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चिंतन: अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने की पहल

वेतन में वृद्धि एक जनवरी 2017 से लागू होगी।

चिंतन: अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने की पहल
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नई दिल्ली. भारत सरकार ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को मंजूर कर एक तरह से घरेलू कंज्यूमर इंडस्ट्री में जान फूंकने की कोशिश की है। दरअसल, सातवें पे कमीशन के लागू होने से करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मियों और लगभग 58 लाख पेंशनरों के वेतन बढ़ जाएंगे। यानी कि करीब एक करोड़ परिवारों की आमदनी बढ़ जाएगी। वेतन में वृद्धि एक जनवरी 2016 से लागू होगी। वेतन और भत्तों में 23.55 प्रतिशत की बढ़ोतरी की बात की गई है, जबकि पेंशनधारकों को 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी दी जाएगी। केंद्रीय कर्मियों की आमदनी बढ़ने से बैंकिंग सेक्टर, रियल एस्टेट, ऑटो सेक्टर, कंज्यूमर ड्यूरेबल सेक्टर और एफएमसीजी सेक्टर को तत्काल लाभ होगा।
इधर, तीन-चार साल से होम लोन और ऑटो लोन की रफ्तार में स्टैगनेशन महसूस किया जा रहा था, जिससे सीधे तौर पर तीन सेक्टर-बैंकिंग, रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर प्रभावित हो रहा है। दो साल से हाउसिंग सेक्टर में इतना ज्यादा ग्रोथ क्रंच महसूस किया जा रहा था कि गुड़गांव, फरीदाबाद जैसी ग्रोइंग सिटीज में बने-बनाए घरों के दाम गिरने लगे और आवासीय जमीनों की बिक्री ठप सी हो गई। अभी देश के लगभग सभी बड़े शहरों में रियल एस्टेट क्षेत्र मंदी की दौर से गुजर रहा है। इस सेक्टर में मंदी का मतलब है अप्रत्यक्ष तौर पर आरयन-स्टील सेक्टर, कांक्रीट और सीमेंट इंडस्ट्री पर भी असर पड़ना। इसलिए अब इन दोनों क्षेत्रों में भी और तेजी देखने को मिल सकती है।
हालांकि इस वृद्धि से केंद्रीय खजाने पर करीब 1.02 लाख करोड़ रुपये का सालाना बोझ भी पड़ेगा, लेकिन साथ-साथ कंज्यूमर सेक्टर में ग्रोथ भी देखने को मिलेगा। वैसे सातवें वेतन आयोग ने जो वृद्धि की सिफारिश की है वह पिछले सात दशक में सबसे कम है। जो कि भारत की कुल सकल घरेलू उत्पाद का 0.7 प्रतिशत है। सरकार हर दस साल में अपने कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि के लिए आयोग का गठन करती है जिसकी रिपोर्ट के आधार पर सरकार कर्मचारियों के वेतन वृद्धि पर फैसला लेती है। हालांकि इस बार की वृद्धि के बाद कुछ केंद्रीय कर्मचारी नाराज भी हैं। वह इसलिए कि बेसिक सैलरी 18 हजार से बढ़ाकर 26 हजार रुपये प्रति माह करने की मांग की गई थी, लेकिन सरकार इसके लिए तैयार नहीं हुई।
इसके अलावा भी कई तरह की सुविधाओं को र्मज करने की सिफारिश की गई है, जिससे केंद्रीय कर्मियों की ग्रॉस अमदनी पर असर पड़ना तय है। इसलिए रेलवे समेत करीब 32 लाख कर्मचारी 11 जुलाई से देशव्यापी हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। अब सरकार को इस नाराजगी से निपटना होगा। इससे पहले भी वन रैंक वन पेंशन की मांग मंजूर कर भी सरकार ने सैन्य कर्मियों को लाभ पहुंचाया था। उन्हें अब इस वृद्धि का भी लाभ मिलेगा। कुछ दिनों पहले ही सरकार ने डिफेंस समेत कई सेक्टरों में एफडीआइ नियमों में ढील देकर उद्योग क्षेत्र में भी जान फूंकी है। अब इस वेतन वृद्धि से घरेलू अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने की पहल की गई है। राज्य सरकारों पर भी अपने कर्मियों के वेतन में बढ़ोतरी का दबाव बनेगा और निजी क्षेत्र पर भी। इस तरह अब कह सकते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था में संतुलन बनेगा। वैश्विक मंदी के बावजूद जीडीपी ग्रोथ को पंख लगेंगे।
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