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कश्मीर में शांति बहाली के लिए वार्ता ही रास्ता

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने अपनी दो दिन की श्रीनगर यात्रा के दौरान टटोली संभावनाएं

कश्मीर में शांति बहाली के लिए वार्ता ही रास्ता
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देर से ही सही, लेकिन कश्मीर में अमन-चैन बहाल करने की राजनीतिक कोशिश शुरू हुई है। इसे सकारात्मक रूप में लिया जाना चाहिए। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने अपने दो दिनों की र्शीनगर यात्रा के दौरान उन सभी संभावनाओं को टटोला है, जिससे कि घाटी में शांति बहाल हो सके। उन्होंने विभिन्न तबकों से ताल्लुक रखने वाले 300 से अधिक स्थानीय लोगों से मिलकर यह जानने की कोशिश की है कि आखिर वे चाहते क्या हैं, उनके मन में क्या है? राजनाथ ने सभी दलों से वार्ता की अपील भी की है।
साथ ही उन्होंने कश्मीर में उपद्रवियों की पहचान करने की बात भी कही है। जल्द ही सर्वदलीय बैठक की उम्मीद की जानी चाहिए। ऐसी बैठक होनी भी चाहिए। केंद्र सरकार की ओर से यह अच्छा प्रयास माना जा सकता है। हालांकि केंद्र की पहल पूर्व सीएम उमर अब्दुला के नेतृत्व में विपक्षी दलों के प्रतिनिधिमंडल की राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से कश्मीर में राजनीतिक समाधान ढूंढ़ने की मांग के साथ मुलाकात के बाद हुई है। जबकि महबूबा सरकार काफी समय से केंद्र से ऐसी पहल की गुहार लगा रही थी। इस बार अच्छी बात यह दिख रही है कि वैचारिक मतभेद के बावजूद जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की पाडीपी सरकार भी कश्मीर में शांति बहाली के लिए केंद्र की भाजपा सरकार के साथ कंधे से कंधे मिलाकर चल रही है।
अलगाववादियों के प्रति नरम रुख रखने वाली पीडीपी की मुखिया व सीएम महबूबा ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह के साथ जिस तरह उपद्रवियों को सख्त संदेश दिया है, उससे राजनीतिक एकता का संकेत मिलता है। महबूबा का साफ कहना कि जिन्हें पैलेट लगी है, वो दूध या टॉफी लेने नहीं गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि 95 फीसदी कश्मीरी आवाम शांति वार्ता से समस्या का समाधान चाहते हैं, केवल पांच फीसदी लोग प्रक्रिया को बाधित कर रहे हैं। सीएम ने यह कह कर कि कश्मीर को जहन्नूाम नहीं बनने देंगे, केंद्र सरकार के स्टैंड को मजबूत किया है। केंद्र सरकार लगातार कश्मीर में शांति बहाली की कोशिश में जुटी हुई है। केंद्र ने कश्मीर में सीमा पार आतंकवाद का हमेशा विरोध किया है। सुरक्षा बलों की तैनाती भी आतंकवाद पर काबू पाने की ही कोशिश है।
सभी जानते हैं कि घाटी में उपद्रव के पीछे पाकिस्तान का हाथ है। पाकिस्तान लगातार अलगाववादियों को खाद-पानी देता रहा है। यहां तक कि पाक की खुफिया एजेंसी आईएसआई भारत के खिलाफ आतंकवाद को फंडिंग करता है और आतंकियों को प्रशिक्षण भी मुहैया कराता है। कश्मीर में आतंकियों से पाक निर्मित हथियार और गोला बारूद बरामद होते रहे हैं। हाल में राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सबूत भी मिले हैं कि कश्मीर में हिज्बुल आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद उपद्रव व हिंसा भड़काने के लिए पाक फंडिंग कर रहा है। वर्तमान उपद्रव के दौरान कश्मीरियों के खातों में आठ से नौ करोड़ रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन का पता एनआईए को लगा है। ये ऐसे लोगों के खाते हैं, जिनकी हैसियत इतनी रकम रखने की नहीं है।
एजेंसी इसकी जांच कर रही है। इसलिए जरूरी है कि केंद्र और कश्मीर की सरकारें मिलकर घाटी में शांति बहाली करें और पाकिस्तान के प्रति कठोर रुख अख्तियार करें। कश्मीरी आवाम को भी किसी बहकावे में नहीं आना चाहिए। उन्हें समझना चाहिए कि पथराव तथा सुरक्षा शिविरों पर हमला कर कोई समाधान हासिल नहीं किया जा सकता। महबूबा ने भी यही कहा है। शांति व वार्ता से ही सभी मसले हल हो सकते हैं। उन्हें पाकिस्तान के कुत्सित मंसूबों को पहचानना चाहिए कि वह कभी भी कश्मीर में अमन नहीं चाहता है। कश्मीरियत, जम्हूरियत और इंसानियत की रक्षा के लिए जरूरी है कि सभी वार्ता करें, समाधान निकालें। हिंसा और उपद्रव की राह अपना कर कुछ भी हासिल नहीं होने वाला है।
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