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हरिभूमि संपादकीय लेख: इसलिए तनाव बढ़ाने की कोशिशें कर रहा चीन

नौ मई को सिक्किम से सटे बॉर्डर पर नाकू ला पास के नजदीक भारत-चीन के करीब 150 सैनिकों में झड़प हो गई। अब 12 मई को लद्दाख में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प के दौरान चीनी सेना के हेलिकॉप्टर्स वास्तविक नियंत्रण रेखा के काफी करीब मंडराने लगे। यह हरकत देखकर भारतीय वायुसेना ने भी अपने लड़ाकू विमान उस तरफ भेज दिए। चीन की इन हरकतों के पीछे उसकी नियत को भली-भांति समझा जा सकता है।

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कोरोना महामारी के समय में भी चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा। उसने सीमा पर तनाव पैदा करने का खेल शुरू कर दिया है। पांच मई को पांगोंग झील के उत्तरी तट पर भारत और चीन के सैनिक भिड़ गए थे। हाथापाई के साथ-साथ पत्थरबाजी भी हुई। वहीं, नौ मई को सिक्किम से सटे बॉर्डर पर नाकू ला पास के नजदीक भारत-चीन के करीब 150 सैनिकों में झड़प हो गई। अब 12 मई को लद्दाख में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प के दौरान चीनी सेना के हेलिकॉप्टर्स वास्तविक नियंत्रण रेखा के काफी करीब मंडराने लगे। यह हरकत देखकर भारतीय वायुसेना ने भी अपने लड़ाकू विमान उस तरफ भेज दिए। चीन की इन हरकतों के पीछे उसकी नियत को भली-भांति समझा जा सकता है। इसका सबसे पहला कारण तो यही है कि कोरोना वायरस के कारण वो पूरी दुनिया में बदनाम हो चुका है।

अमेरिका, जर्मन, ब्रिटेन और जापान समेत कई देश उस पर कोरोना वायरस को पैदा करने का आरोप लगा रहे हैं। जापान तो वहां से अपनी कंपनियों को निकालने का भी ऐलान कर चुका है वहीं अमेरिका की कंपनी बज फोटोज ने चीन सरकार, चीनी सेना, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, वुहान इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर शी झेनग्ली के खिलाफ 20 ट्रिलियन डॉलर हर्जाने का मुकदमा ठोक दिया है। दावे में कहा गया है कि चीनी प्रशासन एक जैविक हथियार तैयार कर रहा था, जिसकी वजह से यह वायरस फैला है। इस कंपनी ने इतना हर्जाना मांगा है जितना चीन का कुल सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी भी नही है। जर्मनी से भी चीन को कोरोना से हुए नुकसान का 149 बिलियन यूरो का बिल भेजा है। इससे चीन परेशान है। वो दुनिया का ध्यान महामारी से हटाने के लिए भारत के साथ सीमा पर विवाद खड़ा करने की कोशिश में लगा है।

चीन के रवैये में अचानक आई इस आक्रमकता का एक और कारण भी है। भारतीय मौसम विभाग ने अपनी मौसम रिपोर्ट और अनुमान में पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद आदि कश्मीर के क्षेत्रों को भी शामिल कर लिया है और इन क्षेत्रों का भी मौसम बताना शुरू कर दिया है। इससे चीन को अपने प्रभाव कम होने का खतरा सताने लगा है। 1962 में भारत का जब चाइना से युद्ध हुआ तो चाइना ने लद्दाख के कुछ हिस्से पर कब्जा कर लिया, जिसे आज अक्साई चिन कहते हैं। फिर मार्च 1963 में पाकिस्तान ने पीओके के गिलगित-बाल्टिस्तान वाले हिस्से में से एक इलाका चाइना को गिफ्ट कर दिया। ये करीब 1,900 वर्ग मील से कुछ ज्यादा था। चीन इस क्षेत्र में एक कॉरिडोर बना चुका है जिसे वह ग्वादर पोर्ट से जुड़ रहा है। इसे चाइना-पाकिस्तान इकॉनोमिक कॉरिडोर कहा जाता है।

इससे सिर्फ चाइना को ही फायदा होगा। बीते दिनों घाटी में पाक प्रायोजित आतंकवाद से लोहा लेते हुए हंदवाड़ा में राष्ट्रीय राइफल कर्नल आशुतोष शर्मा और मेजर अनुज सूद समेत सेना के दो जवान और जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक सब इंस्पेक्टर शहीद हो गए तो पाकिस्तान ने भारतीय सीमा से सटे अपने इलाके की गश्ती में एफ-16 और जेएफ-17 सैन्य विमानों को लगा। उसे डर सता रहा है कि भारत इन वीरों की शहादत का बदला जरूर लेगा और किसी भी समय वो सीमा पार करके एयर स्ट्राइक या सर्जिकल स्ट्राइल कर सकता है। इसी को देखकर चीनी सैनिक सीमा पर इस तरह की हरकतों को अंजाम दे रहे हैं। यह सही है कि भारत-चीन सीमा पर पिछले 20 सालों से कोई गोली नहीं चली है, लेकिन सच यह भी है कि यह सब भारतीय सेना के धैर्य के चलते ही संभव हो पाया है। वरना कभी अरुणाचल प्रदेश तो कभी डोकलाम में चीन ने तनाव पैदा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। अब वो जो कर रहा है, इसके पीछे भी उसकी कोशिश भारत को उकसाने की हैं।

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