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व्‍यंग्‍य: राहजनों का रजिस्ट्रेशन, जीवन और मृत्यु की पंजीकरण उर्फ रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है

इंडिया में जो काम पहले होने चाहिए, वह बाद में होते हैं।

व्‍यंग्‍य: राहजनों का रजिस्ट्रेशन, जीवन और मृत्यु की पंजीकरण उर्फ रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है

मरने से जीने तक बंदा या बंदी रजिस्ट्रेशन में उलझा रहता है, जन्म का रजिस्ट्रेशन और मौत का रजिस्ट्रेशन। निम्नलिखित निबंध उस छात्र की कॉपी से लिया गया है, जिसे निबंध प्रतियोगिता में पहला स्थान मिला है। निबंध का विषय था-रजिस्ट्रेशन। रजिस्ट्रेशन की हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका है। जीवन और मृत्यु की पंजीकरण उर्फ रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। ऐसा तमाम इश्तिहारों में बताया जाता है। मौत का रजिस्ट्रेशन कितना जरूरी है, यह उन वारिसों से पूछिए, जो अपने अमीर बाप की संपत्ति के त्वरित बंटवारे में लगते हैं। मौत के रजिस्ट्रेशन के बाद जब तक मौत का सर्टिफिकेट ना मिल जाए, तब तक संपत्ति का आधिकारिक बंटवारा संभव नहीं है। रजिस्ट्रेशन किसी काम के पक्के होने का सबूत है। कई ऐसे जिंदा घूम रहे हैं, जिनकी मौत का रजिस्ट्रेशन हो लिया है, पर वो मरे नहीं हैं। इनकी संपत्ति पर कब्जे के ख्वाहिशमंदों ने इन्हें मारकर इनकी संपत्ति को बांटने के इंतजाम कर लिए हैं। या यूं कहा जा सकता है कि इनकी मौत का सर्टिफिकेट पहले बना लिया है, इन्हें मरने में देरी हो गई। काम में ऐसी चुस्ती सरकारी काम-काज में कम ही देखने में आती है पर नोट मिलने का जुगाड़ हो तो सरकारी तंत्र भागने लगता है।

अगर कोई रकम खर्च करने को तैयार हो, कुतुबमीनार की रजिस्ट्री अपने नाम करवा सकता है। बंटी और बबली नामक पिक्चर में ताजमहल की रजिस्ट्री तो एक पार्टी के नाम दिखाई गई है। रजिस्ट्रेशन का मतलब है गारंटी, सबूत। किस आइटम का रजिस्ट्रेशन कब हो, इस बात का फैसला कायदे से तब होना चाहिए, जब वह शुरुआत में अस्तित्व में आए। जैसे दिल्ली में ई-रिक्शे का उदाहरण लें। यूं ई-रिक्शे में ऑटो-रिक्शे से ज्यादा सवारी लद लेती हैं पर ऑटो-रिक्शे का रजिस्ट्रेशन जरूरी है, ई-रिक्शे का नहीं। अब हाईकोर्ट ने ई-रिक्शे की धरपकड़ की है। अब तय होगा कि ई-रिक्शे का रजिस्ट्रेशन होना चाहिए या नहीं। इंडिया में जो काम पहले होने चाहिए, वह बाद में होते हैं। रजिस्ट्रेशन के बगैर ही ई-रिक्शे चल निकलते हैं। तेज, चुस्त काम-काज और किसे कहते हैं। वह तो अच्छा हुआ कि ई-रिक्शे की धरपकड़ हो गई, वरना कुछ दिनों बाद इसमें पंख लगाकर उन्हें जमीन से पचास फुट ऊपर उड़ाया जा सकता था। हवाई-जहाज का लाइसेंस लेने को अगर इनसे कहा जाता तो ई-रिक्शावाले कहते हम उड़ कहां रहे हैं, हम तो सड़क पर ही चल रहे हैं, बस सड़क से सौ फुट ऊपर ही तो चल रहे हैं। तर्क है साहब। रजिस्ट्रेशन इस मुल्क के कई बड़े फर्जीवाड़ों में से एक है।
एक करोड़ की प्रॉपर्टी का रजिस्ट्री/रजिस्ट्रेशन बीस लाख रुपए का कराया जाता है। इस मुल्क की संपत्ति का सही आकलन अगर रजिस्ट्री की कीमत के आधार पर किया जाएगा, तो यह देश युगांडा के आसपास का गरीब बैठेगा, जबकि इन संपत्तियों के मालिकों के लिए यह देश कम से कम दुबई जितना अमीर है। रजिस्ट्रेशन के कई इस्तेमाल संभव हैं। जैसे पुलिस को हर इलाके में राहजनों, चेन-स्नैचरों, जेबकतरों का रजिस्ट्रेशन शुरू कर देना चाहिए। जैसे गांधी नगर में सौ राहजनों का रजिस्ट्रेशन करके उन्हें रजिस्टर्ड राहजन का रजिस्ट्रेशन प्रमाण-पत्र दे दिया जाए। गांधी नगर की जनता को बता दिया जाए कि देखिए आपको लुटना तो है ही, रजिस्टर्ड राहजन हर महीने इतनी रकम लूटेंगे आपसे। लुटने से पहले आप रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट देखकर रजिस्टर्ड राहजनों से ही लुटें। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि सौ रजिस्टर्ड राहजन अपने इलाके में दूसरे नए अन-अथॉराइज्ड राहजनों को ना आने देंगे। राहजनों में आपस में कंपटीशन हो जाएगा। एक राहजन अपने इलाके में बाकी के रजिस्टर्ड 99 राहजनों को ही काम करने देगा। मामला सौ में सिमट जाएगा। नए राहजन कम लूटने में राजी हो जाएं तो नए राहजनों को रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट दे दिया जाए। जो कम लूटे, वही बेहतर, नेता और राहजन दोनों पर यह बात लागू होती है।
रजिस्ट्रेशन के ऐसे सार्थक और नए प्रयोगों से कई समस्याएं निपटाई जा सकती हैं। टमाटरों, आलुओं की महंगाई से निपटने के लिए जरूरी कर दिया जाए कि हर टमाटर का रजिस्ट्रेशन होगा। बिना रजिस्ट्रेशन के कोई भी टमाटर ना खा पाएगा। फॉर्म भरो, टमाटर पर चिप्पी चिपकाओ एचपी 123 यानी हिमाचल प्रदेश से आया 123वां टमाटर है यह। टमाटरों के रजिस्ट्रेशन की बात भर से इसकी मांग गिर जाएगी, टमाटर सस्ता हो लेगा। पब्लिक दहशत में आ जाएगी कि टमाटर का रजिस्ट्रेशन बगैर दलाल और बिचौलियों के ना हो पाएगा। इस तरह से हम रजिस्ट्रेशन से देश की तमाम तरह की समस्याओं को निपटा सकते हैं।
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