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समाज और सरकार के लिए शर्मनाक है आश्रय गृहों में बढ़ते अपराध

महिलाओं, बालिकाओं और बच्चों के यौन शोषण की घटनाएं किसी भी सभ्य समाज और सरकार के लिए शर्मनाक हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेपकांड के बाद उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के शेल्टर होम में भी यौन शोषण का पर्दाफाश शर्मसार करने वाला है। ऐसे कांड प्रशासन की नाकामियों की पोल खोलते हैं।

समाज और सरकार के लिए शर्मनाक है आश्रय गृहों में बढ़ते अपराध
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महिलाओं, बालिकाओं और बच्चों के यौन शोषण की घटनाएं किसी भी सभ्य समाज और सरकार के लिए शर्मनाक हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेपकांड के बाद उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के शेल्टर होम में भी यौन शोषण का पर्दाफाश शर्मसार करने वाला है। ऐसे कांड प्रशासन की नाकामियों की पोल खोलते हैं।

मुजफ्फरपुर में जिस तरह एनजीओ, प्रशासन और सत्ताधारी नेताओं की मिलीभगत सामने आ रही है, उससे लग रहा है कि राज्य की सरकार किस तरह आंखमूंद कर काम कर रही है। मुजफ्फरपुर के शेल्टर होम में करीब 29 बच्चियों के साथ दुष्कर्मकांड ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सुशासन की पोल भी खोल दी है।

नीतीश ने बेशक कहा हो कि दोषी बख्शे नहीं जाएंगे, लेकिन जाहिर है कि बिहार सरकार को अपनी शासन प्रणाली की गहन समीक्षा की जरूरत है। मुजफ्फरपुर से महज सात-आठ घंटे की दूरी पर यूपी के देवरिया के शेल्टर होम में आश्रय पाई महिलाओं के साथ यौन शोषण दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश की शासन प्रणाली भी बिहार से अलहदा नहीं है।

यूपी में भी सरकार को अपने जिला प्रशासन की समीक्षा करने की आवश्यकता है। महिलाओं से यौन शोषण की ये दो घटनाएं पहली बार सामने नहीं आई हैं। देशभर में जिला प्रशासन के संरक्षण में चल रहे बालिका गृह, सुधार गृह, आश्रय गृह जैसे शेल्टर होमों में यौन शोषण और अन्य अनियमितताओं की घटनाएं उजागर होती रहती हैं।

2012 में हरियाणा के रोहतक जिले में अपना घर में महिलाओं के साथ दरिंदगी सामने आई थी। मध्यप्रदेश, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र समेत शायद ही कोई राज्य छूटा है जहां शेल्टर होम में कभी न कभी यौन शोषण की घटनाएं सामने नहीं आई हों। यहां तक कि बाबाओं के आश्रम भी यौन शोषण से अछूते नहीं हैं।

आसाराम, राम रहीम इसी अपराध में जेल में हैं। शनिदेव भक्त दाती महराज पर भी अपने साधिकाओं के साथ यौन शोषण के आरोप लगे हैं। सबसे दहलाने वाली बात यह है कि अधिकांश शेल्टर होम में यौन शोषण के अपराध में संचालक में सम्मलित महिलाएं भी शामिल पाई जाती हैं।

कितना दुखद है कि महिला ही नहीं समझ पाती है कि यौन अपराध की पीड़ितों का बाकी जीवन आत्मग्लानि की पीड़ा से भर जाता है। पीड़ितों को जीवनभर मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ती है। आज देश का कोई भी हिस्सा हो, बालिकाएं-महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। औरतें सबसे अधिक यौन अपराध की शिकार बन रही हैं।

राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के मुताबिक भी हर साल सबसे अधिक अपराध महिलाओं के खिलाफ यौन शोषण के ही दर्ज होते हैं। सख्त कानून के बावजूद यौन अपराध का नहीं रुकना दर्शाता है कि लोगों में कानून का भय नहीं रह गया है।

यौन अपराध की बढ़ रही घटनाएं दर्शाती हैं कि महिला व बाल कल्याण मंत्रालय की ओर से गाइड लाइन के बावजूद जिला प्रशासन महिलाओं व बालिकाओं की सुरक्षा के लिए ईमानदारी से काम नहीं कर रहा है।

इन घटनाओं से यह भी पता चलता है कि राज्य सरकारें महिलाओं की सुरक्षा नहीं कर पा रही हैं। शेल्टर होम की संचालन प्रक्रिया पर भी विचार किए जाने की जरूरत है।

अधिकांश शेल्टर होम किसी न किसी एनजीओ द्वारा संचालित हैं, जिनमें नेताओं और अफसरों के नापाक गठजोड़ लिप्त हैं। महिला और बाल कल्याण मंत्रालय को देशभर में चल रहे शेल्टर होमों की समीक्षा करनी चाहिए।

इसमें केंद्रीय महिला आयोग और राज्य महिला आयोग को भी अपनी भूमिकाएं निभानी चाहिएं। महिलाओं और बालिकाओं के लिए चल रहे शेल्टर होमों के संचालन को जिला प्रशासन से हटाकर सीधे महिला और बाल कल्याण मंत्रालय के अधीन किया जाना चाहिए और इन्हें महिला आयोगों की देखरेख में संचालित किया जाना चाहिए।

हालांकि ऐसा करने से यौन शोषण थम जाएगा इसकी गारंटी नहीं है, लेकिन ऐसा करके जिला प्रशासन की मनमानी व भ्रष्टाचार की जड़ को काटा जा सकता है। राज्य सरकारों को तत्काल अपने शेल्टर होमों को सुधारना चाहिए, ताकि मुजफ्फरपुर, देवरिया जैसे कांड को रोका जा सके।

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