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क्या तेजपाल का अपने बचाव में दूसरों पर कीचड़ उछालना उचित है?

पत्रिका तहलका के संपादक तरुण तेजपाल पर साथी महिला पत्रकार के यौन शोषण का मामला सामने आने के बाद मीडिया जगत ही नहीं बल्कि पूरा देश शर्मसार है।

क्या तेजपाल का अपने बचाव में दूसरों पर कीचड़ उछालना उचित है?

पत्रिका तहलका के संपादक तरुण तेजपाल पर साथी महिला पत्रकार के यौन शोषण का मामला सामने आने के बाद मीडिया जगत ही नहीं बल्कि पूरा देश शर्मसार है। हालांकि इसके बाद से लगा था कि जो संस्थान, बल्कि इंसान भी, लंबे अरसे से समाज व व्यवस्था में शुचिता, ईमानदारी व नैतिकता की बात करता रहा है, वह खुद पर लगे आरोपों के प्रति भी उतनी ही ईमानदारी और सहजता से पेश आएगा, जितना कि वह दूसरों से अपेक्षा करता है, परंतु अब इस मामले को लेकर उसके और तहलका प्रबंधन की ओर से जिस तरह के बयान आ रहे हैं वे और भी शर्मसार करने वाले हैं। इससे एक तरफ देश स्तब्ध है, तो दूसरी ओर तहलका से जुड़े पत्रकार भी बचाव के इस धृणित तौर-तरीकों से क्षुब्ध हैं। अब तक छह पत्रकार तहलका छोड़ चुके हैं।

तहलका के प्रबंध संपादक शोमा चौधरी पर मामले को दबाने के गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़िता का पत्र सामने आने के बाद और गोवा पुलिस के शुरुआती जांच के नतीजे बताते हैं कि मामला बेहद गंभीर है, परंतु जिस तरह से इसे हल्के में लिया जा रहा है और अब पीड़िता पर झूठी होने के आरोप लगाए जा रहे हैं व उसके चरित्रहनन के प्रयास हो रहे हैं, वह अपने आप में खतरनाक है। यह मामला वाकई में इतना हल्का था, तो तरुण तेजपाल ने बिना शर्त माफी क्यों मांगी? छह महीने तक संपादक का पद छोड़ प्रायश्चित करने की बात क्यों कही? मामला गंभीर था तभी यह सब किया गया, लेकिन वे अब पूरी तरह से यू-टर्न लेने के फिराक में हैं, जो और भी गलत बात है। दरअसल, इस प्रकरण के बाद तरुण तेजपाल का असली चेहरा देश के सामने आ गया है। दोहरे चरित्र के साथ इंसान ज्यादा दिनों तक बेहतर बनने का ढोंग नहीं कर सकता। किसी न किसी मोड़ पर असलियत सामने आ ही जाती है। वे अपने बचाव में चाहे जो भी दलीलें दें, सच तो यह है कि कानून के शिकंजे से नहीं बच सकते। अब ऊपर से भारतीय जनता पार्टी पर यह आरोप लगा रहे हैं कि वह उन्हें फंसाने की कोशिश कर रही है। देखा जाए तो इस मामले से जुड़े सभी साक्ष्य, पीड़िता का बयान, तरुण का माफीनामा और सीसीटीवी फुटेज सब कुछ ये बताने के लिए काफी हैं कि इस आदमी ने कितनी घिनौनी हरकत ही है।

इस बारे में मशहूर लेखिका और ऐक्टिविस्ट अरुंधती रॉय ने कहा है कि तरुण की ओर से जिस तरह से महिला पत्रकार के चरित्रहनन और यह साबित करने की कोशिश हो रही है कि उनको फंसाया जा रहा है, यह उन मूल्यों का बलात्कार है जिससे जुड़े रहने का दावा तहलका करती रही है। तरुण तेजपाल की ओर से इसे राजनीतिक रंग देना और कानूनी शिकंजे से खुद को बचाने की उनकी कोशिश करना दर्शाता है कि उन्हें अपने आगे के दिन साफ-साफ दिख रहे हैं। यही वजह है जिससे वे दिल्ली हाईकोर्ट से अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत देने की गुहार लगा रहे हैं। निश्चित रूप से कानून को निष्पक्ष होकर अपना काम करना चाहिए और जितनी जल्दी हो तरुण तेजपाल को गिरफ्तार करना चाहिए, ताकि ऐसे लोगों के बीच एक कड़ा संदेश जाए जो महिलाओं के सम्मान का दिखावा व पाखंड करते हैं, जो न तो कानून के प्रति और न ही महिलाओं के प्रति सम्मानजनक दृष्टिकोण रखते हैं।

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