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व्‍यंग्‍य: एक आप गोद ले लो बाबा! तो बाबा का आदेश है बच्चे पैदा कर देश के विकास में हाथ बंटाओ

अब देशवासियों को कुछ करना हो या न पर पॉपुलेशन कंट्रोल करना ही होगा।

व्‍यंग्‍य: एक आप गोद ले लो बाबा! तो बाबा का आदेश है बच्चे पैदा कर देश के विकास में हाथ बंटाओ

कड़ाके की सर्दी में अपने हाथ-पांव इकट्ठा किए मुर्गा बन चार कंबलों में दुबका गर्मी और नींद में से किसी एक के आने का इंतजार कर रहा था पर कमबख्त दोनों में से एक भी नहीं आ रहा था। जब दोनों में से किसी एक का इंतजार करते-करते थक गया तो जबरदस्ती अपनी आंखें बंद कर गरमाहट में अपने को सोया हुआ फील करने की कोशिश करने लगा कि तभी सपने में बाबा प्रगट हुए तो मैं भौंचक रह गया। मेरे सपने में बाबा! सच कहूं, एक तो विवाह के बाद मुझे आजतक नींद नहीं आई और जो गलती से थोड़ा बहुत आई भी तो सपने में टमाटर, आलू ,प्याज और बच्चों के फीस काउंटर के अतिरिक्त दूसरा कुछ नहीं दिखा। होंगे जो होंगे नसीब वाले, जिन्हें घोड़े बेचकर नींद आती होगी।

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इधर तो अपनी आंखों में नींद सुरखाब के पर सी हो गई है। सपने में पहली बार किसी महापुरुष को देखा तो अपनी पीठ खुदेही ठोकते पूछा, बाबा, आप कौन मेरे शुभचिंतक?’ तो वे निर्विकार मुस्कराते बोले, ‘सरकार हूं बरखुरदार। और कौन? आज हमारे दर्शन पाकर तुम कृतार्थ हुए। छोड़ो ये चुनावी कंबल और जागो! हम तुम्हें तुम्हारी बदनसीबी से जगाने आए हैं। नींद न आने के बाद भी कब तक सोने का नाटक करते हुए सोए हुए रहोगे?

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’ ‘बाबा, विवाह के बाद से परेशानी में आज तक सोया ही कहां जो आप मुझे जगाने आए हो!’ कह मैंने चुनावी कंबलों में बड़ी मुश्किल से आधा डिग्री सेंटीग्रेड बनी गर्मी का परमानंद लेते कहा। ‘तो कहो, कहां-कहां से परेशान हो? आज हम कुछ कर पाए या नहीं पर तुम्हारी हर परेशानी को जड़ से मिटाकर रहेंगे, कह वे इधर-उधर हवा में हाथ हिलाने लगे तो मैं भीतर ही भीतर अपने को परेशानियों से मुक्त सा फील करने लगा। जय हो बाबा की!

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‘दिल दिमाग दोनों लेवल पर परेशान हूं बाबा।’ ‘अच्छा तो कहो, कितने बच्चे हैं तुम्हारे? उन्होंने एकदम अटपटा सा सवाल किया तो पहले तो मैं सोचा कि देश की परेशानी का मतलब बाबा समझ गए हैं। अब देशवासियों को कुछ करना हो या न पर पॉपुलेशन कंट्रोल करना ही होगा। इसके बिना गुजारा नहीं। तो मैंने कंबलों के भीतर से ही हाथ जोड़े कहा, ‘बाबा! कहने को तो दो हैं पर उनके खर्चे देखकर तो लगता है कि मैंने विवाह कर गलती कर ली। क्या आप उन्हें पढ़ने के लिए स्कॉलरशिप की कोई धांसू स्कीम लेकर आए हैं बाबा? सच कहूं बाबा, आज के दौर में एक बच्चा भी पढ़ाना पहाड़ हो गया है।

स्कूल वालों के नखरे हैं कि.. बच्चा बाद में मां के पेट में आता है तो स्कूल में उसका रजिस्ट्रेशन पहले करवाकर रखना पड़ रहा है। अगर उसके पैदा होने के बाद स्कूल में गए तो जनाब को एडमिशन कहां से मिले?’ मैंने कहा तो वे सामने दीवार पर आड़ी तिरछी मेरे विवाह के वक्त की तस्वीर को देख बड़ी देर तक मुस्कराते रहे। उस तस्वीर को देख जब उनका मन खट्टा हो गया तो लंबी आह भर बोले, ‘तो बाबा का आदेश है कि दो बच्चे और पैदा कर देश के विकास में हाथ बंटाओ और इस देश के आदर्श नागरिक हो जाओ!’ ‘अरे बाबा! यहां दो ही नहीं संभाले जा रहे और आप कहते हो कि..।

आप क्या जानो, आज के दौर में बच्चे पढ़ाना-लिखाना, ब्याहना कितना मुश्किल है? मैं तो चाहता हूं कि एक आप गोद ले लेते तो आप का भी भला हो जाता और मुझे भी तनिक जीने का मौका मिल जाता,’ मैंने अपना रोना रोके हाथ जोड़े कहा तो बाबा का कहीं पता नहीं। देखी पत्नी की हिम्मत, रात के बारह बजे भी बिस्तर में सोई वैसे ही बड़बड़ा रही थी, जैसे सोकर उठने के एकदम बाद बड़बड़ाती है।

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