Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

संपादकीय : परीक्षा रद और स्थगित करने का फैसला सही

इस रिजल्ट का आधार क्या होगा, सीबीएसई इसे तय करेगा। अगर कोई छात्र बोर्ड की ओर से दिए गए मार्क्स से संतुष्ट नहीं होगा तो वो परीक्षा में शामिल हो सकता है, लेकिन ये परीक्षा तब होगी, जब इसके लिए देश में हालात सामान्य होंगे।

CBSE Board Exam 2021: पीएम मोदी कुछ ही देर में सीबीएसई और शिक्षा मंत्रालय से करेंगे बातचीत
X

हरिभूमि संपादकीय : केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने दसवीं की परीक्षा रद और बाहरवीं की टालकर बिल्कुल सही फैसला लिया है। जिस समय देश में प्रतिदिन कोरोना संक्रमितों की संख्या 1.85 लाख हो और एक हजार से ज्यादा लोग प्रतिदिन दम तोड़ रहे हों तो ऐसे में बच्चों को परीक्षा केंद्र तक भेजना खतरे से खाली नहीं है। यह बात बिल्कुल सही है कि बार-बार परीक्षाएं टालने और अगली क्लास में प्रमोट कर देने का सीधा बच्चों के भविष्य पर पड़ता है, वो किताबों से दूर होने लगते हैं, लेकिन इसका मतलब यह तो कतई नहीं कि परीक्षा के नाम पर भावी पीढ़ी को खतरे में डाल दिया जाए। ऐसे भी हो सकता है कि जब भी हालात ठीक हों, स्कूल स्तर पर शिक्षक बच्चों का मूल्यांकन करें या सीबीएसई क्लास एग्जाम के आधार पर उनकी ग्रेडिंग तय करें।

सीबीएसई की बोर्ड परीक्षाओं में 10वीं और 12वीं को मिलाकर करीब 35.81 लाख स्टूडेंट शामिल होने वाले थे। इनमें 12वीं के 14 लाख से अधिक और 10वीं के 21.50 लाख छात्र थे। दसवीं परीक्षा 4 मई से 14 जून तक होनी थीं। ये रद यानी कैंसिल कर दी गई हैं। इस साल इनकी परीक्षा नहीं होंगी। सभी स्टूडेंट्स अगली क्लास में प्रमोट किए जाएंगे, लेकिन रिजल्ट के साथ। इस रिजल्ट का आधार क्या होगा, सीबीएसई इसे तय करेगा। अगर कोई छात्र बोर्ड की ओर से दिए गए मार्क्स से संतुष्ट नहीं होगा तो वो परीक्षा में शामिल हो सकता है, लेकिन ये परीक्षा तब होगी, जब इसके लिए देश में हालात सामान्य होंगे। 4 मई से 14 जून तक चलने वाली 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं अभी टाली गई हैं। ये परीक्षा बाद में होंगी। बोर्ड एक जून को हालात की समीक्षा करेगा। तब फैसला किया जाएगा। अगर परीक्षा होती है तो कम से कम 15 दिन पहले छात्रों को इसके बारे में बताया जाएगा।

ये फैसले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की बुधवार दोपहर करीब घंटे भर चली बैठक में लिया गया। इससे पहले कई नेता और महाराष्ट्र, दिल्ली और झारखंड समेत कई राज्य सरकारें सीबीएसई की परीक्षाएं टालने की मांग कर चुके थे। पहले महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश की सरकारें अपने यहां होने वाली बोर्ड परीक्षाएं टाल चुकी हैं। ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन भी परीक्षा रद करने के लिए शिक्षा मंत्रालय को चिट्ठी लिख चुकी थी। हालांकि मांग यह भी थी कि 12वीं की परीक्षा भी न ली जाए, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में यह फैसला लिया गया कि फिलहाल 10+2 की परीक्षा को रद करने की बजाय स्थगित कर दिया जाए। असल में 12वीं के बाद ही बच्चे का भविष्य तय होता है। 12वीं की परीक्षा में आए अंकों के आधार पर ही यह तय किया जाता है कि बच्चा इंजीनियर, डॉक्टर, वकील, वैज्ञानिक या फिर कुछ और बनेगा। ऐसे में कोशिश तो यही रहनी चाहिए कि 12वीं की परीक्षा ली जाए। अगर हालात ठीक नहीं होते थे, दसवीं की ही तरह 12वीं के बच्चों को भी क्लास परीक्षा के आधार पर अंक जारी किए जा सकते हैं।

एक सुझाव यह भी था कि 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं ऑनलाइन ले ली जाएं, लेकिन यह संभव नहीं। भारत जैसे देश में जहां 46 फीसदी छात्रों ऑनलाइन परीक्षा के लिए उपकरण ही न हों, 32 फीसदी छात्र इंटरनेट की पहुंच से दूर हों, ऐसे में ऑनलाइन परीक्षा की बात बेमानी है। ऐसे में ऑलाइन परीक्षा संभव नहीं है। यह सही है कि दसवीं के बच्चों को अगली कक्षा में प्रमोट कर देने के कई खतरे भी हैं। 11वीं में सब्जेक्ट सिलेक्शन का आधार अभी तय नहीं हो पाएगा। टीचर्स के फेवरेटिज्म का खतरा भी रहेगा, लेकिन इन बातों के लिए बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करना सही नहीं कहा जा सकता।

Next Story