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चिंतन: फोन टैपिंग के खिलाफ कठोर प्रावधान जरूरी

एस्सार ग्रुप पर कई वीवीआइपियों के फोन टैप कराने का आरोप लगा है।

चिंतन: फोन टैपिंग के खिलाफ कठोर प्रावधान जरूरी
नई दिल्ली. फोन टैपिंग भारत में नया नहीं है। वर्षों से नेताओं, अफसरों और बिजनेसमैनों के फोन टैप होते रहे हैं। लेकिन इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऑफिस पीएमओ फोन टैपिंग के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया है। सुप्रीम कोर्ट के वकील सुरेश उप्पल ने बीते एक जून को ताजा फोन टैपिंग के बारे में 29 पेज की एक शिकायत पीएमओ को भेजी थी। पीएमओ ने गृह मंत्रालय से रिपोर्ट मांगी है। यूं तो होम मिनिस्ट्री ने इस फोन टैपिंग मामले की जांच 10 दिन पहले ही शुरू कर दी है और कहा जा रहा है कि जल्द ही जांच रिपोर्ट पीएमओ को सौंपा जाएगा। दरअसल एस्सार ग्रुप पर कई वीवीआईपियों के फोन टैप कराने का आरोप लगा है।
निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनी एस्सार पर मौजूदा रेल मंत्री सुरेश प्रभु, पूर्व मंत्री प्रफुल्ल पटेल और राम नाइक, रिलायंस ग्रुप के मुकेश अंबानी, एडीएजी के मुखिया अनिल अंबानी, अनिल की पत्नी टीना अंबानी, प्रमोद महाजन (भाजपा के दिवंगत नेता), अमर सिंह (सपा नेता), राजीव महर्षि (तब के गृहसचिव), पीपी. वोहरा (आईडीबीआई बैंक के पूर्व चेयरमैन), केवी. कामथ (आईडीबीआई बैंक के ही पूर्व सीईओ और एमडी) और इसी बैंक की पूर्व ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर ललिता गुप्ते समेत कई ब्यूरोक्रेट्स के फोन 2001 से 2006 के बीच टैप कराने के आरोप लगे हैं।
टैप हुई बातचीत में वाजपेयी सरकार के दौरान पीएमओ में सबसे ताकतवर अफसर माने जाने वाले ब्रजेश मिर्शा, एनके. सिंह, बीजेपी नेता किरीट सोमैया, जसवंत सिंह, पीयूष गोयल, सुधांशु मित्तल, सहारा ग्रुप के चीफ सुब्रत रॉय और अमिताभ बच्चन के नाम सामने आए थे। मार्के की बात यह है कि फोन 2001 से 2006 के बीच टैप हुए हैं, इस सालों में भाजपा नीत एनडीए और कांग्रेस नीत यूपीए की सरकार रही है। इसका मतलब हुआ कि दोनों ही सरकार में नीतिगत फैसलों की जानकारी जुटाने के लिए फोन टैप किए गए। यदि सच में एस्सार ने फोन टैप कराया है, तो निश्चित ही उसकी रुचि टेलीकॉम, पेट्रोलियम समेत कई सेक्टरों में सरकार की योजना जानने में दिलचस्पी रही होगी। वैसे एस्सार ग्रुप ने कहा है कि उसने कुछ भी गलत नहीं किया है। फोन टैपिंग गंभीर मसला इसलिए है कि इसका राष्ट्रीय सुरक्षा, सरकार के अहम फैसलों और कानूनी मामलों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
इससे पहले भी प्रणब मुखर्जी जब वित्त मंत्री थे, तो उनके दफ्तर में फोन टैप करने वाले संदिग्ध उपकरण मिले थे, तब बड़ा बवाल मचा था। तब शक की सुई उनकी ही सरकार के दूसरे बड़े मंत्री की ओर गई थी। पूर्व में अरुण जेटली के फोन टैप होने की खबर भी आई थी। नितिन गडकरी के निजी दफ्तर में भी फोन टैपिंग करने जैसे संदिग्ध उपकरण मिले थे। भारत ही नहीं अमेरिका-यूरोप जैसे देशों में भी फोन टैपिंग के मामले सामने आते रहे हैं। हालांकि ब्रिटेन और अमेरिका में फोन टैपिंग के खिलाफ सख्त कानून हैं।
अभी जैसे सुप्रीम कोर्ट केंद्र द्वारा दायर उस जनहित याचिका की सुनवाई कर रहा है, जिसमें एस्सार ग्रुप पर अपने फायदे के लिए नेताओं, अफसरों और पत्रकारों के फोन टैप कराने का आरोप लगाया गया है, तो शीर्ष अदालत का फैसला जो भी हो लेकिन केंद्र सरकार को चाहिए कि वह एस्सार फोप टैपिंग केस की जल्द से जल्द जांच तो कराए ही, इसके साथ ही वह लोगों के निजता के अधिकार का उल्लंघन करने व देशहित को खतरे में डालने वालों के खिलाफ सख्त कानून का भी प्रावधान करे। कंपनियों को भी चाहिए कि वह सिर्फ अपने निहित लाभ के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में नहीं डालें। बेहतर यही हो कि कंपनियां बजाय तिकड़म के स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का सामना करे ।
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