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इस तरह की राजनीति से तो अराजकता ही फैलेगी

आम आदमी पार्टी देश में किस तरह की राजनीति करना चाहती हैं?

इस तरह की राजनीति से तो अराजकता ही फैलेगी
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नई दिल्‍ली. जिन लोगों ने बीते दिसंबर की सर्दियों में आम आदमी पार्टी को उम्मीद की नजरों से देखा था और यह कहने में तनिक भी संकोच नहीं किया था कि यह पार्टी भारतीय राजनीति में आई कई बुराइयों को दूर करने के साथ ही देश में एक नईराजनीति का वाहक बनेगी, उन्हें बुधवार को उसके कार्यकर्ताओं के हिंसक रवैये से सबसे ज्यादा निराशा हुई होगी। आखिर आम आदमी पार्टी देश में किस तरह की राजनीति करना चाहती हैं?

दिल्ली व लखनऊ के भारतीय जनता पार्टी के दफ्तरों के बाहर उनका जो रूप देश की करोड़ों जनता ने देखा क्या उसी के बल पर वे व्यवस्था परिवर्तन की बात कर रहे हैं? इससे तो मौजूदा व्यवस्था भी अराजकता की भेंट चढ़ जाएगी। भारत एक लोकतांत्रिक देश है। यहां विविधताएं कदम कदम पर हमारा स्वागत करती हैं। विचारों में विविधता लोकतंत्र को और फलदायी बनाती है, परंतु ऐसा तभी होगा जब हम सभी एक दूसरे के विचारों का सम्मानपूर्वक विरोध करेंगे।

लोकतत्र में विरोध का एक तरीका होता है पर आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता बात-बात पर लोगों के घरों, दफ्तरों पर हंगामा करने पहुंच जा रहे हैं उसे कहीं से भी जायज नहीं कहा जा सकता। यह घृणा की राजनीति ठीक नहीं है। सार्वजनिक जीवन में विरोध का सबसे उचित तरीका है कि आप जनता के बीच जाएं, परंतु आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं को इसकी बजाय भीड़ जुटाकर हंगामा करना ज्यादा अच्छा लगता है।

दरअसल, बुधवार को आम आदमी पार्टी के संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल गुजरात में जब रोड शो कर रहे थे तो पुलिस ने उन्हें बीच में ही रोक लिया, क्योंकि चुनाव आयोग ने 16वीं लोकसभा के लिए आम चुनावों की तिथियों की घोषणा कर दी थी। घोषणा के बाद पूरे देश में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है और इस दौरान बिना इजाजत कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं किया जा सकता। गुजरात में अरविंद बिना इजाजत रोड शो कर रहे थे जो कि उल्लंघन का मामला था, परंतु उनके कार्यकर्ताओं ने आपा खो दिया।

उसके बाद पुलिस को बिना बताए या उसकी इजाजत के वे दिल्ली में भाजपा के दफ्तर के बाहर जुट गए। यह भी आचार संहिता का उल्लंघन है। इस बात को चुनाव आयुक्त एच एस ब्रrा ने भी माना है और उन्होंने दोनों घटनाओं को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। जिस तरह से आम आदमी पार्टी की ओर से इस मुद्दे को तूल दिया गया है उससे लगता है कि लोकसभा चुनावों को देखते हुए वे किसी न किसी तरह से चर्चा में बने रहना चाहते हैं।

इससे पहले भी पूर्व मंत्री सोमनाथ भारती कानून को अपने हाथ में लेने का काम कर चुके हैं। शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराना आयोग की जिम्मेदारी होती है। जाहिर है दिल्ली पुलिस जांच के लिए कुछ लोगों को गिरफ्तार करेगी और कुछ लोगों को पूछताछ के लिए थाने ले जाएगी। अब कानून को अपना काम करने देना चाहिए और कानून के अनुसार पुलिस के उठाए गए कदम पर कोई राजनीतिक माइलेज लेने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। इस तरह की राजनीतिक कदम से आम आदमी पार्टी को भी बचना चाहिए। क्योंकि इससे देश में यही संदेश जाएगा कि वे कानून और संविधान को नहीं मानते हैं।

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