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चिंतन: देश की बड़ी समस्या कर चोरी का निदान जरूरी

देश में काला धन एक गंभीर समस्या है।

चिंतन: देश की बड़ी समस्या कर चोरी का निदान जरूरी
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नई दिल्ली. आपातकाल निश्चित ही भारत के लोकतंत्रिक इतिहास का ‘अंधकार युग’ था, जिसमें 21 महीने तक जनता के सभी संवैधानिक अधिकार रद थे। देश में इमज्रेंसी लगने की 41वीं बरसी के ठीक एक दिन बाद अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'आपातकाल' की दुखद यादों का जिक्र कर कांग्रेस की स्याह अतीत को ही कुरेदा है। भारतीय राजनीति में कांग्रेस के इतिहास में इमज्रेंसी ‘काला अध्याय’ की तरह है, जिसे वह कभी मिटा नहीं सकती है। देश 25 जून 1975 का वह दिन कैसे भूल सकता है, जब पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने देश पर आपातकाल थोप कर लोकतंत्र को हाइजैक कर लिया था। इसलिए पीएम का कहना कि आपातकाल की बरसी लोकतंत्र पर हमारे यकीन को और मजबूत करती है, संकेत देता है कि भारत में लोकतंत्र का भविष्य उज्ज्वल है। पीएम ने लोकतंत्र का मतलब सिर्फ वोट देना नहीं, बल्कि इसमें जनभागीदारी भी जरूरी है, कहकर डेमोक्रेसी के व्यापक फलक को ही रेखांकित किया है।
21वीं कड़ी का प्रसारण
जनता से संवाद बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ बेहद उपयोगी साबित हुआ है। उनकी यह अपनी स्टाइल बन गई है। इसकी आलोचना भी हुई है, लेकिन इसकी 21वीं कड़ी का प्रसारण होना ही इसकी लोकप्रियता को दर्शाता है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा इसकी तारीफ कर चुके हैं और अपने अमेरिकी आवाम को रेडियो पर संबोधित कर चुके हैं। प्रधानमंत्री ने जब से जनता से मन की बात कहना शुरू किया है, तब से वे कई अहम मसलों पर अपने विचार रख चुके हैं। जल संरक्षण, स्वच्छ भारत अभियान, कौशल विकास, विकलांग बच्चों के लिए छात्रवृत्ति, शिक्षण संस्थानों के लिए बुनियादी ढांचे, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, किसानों की समस्याओं, जनधन की सफलता, एलपीजी सब्सिडी के स्वैच्छिक त्याग के लिए अपील सहित कई मुद्दों पर पीएम ने मन की बात की है।
ब्लैकमनी गंभीर समस्या
इस बार भी उन्होंने देश को परेशान करने वाले मसले ब्लैकमनी व कर चोरी को लेकर गंभीर अपील की। उन्होंने कहा कि देशवासी इस साल के 30 सितंबर तक अपनी अघोषित आय का खुलासा कर दें, नहीं तो संभावित दिक्कतों का सामना करने के लिए तैयार रहें। प्रधानमंत्री के रूप में यह अपील कालाधन के प्रति सरकार की गंभीरता जाहिर करती है और इसके गुनहगारों को सजा भुगतने का संकेत भी देती है। देश में ब्लैकमनी गंभीर समस्या है, इस सरकार ने शपथ लेते ही कालाधन का पता लगाने के लिए एक एसआइटी गठित की थी, हालांकि अभी तक सरकार को इस मोर्चे पर अपेक्षित सफलता नहीं मिली है।
पीएम ने जताई उम्मीद
कांग्रेस की लुंजपुंज शासन व्यवस्था के चलते भारत में कर चोरी भी ‘नेशनल कल्चर’ साबित हुई है। हम कमाने से पहले ही कर छिपाने के तरीके ईजाद करने लगते हैं। यही कारण है आज सवा अरब की आबादी में चंद लाख लोग टैक्स चुकाते हैं, वो भी सरकारी सख्ती के चलते ‘बेमन’ से। पीएम ने उम्मीद जताई है कि देश में कर संस्कृति विकसित हो रही है, जिससे अब अधिक से अधिक लोग टैक्स नेट में आ रहे हैं। यह भी सही है कि देश में जितनी तेजी से टैक्स रिफॉर्म होगा, करदाता भी उतनी तेजी से बढ़ेंगे। लेकिन डीटीसी बिल के ठंडे बस्ते में जाने से प्रत्यक्ष कर सुधार का सरकार का एजेंडा लंबित हो सकता है या खटाई में पड़ सकता है। उम्मीद की जानी चाहिए कि मोदी सरकार देश के लिए नासूर बन चुकी टैक्स चोरी की समस्या का निदान कर पाएगी।
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