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सुनील छेत्री ने भारतीय फुटबॉल को दिया नया मुकाम, याद दिलाया 1960 का स्वर्णिम काल

पहली बार फुटबॉल को देश में ब्रिटिश उपनिवेश काल के समय अग्रेंजों द्वारा लाया गया। ये वो दौर था जब भारत में भारतीय खेलों को तरज़ीह दी जाती थी। देश में कबड्डी, गुल्ली-डंडे का बोल-बाला था हांलाकि उस समय तक क्रिकेट का युग आ गया था।

सुनील छेत्री ने भारतीय फुटबॉल को दिया नया मुकाम, याद दिलाया 1960 का स्वर्णिम काल
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पहली बार फुटबॉल को देश में ब्रिटिश उपनिवेश काल के समय अग्रेंजों द्वारा लाया गया। ये वो दौर था जब भारत में भारतीय खेलों को तरज़ीह दी जाती थी। देश में कबड्डी, गुल्ली-डंडे का बोल-बाला था हांलाकि उस समय तक क्रिकेट का युग आ गया था।

लंबे समय़ तक फुटबॉल को सिर्फ अंग्रेजों ने ही खेला, फिर देश में कई नए क्लबों की स्थापना की गई। भारत में फुटबॉल का खेल शुरुआती दौर में पश्चिम बंगाल, गोआ, केरल, मणिपुर और सिक्किम में आया, यहीं से उसे एक नई राह मिली। देश में इन राज्यों द्वारा अपने क्लब खोले गए और खिलाड़ियों ने इनमें जोर-शोर से भाग लिया।

भारत दुनिया के सबसे पुराने फुटबॉल क्लबों और दुनिया की तीसरी सबसे पुरानी प्रतियोगिता, डुरंड कप का घर भी माना जाता है। हालांकि ब्रिटिश काल के दौरान ही भारतीय फुटबॉल क्लबों के माध्यम से दुनिया पर छा चुका था। अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) 1937 की स्थापना की गई जिसके साथ देश में फुटबॉल पर लोगों का ध्यान गया।

1948 से 1950 का दशक फुटबॉल के उत्थान का युग माना गया। 1951 में तो एशिया कप में स्वर्ण पदक हासिल कर ये जता दिया कि ये खेल किसी भी दूसरे खेल से कम नहीं है। 1960 के दशक में टीम के लिए स्वर्ण काल माना जाता रहा फिर भी फुटबॉल दर्शकों के दिलों में अपनी मुक्कमल जगह बनाने में नाकामयाब ही रहा। भारतीय फुटबाल के पास आज भी सुविधाओं की भारी कमी है टीम के पास अभी तक स्थायी मैदान तक नहीं है। हमारे अधिकतर मैदानों को फीफा की नियमावली से बाहर ही माना गया है ।

नया मुकाम

एक बार फिर भारतीय फुटबॉल की तरफ दर्शकों का ध्यान लौटा है। देखा जाए तो फुटबॉल को दर्शकों ने लंबे दशक तक बैकफुट पर ही रखा है। भारतीय टीम के युवा कप्तान सुनील छेत्री ने फुटबाल प्रेमियों को फिर एक बार स्वर्ण युग में पहुंचा दिया है। सुनील छेत्री ने पिछले दिनों टीम की मेजबानी करते हुए खिताबी मुक़ाबले में कीनिया को 2-0 से हराया और इंटर-कॉन्टिनेंटल फ़ुटबॉल कप जीत लिया. लेकिन इसके अलावा ये मैच भारतीय टीम और छेत्री के लिए भी खास रहा इस मैच में छेत्री ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए अर्जेंटीना के दिग्गज फुटबॉलर लियोनल मेसी के 64 गोल की बराबरी कर ली।

छेत्री और मेसी अंतरराष्ट्रीय फुटबाल में सक्रिय खिलाड़ियों में सबसे ज्यादा गोल करने के मामले में संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर हैं। सक्रिय फुटबॉलरों में सबसे ज्यादा गोल पुर्तगाल के सुपरस्टार क्रिस्टियानो रोनाल्डो के नाम दर्ज हैं जिन्होंने 150 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 81 गोल किए हैं।

सुनील छेत्री के बेहतरीन प्रदर्शन के बाद अब एक बार फिर फुटबॉल प्रेमियों का ध्यान भारतीय फुटबाल की तरफ लौट रहा है। सुनील छेत्री ने दर्शकों से गुहार भी लगाई है कि वे भले ही टीम को गालियां दें, आलोचना करें, लेकिन भारतीय फुटबॉल टीम का खेल देखने के लिए स्टेडियम में जरुर आएं।

आज सुनील छेत्री की वजह से अतंरराष्ट्रीय फलक पर भी इस खिलाड़ी और भारतीय टीम की चर्चा एक बार फिर चल पड़ी है जिसे भारतीय टीम के लिए पुनर्जन्म के रुप में देखा जा सकता है। सुनील छेत्री खुद अब उम्मीद कर रहें हैं कि उनके इस प्रदर्शन के बाद भारतीय दर्शक भी उन्हें चियर करने मैदानों की ओर आएंगे और भारतीय फुटबाल विश्व फलक पर उभरता हुआ ऩए प्रतिमान रचेगा।

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