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यात्रियों की सुरक्षा हो सर्वोच्च प्राथमिकता, ट्रेन हादसों के कारण हर किसी के मन में कौंध

रेल में यात्रा कर रहे लाखों लोगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए जिससे यात्री सकुशल अपने गंतव्य स्थल तक पहुंच जाएं?

यात्रियों की सुरक्षा हो सर्वोच्च प्राथमिकता, ट्रेन हादसों के कारण हर किसी के मन में कौंध
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रेल में यात्रा कर रहे लाखों लोगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए जिससे यात्री सकुशल अपने गंतव्य स्थल तक पहुंच जाएं? यह सवाल बार-बार हो रहे ट्रेन हादसों के कारण हर किसी के मन में कौंध रहा है। शुक्रवार को देहरादून से वाराणसी जा रही जनता एक्सप्रेस रायबरेली के पास हादसे का शिकार गई जिसमें करीब 31 लोगों की मौत हो गई और सौ से ज्यादा लोग घायल हो गए। हादसे के असली कारणों का पता जांच के बाद ही चल पाएगा। हालांकि कहा जा रहा है कि ट्रेन को प्लेटफॉर्म नंबर वन पर रुकना था, लेकिन ड्राइवर ने सिग्नल नहीं देखी और ट्रेन गलत ट्रैक पर आगे बढ़ गई। इस वजह से डिब्बे एक-दूसरे के ऊपर चढ़ गए और पटरी से भी उतर गए। आज भारतीय रेलवे को सुरक्षित बनाना सरकार के लिए एक चुनौतीपूर्ण कार्य है।
बहरहाल, जब कभी भी इस तरह की दुर्घटनाएं होती हैं तो फौरी तौर पर पीड़ितों को राहत दी जानी चाहिए। उसमें कोई कमी न आए इसका जायजा लिया जाना चाहिए। सूचना का अधिकार कानून के तहत रेल मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार पिछले छह वर्षों के दौरान देश में औसतन हर छठे दिन में एक ट्रेन पटरी से उतरी या दुर्घटनाग्रस्त हुई। इस प्रकार वर्ष 2000 से लेकर के अब तक के आंकड़े ही एशिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क की खोखली परतें खोलने को काफी हैं। मुख्य समस्या यह है कि रेल मंत्रालय ने लंबे समय से उन हादसों से कोई सबक नहीं सीखा है। ऐसा क्यों हुआ? इसकी जवाबदेही पूर्व रेल मंत्रियों की कहीं ज्यादा बनती है। पूर्व की कुछ सरकारों ने रेलवे को राजनीतिक रूप से खूब दोहन किया, परंतु इसे सुरक्षित बनाने पर कोई खास ध्यान नहीं दिया गया। जिसकी वजह से एक तरफ रेलवे आर्थिक रूप से कंगाल हो गई तो दूसरी तरह इससे यात्रा जान को जोखिम में डालने के समान हो गया। हालांकि सत्ता में आने के बाद से ही नरेंद्र मोदी की सरकार बदहाल रेलवे को पटरी पर लाने और इसका कायाकल्प करने के प्रति गंभीर दिख रही है।
गत दिनों पेश किए गए रेल बजट में रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने इसका खाका भी पेश किया है। उन्होंने रेलवे के आधुनिकीकरण के लिए जहां आने वाले पांच वर्षों में इसमें लाखों करोड़ रुपये के निवेश का प्रावधान किया है वहीं इसे सुरक्षित बनाने के लिए काकोदकर समिति के सुझावों पर अमल करने की भी बात की है। उन्होंने बजट में पटरियों का रख-रखाव और ट्रेन के अंदर बदमाशों का कहर या फिर ट्रेनों का एक दूसरे से टकराने की घटना पर पूरी तरह से अंकुश लगाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हालांकि यह दीर्घकालीन उपाय हैं। इसके परिणाम दिखने में अभी समय लगेगा। भारतीय रेल प्रतिदिन लाखों लोगों को रोज एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाती है। इस प्रकार यह परिवहन का सबसे सस्ता और सुलभ साधन है। लिहाजा रेलवे में सुरक्षा की सर्वोत्तम व्यवस्था होनी चाहिए। हर किसी की जान कीमती होती है। बेवक्त और दूसरों की गलतियों या अपराधों के कारण जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिवारजनों को जिस सदमे का सामना करना पड़ता होगा उसकी हम सिर्फ कल्पना ही कर सकते हैं। लिहाजा रेल मंत्रालय को रेल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
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