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प्रभात कुमार रॉय का लेख : यूं ही नहीं आंदोलित हो उठा सिंध

जीएम सैयद की 117 वीं जयंती का जश्न जिए सिंध कौमी मुत्ताहिदा महाज ने अजब ढंग से मनाया। इस अवसर पर उनके जन्म स्थान सिंध की सना तहसील, जिला जमसोरो में एक रैली आयोजित की गई। इस रैली में सिंधियों और मुहाजिरों का बड़ा जन सैलाब उमड़ पड़ा। इस रैली में सिंध प्रांत को पाकिस्तान से पृथक करके सिंधु देश का निर्माण की मांग करने वाले प्रदर्शनकारी अपने हाथों में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो बाइडेन समेत विश्व के तमाम बड़े नेताओं के पोस्टर उठाए हुए थे। ये प्रदर्शनकारी विश्व के इन तमाम नेताओं से पाकिस्तान के दखल देकर सिंधु देश का निर्माण करने में सक्रिय मदद प्रदान करने की मांग कर रहे थे।

प्रभात कुमार रॉय का लेख : यूं ही नहीं आंदोलित हो उठा सिंध
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प्रभात कुमार रॉय 

प्रभात कुमार रॉय

पाकिस्तान का सिंध प्रांत, वस्तुतः बलूचिस्तान के नक्शे कदम पर चलकर बगावत का दूसरा केंद्र बनता जा रहा है। गुलाम मुर्तजा सैयद जिनको आम तौर पर जीएम सैयद कहा जाता है की 18 जनवरी जन्मतिथि थी। जीएम सैयद की 117 वीं जयंती का जश्न जिए सिंध कौमी मुत्ताहिदा महाज ने अजब ढंग से मनाया। इस अवसर पर उनके जन्म स्थान सिंध की सना तहसील, जिला जमसोरो में एक रैली आयोजित की गई। इस रैली में सिंधियों और मुहाजिरों का बड़ा जन सैलाब उमड़ पड़ा। इस रैली में सिंध प्रांत को पाकिस्तान से पृथक करके सिंधु देश का निर्माण की मांग करने वाले प्रदर्शनकारी अपने हाथों में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन, फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों, सऊदी अरब के शासक शेख मोहम्मद बिन सलमान, जर्मन चांसलर मार्केल, इंग्लैंड के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के बड़े बड़े पोस्टर उठाए हुए थे। जिए सिंध कौमी मुत्ताहिद महाज के ये प्रदर्शनकारी विश्व के इन तमाम नेताओं से पाकिस्तान के दखल देकर सिंधु देश का निर्माण करने में सक्रिय मदद प्रदान करने की मांग कर रहे थे।

उल्लेखनीय है सिंध को आजाद मुल्क बनाने के लिए प्रबल पैरोकारी और जबरदस्त आंदोलन करने वाले जिए सिंध कौमी महाज के संस्थापक लीडर जीएम सैयद थे। वर्ष 1941 में मुस्लिम लीग के कराची अधिवेशन में वस्तुतः पाकिस्तान को निर्मित करने का प्रस्ताव भी जीए सैयद द्वारा ही पेश किया गया था। साल 1947 तक जीएम सैयद सिंध प्रांत में मुसलिम लीग के सर्वोच्च नेता रहे थे। भारत का विभाजन करके पाकिस्तान को एक पृथक देश के तौर पर निर्मित करने में जीएम सैयद ने एक विशिष्ट किरदार निभाया। वर्ष 1947 में ही जीएम सैयद का पाक राष्ट्रपति मोहम्मद अली जिन्ना के सामंतशाही रवैये के कारण मोहभंग हो गया और अंततोगत्वा जीएम सैयद पाकिस्तान के शासकों के दमनकारी रवैये से बेहद खफा होकर सिंध प्रांत को पाकिस्तान से पृथक करके एक खुदमुख्तार और आजाद राष्ट्र के तौर पर निर्मित करने के प्रबल पैरोकार बन गए. 60 से अधिक पुस्तकों के रचियता जीएम सैयद एक सियासतदान से कहीं बढ़कर एक जाने माने विद्वान भी थे। साल 1971 में पाकिस्तान से पूर्णतः पृथक होकर बांग्लादेश के एक आजाद राष्ट्र के तौर पर अस्तित्व में आ जाने से जीएम सैयद को प्रतीत हुआ कि सिंध प्रांत भी एक आजाद मुल्क बन सकता है।

