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व्‍यंग्‍य: चलो, नये साल की टेंशन तो गई!

सुबह सुबह ठंड इतनी है कि जन्म पत्री बेचारी ठंड में बिस्तर में दुबकी होगी।

व्‍यंग्‍य: चलो, नये साल की टेंशन तो गई!

इधर नये साल ने फिर धरा पर दस्तक दी तो मैंने पंडित जी के ज्योतिष कार्यालय का दरवाजा नये साल द्वारा मेरा दरवाजा खटखटाने से पहले खटाखटाया। उनके दरवाजे पर दस्तक देते वे जैसे भीतर थे वैसे ही अपने यजमान की ओर दौड़े-दौड़े आए और मुझे अपने द्वार पर पा गदगद होते बोले, ‘आओ यजमान! नये साल से पहले तुम्हारा स्वागत है। लगता है अबके फिर इस साल भी मैं चांदी बटोरूंगा।

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मेरे द्वार पर नये साल से पहले तुमने थाप दी तो तय है अबके साल भर यजमानों से मेरा ज्योतिष कार्यालय खचाखच भरा रहेगा। असल में मुझे अपने द्वार पर भगवान को पा उतनी खुशी नहीं होती जितनी यजमान को पा होती है। मेरे प्राण भगवान में नहीं, मेरे यजमानों में ही बसते हैं। कहो, नये साल से पहले ही मेरे दर पर कैसे आना हुआ?’

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‘पंडित जी, असल में आपके पास अपनी जन्म पत्री दिखाने आया था कि मेरा आने वाला साल कैसा रहेगा? मैं चाहता हूं कि पहले ही दिन सारे साल का अपना हाल जान, बुरे दिन का आप से उपाय जान उसका निदान कर मैं साल भर की टेंशन से मुक्त हो जाऊं!’ कह मैंने जेब से फट चुकी जन्म पत्री निकालनी शुरू की।
‘वैसे तो यजमान गृहस्थी की चक्की में पिसते हर एक तुम्हारे जैसे का हर नया साल हमेशा एक सा ही रहता है। साल बदलने से तुम जैसों की स्थितियों में कोई विशेष बदलाव नहीं आता पर अगर ग्रहों के हिसाब से मुझ पर विश्वास कर कुछ करते रहो तो..। अच्छा तो कौन सी राशि है तुम्हारी?’
‘अब तो शाम को खाया तक याद नहीं रहता सो पंडित जी जन्मपत्री लाया हूं।’
‘अरे सुबह सुबह ठंड इतनी है कि जन्म पत्री बेचारी ठंड में बिस्तर में दुबकी होगी। बेचारी की क्यों नींद खराब करनी। तुम्हें तो अपनी राशि का पता होगा ही?’ ‘जन्म राशि या लग्न राशि?’ मैं कुछ याद करने लगा पर याद ही नहीं आ रही थी राशि। ‘कोई भी बता दो।
राशि तो राशि होती है बस, अपनी नहीं तो अपनी बीवी की ही राशि बता दो,’ सुन मैं चौंका, तो वे बोले, ‘अरे पगले, इसमें चौंकने की क्या बात है? अपने शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि पत्नी अद्र्घांगिनी होती है। अब तुम समझो या न! ये अलग बात है। इसलिए उसकी राशि भी चलेगी।’ ‘पर पंडित जी, टेंशन से तो मैं अपनी मुक्ति चाहता हूं। उसको तो कोई टेंशन होती ही नहीं। वह तो बस टेंशन ही देती है। कमबख्त घर मैं चलाता हूं, वह तो केवल मुझे चलाती है,’
मैंने कहा। तो उनकी आंखों में पता नहीं क्यों आंसू आ गए। वे मेरी पीठ थपथपाने लगे, तो मैंने रुंधे गले कहा, ‘पंडित जी, अब आपके सिवाय मेरा और सहारा है ही कौन? अब तो पत्नी भी मेरे बुरे दिन देख मुझसे अपना हाथ पीछे खींचने लगी है,’ कह मैं उनके चरणों में गिरा।
तो उन्होंने नये साल के कष्ट निवारण हेतु पहले से ही राशियों के हिसाब से अपनी चारपाई के नीचे फोटोस्टेट कर जो उपाय तैयार रखे थे उनमें से मेरी नाम राशि के हिसाब का उपाय छांट नये साल के पहले पांच दिन की विशेष ऑफर के रूप में बीस प्रतिशत छूट सहित चार सौ में मुझे थमाया।
तो मैंने जेब से चार सौ जाने के बाद भी राहत की सांस ली और महसूस किया कि अबके अपना कुछ चैन से कटे या न पर आने वाला साल जरूर भयहीन कटेगा। मुझे लगा कि ये उपाय कर मैं अब नये साल में कुछ करूं या न करूं पर मौज जरूर करूंगा!
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