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रियो में अंधेरे को दूर कर सकती हैं सिंधु

अभिनव बिंद्रा से लेकर कई दूसरे नामचीन चेहरे टॉप थ्री तक भी नहीं पहुंच सके।

रियो में अंधेरे को दूर कर सकती हैं सिंधु

जिनसे मेडल की उम्मीदें थीं, वो एक-एक कर रियो ओलंपिक से बाहर हो रहे हैं। अब तक 90 से ज्यादा एथलीट मुकाबले हारकर प्रतियोगिता से बाहर हो चुके हैं। लंदन ओलंपिक में मेडल जीतने वाले कई खिलाड़ी इस बार अपने मेडल का रंग बदलने के इरादे से ब्राजील गए थे, परन्तु साइना नेहवाल, गगन नारंग, अभिनव बिंद्रा से लेकर कई दूसरे नामचीन चेहरे टॉप थ्री तक भी नहीं पहुंच सके। इससे अफसोस की बात और क्या हो सकती है कि अभी तक भारत का खाता तक नहीं खुला है।

हालांकि यह भी सच है कि ओलंपिक खेलों में कभी भी भारतीय खिलाड़ियों ने तीर नहीं मारे हैं, परन्तु 2008 के बीजिंग खेलों के बाद 2012 के लंदन ओलंपिक में जिस तरह का प्रदर्शन रहा और मेडलों में वृद्धि दर्ज की गई, उससे यह उम्मीद जगी थी कि रियो में भारतीय दल और अच्छा प्रदर्शन करेगा, परन्तु हो रहा है उलटा। सोशल मीडिया में कई तरह के मजाक उड़ाने वाले संदेश पढ़ने को मिल रहे हैं। लेखिका शोभा डे ने खिलाड़ियों की आलोचना की तो सचिन तेंदुलकर से लेकर तमाम हस्तियों ने उन्हें आड़े हाथों ले लिया, परन्तु यह स्वीकार करने में हमें शर्म क्यों आती है कि तमाम प्रयासों और सुविधाओं के बावजूद खिलाड़ी फिसड्डी ही बने हुए हैं। मेडल नहीं जीत पाने के बाद अभिनव बिंद्रा ने जिस तरह व्यवस्था को कोसा है, वह और भी आश्चर्यजनक है।
वे ब्रिटेन में दी जानी वाली सुविधाओं से भारत में मिलने वाली सुविधाओं की तुलना कर रहे हैं। जब मेडल जीत रहे थे, तब खामोश क्यों थे? जाहिर है, यह एक तरह की कुंठा है, जो इस तरह से निकल रही है। ऐसा भी नहीं है कि भारतीय दल के हरेक खिलाड़ी का रवैया ऐसा है। लंदन में जो कारनामा साइना नेहवाल ने किया था, रियो में अगर उनकी जूनियर पीवी सिंधु कर दिखाए तो किसी को आश्चर्य नहीं होगा। सिंधु ने महिला सिंगल्स के क्वार्टर फाइनल में चीन की वांग यिहान को हराकर बाकी खिलाड़ियों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। विश्व की नंबर दो खिलाड़ी वांग दो बार विश्व चैंपियन रह चुकी हैं और उन्होंने दो बार एशियन गेम्स का गोल्ड मेडल जीता है। सेमीफाइनल में पीवी सिंधु का मुकाबला अब जापान की नोजोमी ओकुहारा से होगा जिन्होंने इसी साल बैडमिंटन का विम्बल्डन कही जाने वाली प्रतिष्ठित ऑल इंग्लैंड प्रतियोगिता जीती है।
ओकुहारा और सिंधु बराबर उम्र की हैं, लेकिन जापानी खिलाड़ी अपने करियर में विश्व नंबर तीन की रैंकिंग तक पहुंची हैं जबकि सिंधु की सबसे अच्छी रैंकिंग नौ रही है। वर्ष 2012 में एशियन यूथ अंडर-19 प्रतियोगिता के फाइनल में पीवी सिंधु ने ओकुहारा को 18-21, 21-17, 22-20 से हराया था। हालांकि 2015 में ओकुहारा ने सिंधु को दो बड़े मैचों में हराया भी है जिसमें एक मलेशिया ओपन का सेमीफाइनल था। रियो में पीवी सिंधु बेहतरीन फॉर्म में दिख रही है। विश्व नंबर दो वांग यिहान से भी करियर भिड़ंत में वे 2-4 से पीछे ही थीं।
वांग को हराने के बाद नोजोमी के खिलाफ सेमीफाइनल में सिंधु का उत्साह इसलिए भी सातवें आसमान पर होगा क्योंकि दूसरे महिला एकल सेमीफाइनल में जो दो खिलाड़ी हैं उन्हें भी सिंधु अपने करियर में शिकस्त दे चुकी हैं। दूसरा सेमीफाइनल स्पेन की अनुभवी खिलाड़ी कैरोलीना मारिन और चीन की ली जरुई के बीच है। सिंधु ने 2015 के डेनमार्क ओपन में कैरोलिना को 72 मिनट तक चले मुकाबले में 21-15, 18-21, 21-17 से हराया था इसलिए उम्मीद की जा रही है कि भारतीय कैंप में अभी तक जो अंधेरा दिखाई दे रहा है, उसमें रोशनी भरने का काम सिंधु कर सकती हैं।
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