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शेयर बाजार में आए उछाल के निहितार्थ

केंद्रीय सत्ता में बदलाव के संकेत हैं, जिसे बाजार भी महसूस कर रहा है।

शेयर बाजार में आए उछाल के निहितार्थ
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नई दिल्‍ली. शेयर बाजार में जिस तरह की तेजी देखने को मिली है, उससे लग रहा हैकि एग्जिट पोल की ही तरह देश-विदेश के निवेशकों ने भी यह मान लिया हैकि केंद्र में नरेंद्र मोदी की अगुआई में सरकार बनने जा रही है। शायद यही वजह हैकि 30 शेयरों वाला मुंबई शेयर बाजार का सूचकांक पहली बार 24000 और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक निफ्टी 7000 के आंकड़े को पार कर गया। शेयर बाजार में तेजी का असर रुपये पर भी पड़ा है और इसे डॉलर के मुकाबले मजबूती मिली है। दरअसल, आम चुनावों के परिणामों के आने के समय बाजार में इस तरह की हलचल कोईनई बात नहीं है।

शेयर बाजार में इस तेजी से यह कहा जा सकता हैकि भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति निवेशकों में भरोसा लौट रहा है, परंतु बाजार में सिर्फ एक दिनी उछाल से यह नहीं कहा जा सकता कि अर्थव्यवस्था वाकई पटरी पर लौट आई है। एक दिन के चढ़ाव से आर्थिक सेहत पर फर्क नहीं पड़ता है, बल्कि उसमें निरंतरता होनी चाहिए। वहीं केवल शेयर बाजार में उछाल ही अर्थव्यवस्था की बेहतरी की सूचक नहीं होती, बल्कि उसको संबल देने के और भी बहुत कारक होते हैं। केंद्रीय सत्ता में बदलाव के संकेत हैं, जिसे बाजार भी महसूस कर रहा है।

यूपीए सरकार कानून तो बना रही थी, विदेशी निवेशकों के लिए रास्ता बनाने का भी प्रयास कर रही थी पर नीतिगत अपंगता की स्थिति रही यानी नीतियों के अमल में वह विफल रही। उसकी कमजोरी तब उभर कर सामने आई जब खुदरा व्यापार में विदेशी निवेश के मुद्दे पर ममता बनर्जी सर्मथन वापस ले लीं। अन्य घटक दलों ने भी ऐतराज जताया। मुलायम सिंह ने तो अपनी गिरफ्तारी तक दी, वाम दलों ने भी विरोध किया।

भाजपा तो हमेशा से इसके विरोध में रही है। अब देखने वाली बात यह होगी कि केंद्र में जो नई सरकार बनने वाली है वह उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस, कृषि सेक्टर, लघु व कुटीर उद्योगों और आयात-निर्यात में संतुलन के बीच कितना समायोजन बैठा पा रही है। वह अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने व उसमें निरंतरता बनाए रखने में कितना सफल हो पाती है। विनिर्माण क्षेत्र में कई साल से मंदी है, बैंकों के ऋण की ब्याज दरें आसमान छू रही हैं, मुद्रास्फीति काबू में नहीं आ रही है, बेरोजगारी का कोई हल दिखाई नहीं दे रहा है और रोजगार की संभावनाएं सिरे नहीं चढ़ पा रही हैं, फिर भी बाजार में जो एक विश्वास दिखाई दे रहा है, उत्साह के संकेत मिल रहे हैं तो उसकी वजह दरअसल, यह है कि नरेंद्र मोदी ने लगभग सभी क्षेत्रों को कुछ सुनहरे सपने दिखाए हैं।

सौ नए शहर बनाने, देश में तेज गति वाले बुलेट ट्रेन चलाने, यूनिवर्सिटी बनाने, हर प्रदेश में एम्स बनाने, कौशल विकास के लिए बड़े प्रयास करने और खुदरा व्यापार को छोड़ बाकी क्षेत्रों में विदेशी निवेशकों के लिए रास्ता आसान बनाने के संकेत दिए हैं। इससे आशा की किरण दिखाई दे रही है। जरूरत इस बात की है कि जो नई सरकार अगले हफ्ते कार्यभार संभालने जा रही है, वह उस दिशा में कुछ ठोस फैसले ले। उसके सामने सबसे पहली चुनौती बजट पेश करने की होगी, इससे ही संकेत मिलेगा कि उसने जो कहा है, उस दिशा में तेजी से बढ़ना चाहती है या नहीं।

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