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यात्रियों की सुरक्षा हो सर्वोच्च प्राथमिकता

आज जरूरी है इन हादसों के कारणों की पड़ताल की जाए और उनके समाधान की दिशा में गंभीरता से बढ़ा जाए।

यात्रियों की सुरक्षा हो सर्वोच्च प्राथमिकता
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नई दिल्‍ली. रेल में यात्रा कर रहे लाखों लोगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए जिससे यात्री सकुशल अपने गंतव्य स्थल तक पहुंच जाएं? यह सवाल बार-बार हो रहे ट्रेन हादसों के कारण हर किसी के मन कौंध रहा है। सुरक्षा के लिहाज से सबसे प्रतिष्ठित मानी जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस के साथ यदि ऐसा हादसा हो जाए तो यह प्रश्न और भी सोचने पर मजबूर करता है। मंगलवार रात को बिहार के छपरा जिले के पास गोल्डनगंज में राजधानी एक्सप्रेस हादसे का शिकार गई जिसमें पांच लोगों की मौत और कई घायल हो गए। यह दिल्ली से डिब्रूगढ़ जा रही थी।

माना जा रहा है कि ट्रेन के पटरी से उतरने के चलते इतना बड़ा हादसा हुआ। हालांकि हादसे के असली कारणों का पता जांच के बाद ही चल पाएगा, परंतु अभी से जिस तरह के कयास लगाए जा रहे हैं वह ठीक नहीं है। रेलवे के अधिकारी इसे साजिश अथवा नक्सलियों से जोड़कर देख रहे हैं। वहीं खुद राज्य सरकार और उसके अधिकारी इसे रेलवे के कर्मचारियों की लापरवाही मान रहे हैं। वहीं लालू यादव, नीतीश कुमार और मल्लिकार्जुन खड़गे मौजूदा केंद्र सरकार को घेरने में लगे हैं। ये तीनों पूर्व में रेल मंत्री रह चुके हैं। इस तरह विशेषज्ञों की राय का इंतजार किए बिना ही बयानबाजी शुरू होना ठीक नहीं है।

ये चीजें बंद होनी चाहिए। इस तरह की दुर्घटनाएं होती हैं तो फौरी तौर पर पीड़ितों को राहत दी जानी चाहिए। उसमें कोईकमी न आए इसका जायजा लिया जाना चाहिए। बहरहाल, एक दूसरे पर ठीकरा फोड़ने से अच्छा है कि जांच नतीजों का इंतजार किया जाए। जो लोग बयानबाजी कर रहे हैं उनमें से कौन है जिनके रेल मंत्री रहते हादसे नहीं हुए हैं। 2000 से लेकर के 2014 तक के आंकड़े ही एशिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क की खोखली परतें खोलने को काफी हैं। मुख्य समस्या यह है कि रेल मंत्रालय ने उन हादसों से कोई सबक नहीं सीखा है। ऐसा क्यों हुआ? इसकी जवाबदेही पूर्व रेल मंत्रियों की भी बनती है।

1981 के भीषण रेल हादसे को शायद ही कोई भूल सकता है। उस हादसे में 800 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। इस तरह के बड़े हादसे हर छह या सात महीने में हो रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। आज जरूरी है इन हादसों के कारणों की पड़ताल की जाए और उनके समाधान की दिशा में गंभीरता से बढ़ा जाए, जिससे आगे से ऐसे हादसे ना हों। यदि राजधानी एक्सप्रेस भी ऐसे हादसों का शिकार होने लगेगी तो लोगों का रेलवे पर से भरोसा उठ जाएगा। भारतीय रेल लाखों लोगों को रोज एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाती है। यह परिवहन का सबसे सस्ता और सुलभ साधन रहा है।

लिहाजा रेलवे में सुरक्षा की सवरेत्तम व्यवस्था होनी चाहिए। पटरियों का रख-रखाव और ट्रेन के अंदर बदमाशों का कहर या फिर ट्रेनों का एक दूसरे से टकराने की घटना पर अंकुश लगाने के लिए अतिरिक्त प्रयास और सावधानी बरतने की जरूरत है। हर किसी की जान कीमती होती है। बेवक्त और दूसरों की गलतियों या अपराधों के कारण जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिवारजनों को जिस सदमे का सामना करना पड़ता होगा उसकी हम सिर्फ कल्पना ही कर सकते हैं। लिहाजा रेल मंत्रालय को रेल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।

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