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कहानियों का संपन्न संसार

अमन प्रकाशन ने स्वयं प्रकाश की चुनी हुई कहानियों का एक चयन प्रकाशित किया है,

कहानियों का संपन्न संसार

-पल्लव-

कथाकार स्वयं प्रकाश स्वातंत्र्योत्तर हिंदी कहानी के बड़े हस्ताक्षर हैं। अपनी सहज शैली और कथ्य की जनवादिता के कारण उनकी कहानियां हिंदी के पाठकों और आलोचकों का दिल जीत सकीं। यह हिंदी प्रकाशन की विफलता है कि बड़े कथाकारों के पुराने संग्रह भी एक संस्करण के बाद अनुपलब्ध हो जाते हैं, तब उनकी कहानियां खोजना-पढ़ना वाकई शोध जैसा हो जाता है।

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युवा कथाकार राजीव कुमार के संपादन में अभी अमन प्रकाशन ने स्वयं प्रकाश की चुनी हुई कहानियों का एक चयन प्रकाशित किया है, जिसमें उनकी नई-पुरानी चौदह कहानियां सम्मिलित हैं।

अच्छी बात यह है कि इस चयन में स्वयं प्रकाश के शुरुआती दौर की कुछ यादगार कहानियां भी हैं। जैसे- ‘प्रभाव, अयाचित, संहारकर्ता’ और ‘नीलकांत का सफर।’ इनके साथ, बाद के दौर की कुछ और चर्चित-प्रशंसित कहानियां यथा ‘नैंसी का धूड़ा, आदमीजात का आदमी, क्या तुमने कभी कोई सरदार भिखारी देखा?, अगले जनम, गौरी का गुस्सा, बाबूलाल तेली की नाक और प्रतीक्षा’ यहां पढ़ी जा सकती हैं।
राजीव कुमार ने भूमिका में लिखा है, ‘कहीं भी वे डिक्शन के मोह में नहीं पड़ते, लेकिन प्रतिगामी शक्तियों पर कटाक्ष एव मध्यवर्गीय लोलुपता पर व्यंग्य की मौजूदगी लगातार उनकी कहानियों में है।’ इस संकलन को पढ़Þना हिंदी कहानी के उस संघर्ष को जानना है, जब कहानी फैशन और अतिक्रांतिकारिता से बाहर आकर जनपक्षधर हो रही थी और स्वयं प्रकाश, कहानी के उस समय के अगुआ थे।
पुस्तक- स्वयं प्रकाश :चुनी हुई कहानियां
संपादन- राजीव कुमार
मूल्य- 250 रुपए
प्रकाशक- अमन प्रकाशन, कानपुर
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