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सर्जिकल स्ट्राइक ऑपरेशन और भारतीय सेना का पराक्रम

पठानकोट एयरफोर्स बेस के बाद उरी सैन्य कैंप पर आतंकी हमले का बदला लिया जाना जरूरी था। 2016 में उरी आतंकी हमले में हमारे 18 जवान शहीद हुए थे।

सर्जिकल स्ट्राइक ऑपरेशन और भारतीय सेना का पराक्रम

पाकिस्तान में आतंकियों के खिलाफ की गई सर्जिकल स्ट्राइक की दूसरी सालगिरह पर राष्ट्र अपने सैनिकों के शौर्य को याद कर रहा है। भारतीय सेना का सफल सर्जिकल स्ट्राइक ऑपरेशन समूचे देशवासियों के लिए गर्व का क्षण था। पठानकोट एयरफोर्स बेस के बाद उरी सैन्य कैंप पर आतंकी हमले का बदला लिया जाना जरूरी था। 2016 में उरी आतंकी हमले में हमारे 18 जवान शहीद हुए थे।

इस हमले को पाक स्थित आतंकी गुटों ने अंजाम दिया था। जिसके बाद देशभर में पाक के खिलाफ आक्रोश था और सैनिक भी पाक आतंकी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करना चाहते थे। उस वक्त के सेना प्रमुख जनरल दलबीर सुहाग और नादर्न कमांड के प्रमुख रहे लेफ्टिनेंट जनरल दीपेंद्र सिंह हुड्डा समेत शीर्ष सैन्य नेतृत्व ने पाक में घुसकर आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक करने का फैसला किया था।

सेना के इस फैसले में सरकार उसके साथ थी। 2016 में 28-29 सितंबर की रात को अंजाम दिया गया यह ऑपरेशन सैनिकों के मनोबल को ऊंचा करने के लिए किया गया था। इसमें हमारे वीर जवानों का बाल भी बांका नहीं हुआ था। इसका मकसद दुश्मन को उसके घर में घुस कर सबक सिखाना था।

इस सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भारतीय सैन्य ताकत का विश्व भर में डंका बजा और कुछ दिनों बाद हमारी सेना ने म्यांमा सीमा पर भी इसी प्रकार का सफल ऑपरेशन उग्रवादियों के ठिकानों पर किया।

सरकार देश के बहादुर सैनिकों के साहस और पराक्रम की वीरगाथा सुनाने और उसकी रोमांचित करने वाली सुखद अनुभूति का एहसास आवाम को कराने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक की दूसरी वर्षगांठ को तीन दिन तक ‘पराक्रम पर्व' के तौर पर मना रही है।

इससे निश्चित ही देशवासियों में सेना का सम्मान और बढ़ेगा। लेकिन सर्जिकल स्ट्राइक की सलिगरह मनाने के पीछे किसी प्रकार की राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। जब यह किया गया था, तब विपक्ष ने सवाल उठाए थे और सबूत मांगे थे, तो सत्ता पक्ष के लोगों ने अपनी पीठ थपथपाई थी।

जो कि दुर्भाग्यपूर्ण था। कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम व संजय निरूपम ने सर्जिकल स्ट्राइक पर मोदी सरकार व भाजपा के दावे पर सवाल उठाए थे, तो दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सबूत मांगे थे। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राजग सरकार पर खून की दलाली करने का आरोप लगाया था। इधर, मोदी सरकार व भाजपा सर्जिकल स्ट्राइक को अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश करती रहीं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह तक अलग-अलग मंच पर इस पर बोलते रहे हैं। जबकि रक्षा व सैन्य हलकों को गुप्त ऑपरेशनों का प्रचार-प्रसार करना पसंद नहीं होता है। इससे पहले भी सात-आठ बार सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक जैसे गुप्त ऑपरेशन किए हैं और उसे गुप्त ही रखा है।

सेना का मानना है कि सीक्रेट मिलिटरी ऑपरेशनों का सार्वजनिक प्रचार नहीं किया जाना चाहिए। सरकार को सेना की इस भावना का ख्याल रहना चाहिए।

पिछले साल पहली सालगिरह पर पराक्रम पर्व नहीं मनाया गया था, इसलिए 2019 के आम चुनाव से कुछ पहले जब पराक्रम पर्व मनाया जा रहा है, तो इसे राजनीतिक चश्मे से देखा जाना लाजिमी है।

हालांकि सरकार को अपनी किसी भी सैन्य उपलब्धि को सेलिब्रेट करने का पूरा हक है, इसलिए विपक्ष को इस पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। देशवासियों को अपने सैनिकों के मनोबल को ऊंचा रखने के लिए उसके पराक्रम को याद करते रहना जरूरी है।

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