Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

शैलचंद्रा की लघुकथा : पेइंग गेस्ट

वे उन्हें पहचानने की कोशिश करने लगीं। बहू-बेटे ने पेइंग गेस्ट रखा हुआ था। डाइनिंग टेबल पर पेइंग गेस्ट भी भोजन सबके साथ ही करता।

शैलचंद्रा की लघुकथा : पेइंग गेस्ट
X

मां जी पहली बार अपने बहू-बेटे के पास शहर आई थीं। गांव में अकेले रहते हुए उन्हें बड़ा एकाकीपन महसूस होता। कई बार उन्होंने बेटे से कहा कि उसे भी अपने साथ शहर ले जाए। घर के किसी कोने में पड़ी रहेंगी।

निर्मल गुप्त का व्यंग : छुक-छुक रेलगाड़ी की धुक-धुक

हर बार बेटा टाल-मटोल कर बहाने बना देता। मोतियाबिंद के ऑपरेशन हेतु बेटे को मजबूर होकर मां को शहर लाना पड़ा। उन्हें एक कोठरी दे दी गई, जबकि एक अंजान व्यक्ति को शानदार कमरा दिया गया था। उसमें टीवी, फ्रिज और कूलर सब थे। उस अनजान की इतनी खातिरदारी देखकर मां जी ने अनुमान लगाया कि कोई रिश्तेदार होंगे।
वे उन्हें पहचानने की कोशिश करने लगीं। बहू-बेटे ने पेइंग गेस्ट रखा हुआ था। डाइनिंग टेबल पर पेइंग गेस्ट भी भोजन सबके साथ ही करता। आखिर वे पूछ बैठीं,‘बहू, ये मेहमान तुम्हारे मायके वालों से हैं क्या?’बहू ने समझाया, ‘नहीं, मां जी ये हमारे पेइंग गेस्ट हैं।’
उनको कुछ समझ नहीं आया। बात में पोते ने समझाया-‘दादी ये हमारे साथ रहते हैं। खाते-पीते हैं और इन सबके बदले ये पैसा देते हैं। इसलिए इनको इतने आराम से रखा गया है। आप भी पेइंग गेस्ट बन जाओ तो मम्मी आपको भी खूब अच्छे से रखेंगी।’
पोते ने मासूमियत से कहा। यह सुनकर मां जी उसे देखती रह गर्इं।
खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलो करें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर-

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story
Top