीडियो एवं नेटफ्लिक्स अग्रणी ओटीटी प्लेटफॉर्म हैं। ओटीटी प्लेटफॉर्म के कंटेंट्स में विविधिता होती है। इस प्लेटफॉर्म पर देसी के साथ विदेशी सामग्री भी अपनी भाषा में देखा जा सकता है।

भारत में अमेजन प्राइम वीडियो, ऑल्टबालाजी, सोनीलिव, एमएक्स प्लेयर, वूट, नेटफिलिक्स, हॉट-स्टार, जी-5 आदि ओटीटी प्लेटफॉर्म उपलब्ध हैं। हॉटस्टार के 400 मिलियन से भी अधिक उपभोक्ता हैं। नेटफ्लिक्स वीडियो स्ट्रीमिंग की सबसे ज्यादा लोकप्रिय कंपनी है, जो भारत में वर्ष 2016 में आई थी। चर्चित कार्यक्रम सेक्रेड गेम्स की भारतीय सीरीज इसी प्लेटफॉर्म पर रिलीज की गई थी। ऑल्टबालाजी भारतीय ओटीटी प्लेटफॉर्म है। यह एकता कपूर के बालाजी टेलीफिल्म्स की एक घरेलू वीडियो स्ट्रीमिंग सर्विस है। सोनीलिव ने भारत में वर्ष 2013 में ओटीटी प्लेटफॉर्म शुरू किया था।

वर्ष 2019 के अंत तक 100 मिलियन से अधिक इसके एप को डाउनलोड किया जा चुका था।

ज़ी-5 ओटीटी प्लेटफॉर्म को वर्ष 2018 में भारत में शुरू किया गया था। इसके जरिये अनेक भाषाओं में विविध कार्यक्रमों को देखा जा सकता है। वूट ओटीटी प्लेटफॉर्म को भारत में वर्ष 2016 में शुरू किया गया था। इसके पास 45 हजार से भी अधिक घंटों के कंटेंट्स हैं, जिनमें कलर्स टीवी, एमटीवी, निकेलोडियन, वायाकॉम 18 मोशन पिक्चर्स और एमटीवी इंडीज शामिल हैं। एमएक्स प्लेयर फरवरी 2019 में भारत आया था। यह सबसे लोकप्रिय वीडियो स्ट्रीमिंग एप के रूप में जाना जाता है। इसने हाल ही में अपने वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर इन–एप गेमिंग फीचर को भी जोड़ा है।

बड़े बजट वाली फिल्म तभी सफल होती है, जब वह लागत से ज्यादा कमाई करके निर्माता को दे। जब फिल्में सिनेमाहॉल में रिलीज होती हैं तो एडवांस बुकिंग के जरिये भी मोटी कमाई की जाती है,लेकिन ओटीटी प्लेटफॉर्म पर बड़ी कमाई करना संभव नहीं है, इसलिए अगर कोरोना महामारी पर जल्दी काबू नहीं पाया जाता है तो बड़ी बजट वाली फिल्म बनाने से फिल्म निर्माता परहेज करेंगे।

मौजूदा परम्परा में अगर कोई फिल्म 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक कमाती है तो उसे सुपरहिट माना जाता है, लेकिन फिल्म के ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने पर उसकी सफलता या असफलता दर्शकों के देखने से तय होगी, जिसे व्यूअरशिप से मापा जाएगा। जितने अधिक लोग फिल्म देखेंगे, फिल्म उतनी ही सफल मानी जाएगी। मौजूदा हालात में बॉक्स ऑफिस में सफलता या असफलता का मानक खतरे में पड़ गया है।

कोरोना महामारी ने ओटीटी प्लेटफॉर्म के सफलता के रास्ते खोल दिये हैं। फिल्मों को सिनेमाघरों में देखने का अलग मजा था। आज सिनेमाघर बंद हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फिल्मों को घर में देखा जा रहा है। अमूमन, दर्शक परिवार के साथ सुविधानुसार मोबाइल, टीवी या स्मार्ट टीवी पर फिल्में एवं अन्य कार्यक्रम देख रहे हैं। मोमैजिक द्वारा अगस्त 2019 में किए गए एक सर्वे के अनुसार वर्तमान में लगभग 70 प्रतिशत लोग मोबाइल पर वीडियो कंटेंट्स देख रहे हैं। देश में 55 प्रतिशत उपभोक्ता टीवी शो, स्पोर्ट्स, फिल्में अलग-अलग ओटीटी प्लेटफॉर्म पर देख रहे हैं, जबकि 41 प्रतिशत उपभोक्ता विविध कंटेंट्स को देखने के लिए डीटीएच प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं,जिसमें डिश टीवी, टाटा स्काई आदि शामिल हैं।

तालाबंदी के दौर में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर फिल्में रिलीज होना सामान्य बात हो गई है। कोरोना काल में ओटीटी या ऑनलाइन स्ट्रीमिंग पर दर्शकों की तादाद काफी बढ़ी है। आज नेटफ्लिक्स, अमेज़न प्राइम, हॉटस्टार, जी-5, एमएक्स प्लेयर के अलावा एप्पल, डिज्नी, यूट्यूब, प्ले स्टेशन, गूगल प्ले, स्लिंग टीवी आदि बड़े खिलाड़ी इस मैदान में उतर चुके हैं। विज्ञापन के लिए भी कंपनियां अपना रुख ओटीटी प्लेटफॉर्म की तरफ कर रही हैं। अपने अस्तित्व को बचाने के लिए समय के अनुसार बदलना जरूरी भी है।

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