वर्ष 1972 में जीएम सैयद द्वारा बांग्लादेश के निर्माण से प्रेरित होकर जिए सिंध कौमी महाज की स्थापना की गई थी। जीएम सैयद अपनी 90 वर्ष की जिंदगी के तकरीबन 30 साल ब्रिटिश और पाकिस्तान की मुखतलिफ जेलों में व्यतीत करने पड़े। एमनेस्टी इंटरनेशनल द्वारा वर्ष 1992 में जीएम सैयद को प्रीजनर ऑफ कॉनसाईन्स करार दिया गया। जीएम सैयद का कहना था पाकिस्तान के निर्माण के पश्चात भी कि सिंध के किसानों की जिंदगी में कोई बुनियादी तबदीली नहीं आ सकी, क्योंकि सिंध प्रांत में पंजाबी जमीदारों का आधिपत्य और वर्चस्व निरंतर कायम बना रहा और केंद्रीय सत्ता और फौज में भी पंजाबियों का प्रभुत्व बरकरार रहा। वर्ष 1995 में जीएम सैयद की मौत के बाद भी सिंध प्रांत में पाकिस्तान से पूर्णतः आजाद होने का जबरदस्त ज़ज्बा बरकरार रहा। सिंधी अवाम के दिलो दिमाग में जो स्वातंत्रय चिंगारी जीएम सैयद प्रज्ज्वलित करके गए थे, वो चिंगारी तो अब एक शोला बन चुकी है।

सिंध को पाकिस्तान से आजाद करने की मुहिम में सिंधियों के साथ मुहाजिरों के बाकायदा सम्मिलित हो जाने कारण, जिएसिंध कौमी महाज का नाम बदलकर जिए सिंध मुत्ताहिदा कौमी महाज रख दिया गया। मुहाजिर वो पाक़ नागरिक हैं, जोकि साल 1947 में विभाजन के तत्पश्चात भारत से पलायन करके पाकिस्तान के सिंध प्रांत में जा बसे थे, किंतु दुर्भाग्यवश मुहाजिर दोयम दर्जे के नागरिक बने रहे, आजकल जिएसिंध मुत्तहिदा महाज के अध्यक्ष शफी मुहम्मद बुरफात हैं। शफी मुहम्मद बुरफात का कहना कि पाकिस्तान की सरजमीं में आज का सिंध यकीनन पंजाब का एक उपनिवेश है और इस्लाम के नाम पर फौजी ताकत का भी गुलाम बना हुआ है। सिंधी जनमानस अब और पाकिस्तान हुकमत की दमनकारी गुलामी में कदापि नहीं रहना चाहता है, इसलिए जिए सिंध मुत्ताहिदा महाज समस्त अंतरराष्ट्रीय समुदाय और उनके नेताओं से अपील कर रहा है कि पाकिस्तान में दखलंदाजी अंजाम देकर पाक हुकूमत के नृशंस फासीवाद के विरुद्ध राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम हमारा समर्थन करें।

जिए सिंध कौमी मुत्ताहिद महाज द्वारा दुनिया के अनेक देशों के नेताओं के साथ साथ भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पोस्टर उठाकर बड़ा प्रदर्शन करने की पृष्ठभूमि में बांग्लादेश और बलूचिस्तान की तरह से भारत सरकार से इमदाद हासिल करने की फरियाद प्रकट होती है। भारत ने बांग्लादेश का निर्माण करने में अपनी सेना उतार दी थी और बलूचिस्तान के संग्राम का भी नरेंद्र मोदी द्वारा लालकिले की प्रचीर से नैतिक समर्थन किया जा चुका है। जिए सिंध महाज के आंदोलनकारी भी भारत की तरफ बड़ी उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। यह तो अब भारत सरकार पर निर्भर करता है कि जिए सिंध के आंदोलन पर वह क्या नजरिया अख्त्यार करती है। भारत सरकार कम से कम बलूचिस्तान की तर्ज पर अपना प्रबल नैतिक समर्थन को सिंधुदेश के निर्माण आंदोलन को दे सकती है।

पाकिस्तान वस्तुतः विगत अनेक दशक से जेहादी आतंकवाद का गढ़ बना हुआ है। फरवरी में आयोजित होने वाली फाइनेन्शियल एक्शन टास्क फोर्स की मीटिंग में संभवतया पाकिस्तान को काली सूची में डाल दिया जाएगा। ऐसे विकट आर्थिक हालात में पाकिस्तान के पास केवल चीन और टर्की का थोड़ा बहुत सहारा ही शेष रह जाएगा। बलूचिस्तान और सिंध में जारी पृथकतावादी संग्राम का पाकिस्तान अंततः अधिक दिनों तक मुकाबला नहीं कर पाएगा। पाकिस्तान के हित में है कि वह न्यायपूर्ण और वास्तविक जनतंत्र का दामन थाम ले और दमनकारी डीपस्टेट फौजी तानाशाही से पीछा छुड़ाकर कश्मीर हड़पने के अपने जेहादी मंसूबों को अलविदा कह दे और अपने बलूचिस्तान और सिंध को बचाने में जुट जाए।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।

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