Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

तरुण तेजपाल पर लगे आरोप बेहद गंभीर

मीडिया में ऊंचे पदों पर बैठे लोगों से देश और समाज उम्मीद करता है कि वे बुराइयों से पार पाने का रास्ता दिखाएंगे, परंतु जब वे ही इनमें लिप्त पाए जाएंगे और घृणित आचरण का उदाहरण बनेंगे तो व्यवस्था परिवर्तन की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

तरुण तेजपाल पर लगे आरोप बेहद गंभीर
X

मीडिया में ऊंचे पदों पर बैठे लोगों से देश और समाज उम्मीद करता है कि वे बुराइयों से पार पाने का रास्ता दिखाएंगे, परंतु जब वे ही इनमें लिप्त पाए जाएंगे और घृणित आचरण का उदाहरण बनेंगे तो व्यवस्था परिवर्तन की उम्मीद कैसे की जा सकती है। इस दृष्टि से देखें तो पत्रिका तहलका के संस्थापक और संपादक तरुण तेजपाल पर उनके संस्थान की एक महिला पत्रकार के यौन उत्पीड़न का आरोप बेहद गंभीर है। तरुण तहलका के जरिए जिन सवालों को उठाते रहे हैं, व्यवस्था में शुचिता तथा पारदर्शिता की बात करते रहे हैं और हर विभाग के जो विद्रूप हैं उनको सामने लाने के लिए मुहिम छेड़े रहे हैं। उनकी यह हरकत शर्मनाक होने के साथ-साथ दोहरे चरित्र की एक बानगी पेश कर रही है। वे ईमानदार और चरित्रवान बनने के लिए वर्षों से दूसरों को तो नसीहत देते रहे, परंतु खुद उसकी नजीर नहीं बन सके। तहलका के गोवा में होने वाले सालाना इवेंट थिंक फेस्ट के दौरान तरुण ने इस महिला पत्रकार, जो खुद उनकी बेटी की भी दोस्त है, का दो बार यौन शोषण किया और फिर जब इस पत्रकार ने तहलका की मैनेजिंग एडिटर शोमा चौधरी को मेल लिख पूरे वाकये की जानकारी दी, तो तरुण ने चिट्ठी लिख कहा कि मैंने इस पूरे प्रकरण पर बिना शर्त उस पत्रकार से माफी मांग ली है। मगर ये काफी नहीं है। इसलिए वे छह महीने के लिए पत्रिका के दायित्वों से खुद को पूरी तरह अलग करते हैं। इस दौरान तहलका की ओर से इसे आंतरिक मामला बताया जाता रहा और कहा गया कि पीड़िता अभी तक की कार्रवाई से संतुष्ट है। परंतु एक न्यूज चैनल के हवाले से यह बात सामने आई कि पीड़िता पूरे मामले पर पत्रिका की प्रतिक्रिया से निराश है, क्योंकि उसके बयान को सार्वजनिक नहीं किया गया है, केवल तरुण तेजपाल के माफीनामे को ही सार्वजनिक किया गया है। शोभा चौधरी इस मामले पर कार्रवाई करने के लिए और वक्त की मांग कर रही हैं, जबकि यह मामला एक दिन का नहीं बल्कि पुराना है। ऐसे में कहीं न कहीं इसे दबाने का भी प्रयास किया जा रहा है। यहां यह भी सवाल खड़ा होता है कि क्या तरुण तेजपाल के स्वीकार कर लेने भर से की उनसे गलती हुई है या छह महीने तक पद से हट जाने से उन पर लगे दाग धुल जाएंगे? और अपनी सजा खुद ही तय कर लेने से क्या मामले की गंभीरता खत्म हो जाती है? वैसे भी यह एक आपराधिक मामला है। ऐसे मामलों के लिए देश में सख्त कानून बनाए गए हैं। जो कानूनी प्रक्रिया पूरे देश के लोगों पर लागू है, वही तरुण तेजपाल पर भी लागू होनी चाहिए। पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी और न्याय व्यवस्था से जुड़े लोगों ने कहा है कि पीड़िता शिकायत दर्ज नहीं भी कराती है तो भी गोवा पुलिस को स्वत: संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज कर कार्रवाई करनी चाहिए। हालांकि गोवा सरकार ने मामले की प्राथमिक जांच के आदेश दिए हैं, परंतु पुलिस का कहना है कि जब तक शिकायत दर्ज नहीं होगी, तब तक इसमें वह बहुत आगे तक नहीं जा सकती है। ऐसे में क्या पीड़िता केवल संस्थान के स्तर पर ही मामले को रखना चाहेगी है या आगे बढ़कर इसे अंतिम परिणति तक पहुंचाने के लिए विधि सम्मत कानून का दरवाजा भी खटखटाएगी?

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story
Top