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पाक के खिलाफ कठोर कूटनीति की जरूरत

भारत की सख्त चेतावनी के बावजूद पाक सरकार कश्मीर में उपद्रव को शह देना बंद नहीं कर रही है।

पाक के खिलाफ कठोर कूटनीति की जरूरत
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कश्मीर में पिछले डेढ़ माह से अशांति जारी है। और अब यह साफ हो चुका है कि इस अशांति के पीछे पाकिस्तान का नापाक हाथ है। भारत की सख्त चेतावनी के बावजूद पाक सरकार कश्मीर में उपद्रव को शह देना बंद नहीं कर रही है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कड़े शब्दों में पाकिस्तान से कहा है कि वह भारत के सब्र का इम्तिहान नहीं ले, वरना गंभीर अंजाम भुगतने को तैयार रहे। पाकिस्तान को भारत के दो टूक संदेश का मतलब साफ समझना चाहिए। उसे यह भी समझना चाहिए कि उसने जितनी बार कश्मीर मसले का अंतराष्ट्रीयकरण करने की कोशिश की है, उसे मुंह की ही खानी पड़ी है।
चाहे संयुक्त राष्ट्र हो या अन्य ग्लोबल मंच, हर जगह कश्मीर पर पाक की कोशिश विफल हुई है। उल्टे पाकिस्तान आतंकवादी संगठनों को पनाह देने वाले देश के रूप में विश्व में कुख्यात हो चुका है। दुनिया जान चुकी है कि पाक सरकार और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई भारत के खिलाफ आतंकवाद का प्रयोग कर रही हैं। कश्मीर में उपद्रव भड़काने के पीछे भी पाक सरकार की प्रायोजित नीति है। इस बार भी हिज्बुल आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से जिस तरह पाकिस्तान सरकार कश्मीर में उपद्रव को उकसा रही है और वहां के भटके युवाओं का इस्तेमाल हिंसा भड़काने में कर रही है, उससे साफ है कि उसने अपनी पिछली हारों से सबक नहीं लिया है।
भारत की ओर से पड़ोसी से मैत्रीपूण संबंधों की पुरजोर पहल के बावजूद पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का अचानक चोला बदलना और आतंकी वानी को शहीद बताना साबित करता है कि पाकिस्तान की भारत के खिलाफ आतंकवाद के प्रयोग की सरकारी नीति में बदलाव नहीं आया है। पाक की इसी नीति का नतीजा है कि आज वहां 32 आतंकी गुट ऑपरेट हो रहे हैं। ये गुट खुद पाकिस्तान को भी लहूलुहान करते रहते हैं, फिर भी पाकिस्तान चेत नहीं रहा है। इतना ही नहीं आतंकवाद को सरकारी नीति बनाने के चलते ही आज पाक विश्व में अलग-थलग पड़ा है। चीन को छोड़कर कोई भी देश उसके साथ नहीं है।
हालांकि चीन भी आतंकवाद के खिलाफ है और वह इस मसले पर उसके साथ नहीं है। पाकिस्तान को अमेरिका और ब्रिटेन समेत यूरोपीय देशों से भी दो टूक संदेश मिल चुका है कि वह कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद करे। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी पाकिस्तान को साफ आईना दिखाया है कि कश्मीर घाटी में पत्थरबाजी करने वाले सत्याग्रही नहीं हो सकते। यह जानते हुए कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, 57 सदस्य देशों वाले संगठन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) के महासचिव इयाद अमीन मदनी का कहना कि कश्मीर में मानवाधिकारों का उल्लंघन केवल भारत का आतंरिक मामला नहीं है, बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है, निंदनीय है।
काश मदनी बलूचिस्तान में पाक सरकार की क्रूरता देख पाते, देखते कि वहां किस तरह से बलूचों का दमन किया जा रहा है। वे पाक अधिकृत कश्मीर में पाकिस्तान सरकार की ओर से दमनकारी मानवाधिकार उल्लंघन देख पाते। कश्मीर में चुनी हुई सरकार काम कर रही है और वहां हिंसा व उपद्रव के पीछे पाकिस्तान का ही हाथ है। मदनी को मालूम होना चाहिए कि सऊदी अरब, ईरान, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, मलेशिया समेत अधिकांश मुस्लिम देशों का भारत के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध हैं। उन्हें यह भी पता होना चाहिए कि भारत में पाकिस्तान से अधिक मुसलमान रहते हैं।
मदनी के बयान से पाकिस्तान को कतई खुश होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि कोई भी मुस्लिम देश आतंकवाद का सर्मथन नहीं करता है। आतंकवाद के बल पर पाकिस्तान कभी भी भारत के खिलाफ कोई भी जंग नहीं जीत सकता है। उसे हर बार शिकस्त ही खानी पड़ेगी। भारत हमेशा आतंकवाद का विरोध करता रहा है। अब भारत सरकार को चाहिए कि वह एक तरफ सभी पक्षों से बातचीत कर कश्मीर में शांति बहाली की कोशिश करे और दूसरी तरफ पाकिस्तान के खिलाफ कठोर कूटनीति का इस्तेमाल करे।
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