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व्‍यंग्‍य: ताजमहल से वाल्टन महल, मसले नाम के हैं साहब नाम में सब कुछ रखा है

कारोबारीजी पूरे गांव में टॉयलेट बनवा दें, और पूरे गांव का नाम ही हो जाये टॉयलेटपुर।

व्‍यंग्‍य: ताजमहल से वाल्टन महल, मसले नाम के हैं साहब नाम में सब कुछ रखा है
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ब्रह्म कौन है, कहां रहता है-कुछ इस वजन का महत्वपूर्ण सवाल यह हो गया है कि स्पांसर कौन है और कहां रहता है। टीवी पर तमाम फिल्म पुरस्कारों के शो चलते हैं, तमाम स्टारों से ऊपर लटका रहता है, उस गुटके का ब्रांड, जो पूरे कार्यक्रम और पुरस्कारों को स्पांसर कर रहे हैं। पुरस्कार अभिनय के लिए भले ही दिया जा रहा हो, पर वह गुटके से ही आ रहा है। सो गुटके के महत्व को अभिनय में नकारा नहीं जा सकता। गुटका अभिनय को सम्मानित करेगा, तब ही तो अभिनय सम्मानित हो पायेगा। स्पांसर करनेवालों का बहुत महत्व है।

पुरस्कार मिलना मंगता है, कौन दे रहा है, उसका नाम क्या है, ऐसे सवालों में क्या रखा है। नाम में क्या रखा है, यह बात शेक्सपियर साहब बहुत पहले लिख गये। अब तो जी मसला बिलकुल अलग ही है। खबर है और काफी पुरानी खबर है कि यूपी के मुजफ्फरनगर के एक गांव शिवनगर का नाम गांववालों ने बदलकर स्नैपडील डाट काम नगर कर दिया है। स्नैपडील डाट काम ने इस गांव में पानी की व्यवस्था के लिए हैंडपंप लगवाये हैं।

मसले नाम के हैं साहब। नाम में सब कुछ रखा है। तू दाम दे, हम नाम दें। तू स्पांसर बने, हम तेरे नाम गांव कर देंगे। पर जी नाम में भी बहुत कुछ रखा है। ताजमहल का नाम अगर छज्जूमहल होता, तो ताजमहल ताजमहल ना होता ना। ताजमहल की मेंटेनेंस के पैसे कल को हमारी सरकारों के पास ना रहे, तो क्या इसे क्रिस्टी वाल्टन महल घोषित कर देंगे। क्रिस्टी जी बहुत अमीर महिला हैं, वो एक ताज क्या, पूरे देश के सारे महलों की मेंटेनेंस कर सकती हैं, तो क्या यूं होगा कि देश के सारे किले महल वाल्टन परिवार के सदस्यों के नाम पर रखे जायेंगे। कोयलपुर गांव झंडू-बामपुर हो सकता है। झंडू-बाम वाले अगर इस गांव में प्राथमिक चिकित्सा केंद्र खोल दें, तो कोयल झंडू हो सकती है। पर सौंदर्य बोध भी कुछ होता है जी।
खेड़ापुर गांव के एक कारोबारी हैं-संगमरमर के टॉयलेट का कारोबार है उनका। खेड़ापुर में भी टॉयलेट्स की समस्या है। कल को यूं हो सकता है कि कारोबारीजी पूरे गांव में टॉयलेट बनवा दें, और पूरे गांव का नाम ही हो जाये टॉयलेटपुर। खेड़ापुर यूं बहुत सुंदर नाम नहीं है पर टॉयलेटपुर..। इस गांव के लड़कों को कोई अपनी बेटियां ना देगा, हाय क्या बतायेंगे रिश्तेदारों को कि टॉयलेटपुर ब्याही है बेटी। कालोनियों के नाम तमाम ब्रांडों के बर्गरपुरम, पिज्जानगर टाइप्स हो जायेंगे। फिर महाराष्ट्र में अलग तरह की दिक्कतें हैं। वहां कई सरनेम्स गांवों के नाम के आधार पर होते हैं। नाशिक्कर सरनेम यानी नाशिक के रहने वाले। हाय हाय कैसे सरनेम्स होंगे, टॉयलेटपुरकर। पंजाब में भी गांव के नाम को नाम में एड करने का चलन है-रवींद्रपाल सिंह आलू की टिक्कीडाटकाम, ये पूरा नाम होगा।
मुझे तो और भी खतरनाक सीन दिखायी दे रहे हैं। नेहरू प्लेस की मेंटेनेंस किसी कंपनी के हाथ में चली जाये, बाजार चकाचक हो जाये, बहुत अच्छी मेंटेनेंस हो जाये और बाजार का नाम हो जाये, दाऊद प्लेस। आजादपुर सब्जी मंडी को करोड़ों मिल जायें, और इसका नया नाम हो जाये, स्मगलर इकबाल मिर्ची सब्जी मंडी। नेताओं सुधर जाओ, बिजली, पानी, खाने के सही इंतजाम करवा दो, सब जगह। वरना तुम्हारी कंस्टूटेंसी में तुम्हारे नामलेवा तक ना बचेंगे। कंस्टूटेंसी का नाम हो जायेगा-छज्जूमलजी शमशानवाले नगर। नगरवासियों ने शहर का नाम इसलिए बदल दिया कि छज्जूमलजी अंतिम संस्कार के लिए बढ़िया लकड़ी सस्ते रेटों में दिलवाते हैं। ये काम तमाम नगर निगम अब तक ना करवा पाये।
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