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आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम की जरूरत

पंजाब के गुरदासपुर जिले में आतंकी हमला चिंताजनक है।

आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम की जरूरत
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पंजाब के गुरदासपुर जिले में आतंकी हमला चिंताजनक है। अभी देश में पंद्रह अगस्त नजदीक होने के कारण ऐसे हमलों की आशंका बनी रहती है, खुफिया एजेंसियों ने एलर्ट भी जारी किए थे जिसमें कहा गया था कि आतंकी कोई बड़ा हमला कर सकते हैं। यह भी कहा जा रहा है कि अभी दो सौ से ज्यादा आतंकी पाकिस्तान से भारत में घुसपैठ करने की फिराक में हैं। ऐसे में देश की सीमाओं पर और अंदर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है।
हालांकि किसी आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन ऐसा कहा जा रहा है कि ये लश्कर-ए-तैयबा के हो सकते हैं, क्योंकि हाल ही में पाकिस्तान के नरोवाल से उसके करीब दो दर्जन आतंकियों की भारत में घुसपैठ की खुफिया रिपोर्ट आई थी। पहले वे जम्मू-कश्मीर को निशाना बनाना चाहते थे, लेकिन कड़ी सुरक्षा के कारण उधर नहीं जा पाए। लिहाजा उन्होंने पंजाब को हमले के लिए चुन लिया। पंजाब कभी आतंकवाद का शिकार रहा था, तब सरकार के सख्त प्रयासों से वहां की धरती को उससे मुक्त करा लिया गया, ऐसे में अब आतंकवादियों द्वारा एक आसान टारगेट के रूप में उसका चुनाव खतरनाक हो सकता है, जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
वैसे भी इन दिनों पंजाब के हालात ठीक नहीं हैं। वहां कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं। खासकर ड्रग्स, तस्करी और भ्रष्टाचार की ढेरों घटनाएं सामने आती रही हैं। नशाखोरी पंजाब में कितनी बड़ी समस्या बन गई है, इसको बताने की जरूरत नहीं है। वहां के एक तिहाई से ज्यादा युवा इसकी गिरफ्त में हैं। कहा जाता है कि नशा का कारोबार पकिस्तान से अवैध रूप में होता है। आतंकवाद को फैलाने में ये स्थितियां मुफीद मानी जाती हैं। ऐसे में इस पर ध्यान देने की जरूरत है कि कहीं पंजाब में आतंकवाद फिर न फैल जाए। मुख्यमंत्री के रूप में प्रकाश सिंह बादल का पंजाब में दूसरा कार्यकाल है।
इन सब कारणों से उनकी पार्टी की लोकप्रियता कम हुई है। राज्य में अकाली जब जब कमजोर होते हैं तो देखा जाता है कि वे धर्म की आड़ लेने लगते हैं। ऐसे में केंद्र सरकार को इन विषयों पर भी नजर रखनी चाहिए। भारत में होने वाले हमलों में अकसर पाकिस्तान का ही हाथ होता है। गुरदासपुर पाकिस्तान की सीमा से मात्र पंद्रह किलोमीटर की दूरी पर है। इन आतंकियों के तार भी उससे जुड़े होने के संकेत मिल रहे हैं। देखा जाता है कि भारत-पाकिस्तान के बीच जब-जब बातचीत की प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश की जाती है तब-तब वहां के आतंकवादियों और सेना की ओर से कुछ ऐसा होता है जिससे दोनों देशों के रिश्तों में तल्खी छा जाती है।
गत दिनों रूस के उफा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बीच वार्ता हुई थी जिसमें संबंध सुधारने की प्रक्रिया फिर से आरंभ करने पर जोर दिया गया था। इस हमले को भी उसी से जोड़कर देखा जा सकता है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई, सेना और कट्टरपंथी जमात नहीं चाहते कि भारत से रिश्ता सुधरे, लिहाजा वे कभी तल्ख बयान देते हैं, कभी संघर्ष विराम का उल्लंघन करते हैं, तो कभी इस तरह के हमलों को अजाम देते हैं।
उनका मकसद होता है कि भारत आक्रोश में आकर वार्ता से हाथ खींच ले, जिससे पाकिस्तान में उनकी प्रासंगिकता बनी रहे। भारत को ऐसे हमलों से बचना है तो अपनी सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करनी होगी और आतंकवाद के खिलाफ सख्ती बरतनी होगी, जिससे आगे से कोई आतंकी देश के अंदर आकर तबाही न मचा सके।

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