Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

नाम की महिमा, गली उनके नाम पर चल रही थी....

मैंने कहा कि एक अभियान चलाकर पब्लिक को जौली छोले की बजाय शहीद का नाम लेने को प्रेरित किया जाए।

नाम की महिमा, गली उनके नाम पर चल रही थी....

इंडिया में नामों को लेकर बहुत गंभीरता दरशाई नहीं जाती। भद्र नाम था उस सड़क का-विद्यानिधि सर्वनाथ चंद्रालंकार मार्ग, पर सब उसे दऊआ पहलवान गली के नाम से ही जानते थे। दऊआ पहलवान स्थानीय गुंडे थे एक जमाने में, उनका नाम लेकर उस गली के शरीफ बाशिंदे पुलिस को डराते थे और नवोदित गुंडे दूसरे मुहल्ले के गुंडों को डराते थे।

व्‍यंग्‍य: ये चार लोग कौन हैं...

गली का आधिकारिक नाम यद्यपि चंद्रालंकारजी के नाम पर था, पर जन-जन में प्रसिद्धि दऊआ पहलवान की थी। गली उनके नाम पर चल रही थी। चंद्रालंकारजी के बहुत पढ़े-लिखे परिजन दऊआ पहलवान के खिलाफ भुनभुनाते हुए पाए जाते थे पर भुनभुनाने से कुछ होता तो, तो बहुत कुछ गली में क्या, इस देश में ही हो गया होता।
मुझे समझ में आया कि आधिकारिक तौर पर चाहे जो कर दो, होता वही है, जो दऊआ पहलवान की र्मजी होती है। गली की बात करो, तो बात देश तक पहुंच जाती है। क्षमा करें, गली-चौराहों के नाम पर लौटें। मेरे शहर में एक चौराहे का आधिकारिक नाम करगिल में शहीद हुए कैप्टन के नाम पर रखा गया है। जौली नामक बंदा इस चौराहे पर छोले बेचा करता है। जन-जन में यह चौराहा जौली छोले चौराहे के नाम से प्रसिद्ध है। करगिल का शहीद क्या करे।
पब्लिक छोले में ही जौली हुए जा रही है। मैंने उस इलाके के विधायक से शिकायत की। मैंने कहा कि एक अभियान चलाकर पब्लिक को जौली छोले की बजाय शहीद का नाम लेने को प्रेरित किया जाए। इस इलाके में आने-जाने वाले पत्रों में चौराहे का शहीद आधारित आधिकारिक नाम ही लिखा जाए। विधायक महोदय अपने असर का इस्तेमाल करें इस मामले में, तो छोलों की जगह शहीद का सम्मान कायदे से हो जाएगा। विधायकजी ने ऑफ दि रिकॉर्ड मुझे बताया कि शहीद कैप्टन उनकी जाति के नहीं हैं। शहीद की जाति के वोट उन विधायक को कभी नहीं मिलते, तो वह क्यों इस मसले पर रुचि लें। जैसा नाम चल रहा है, चलने दें-जौली छोले चौराहा।
मुझे समझ में आया कि शहीद भले ही किसी जाति के मान लिए जाएं, पर छोले को जातियों से ऊपर माना जाता है। भारतवर्ष में छोलों की अपील शहीद की अपील से ज्यादा है। ये भी समझ आया कि जाति के हितैषी विधायक ही स्वजातीय बंधु की रक्षा कर सकते हैं। वरना तो शहादत भी छोलों में घुलकर गायब हो जाती है। मागरें, गलियों के नामों में विकट घोटाले हैं, पर उससे क्या होता है। देश चलाने में कित्ते घोटाले हैं, पर देश चल रहा है ना। मेरा सुझाव ये है कि जाति, धर्म वगैरह के विवादों में सड़कों, गलियों के नाम ना फंसाए जाएं। सीधे सिंपल नाम रखे जायें, जैसे आयुर्वेद से नाम उधार ले लिए जाएं।
किसी सड़क का नाम रखा जाये-आंवला मार्ग। किसी सड़क का नाम रख दिया जाए-त्रिफला रोड। किसी गली का नाम रख दिया जाए-हर्र-बहेड़ा गली, पर नहीं, नहीं, विवाद प्रिय इस देश में कोई आयुर्वैदाचार्य उठकर कहेंगे कि नहीं आंवला गली के ठीक साथ वाली गली का नाम त्रिफला गली नहीं रखा जा सकता है, क्योंकि मेरी सम्मति में आंवला के साथ त्रिफला का सेवन वर्जित है। कोई आयुर्वैदाचार्य यूं भी कह सकते हैं कि इस गली का नाम सुबह आंवला गली रखा जाए पर संध्या के बाद इस गली का नाम त्रिफला गली रहे, क्योंकि आंवले का सेवन सुबह ठीक रहता है और त्रिफला का सेवन संध्याकाल के बाद उचित परिणाम देता है। हाय हाय।
खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलो करें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर-
Next Story
Top