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टीम इंडिया का हारना, हारते-हारते जीत का लुत्फ उठाने का अवसर मिल जाता

वह आते तो मानो पूरे मुल्क के लिए सेंटा क्लाज जी आते। बिना ठीक से खेले ही जीत का तोहफा आता।

टीम इंडिया का हारना, हारते-हारते जीत का लुत्फ उठाने का अवसर मिल जाता

टीम इंडिया हार गई। करोड़ों लोगों की उम्मीद हार गई। साइना नेहवाल वल्र्ड चैंपियन बन गईं, यह बात लोगों को ठीक से पता भी नहीं लगी। वह कड़ी मेहनत और साधना के बल पर शिखर पर पहुंची पर इससे क्या? बैडमिंटन में जीतना भी कोई जीतना होता है भला? जीत हार तो सिर्फ क्रिकेट में होती है। टीम इंडिया की जीत को लेकर किये गए तमाम तरह के पूजा अनुष्ठान और टोने टोटके तो परास्त हुए। कैप्टेन कूल की ठंडाई किसी काम न आई।

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वह रन आउट हुए। विराट का लव गुडलक साबित न हो सका। रैना का गांव और होने वाली ससुराल हक्के बक्के रह गए। और तो और भविष्यवक्ता मछली गलत साबित हो गई। विभिन्न बहानों के तहत ऑफिसों से ली गई कैजुअल लीव बेकार चली गई। लोगों ने गुस्से में भर कर टीम और भविष्य बांचने वाली मछली को कोसा-डूब मरो चुल्लू भर पानी में। मछली यह सुन खिलखिला कर हंसी, बोली-बासी मुहावरा है यह। मेरे लिए कुछ मौलिक सोचें श्रीमन।

चुल्लू भर पानी को ‘आप’ के लिए संभाल कर रखें। उन्हें इसकी जरूरत बार-बार पड़नी है। टीम इण्डिया क्या हारी कोल्ड ड्रिंक के ब्रांड हार गए। मौका हाथ से निकल गया। इन्वर्टर की बैटरी असमय डिस्चार्ज हो गई। रातों रात तंदुरुस्त करने वाले करिश्माई पाउडर व्यर्थ हो गया।

पूनम पाण्डेय की देह के हाथ से उन्मुक्त हो कर सार्वजनिक होने का मौका निकल गया। तली हुई भजिया ग्राहक को तकती रह गईं। अंडे भगौने के पानी में खदबदाते रह गए। आइसक्यूब और प्लास्टिक के खाली गिलासों की मांग न के बराबर रही। अलबत्ता दारू की बिक्री बढ़ी। गम हो या खुशी मयकश सदा समतावादी रहते हैं। मधुशालाएं हर हाल में आबाद रहती हैं। बस फर्क इतना होता है कि पीने वाले जब खुश होते हैं तो पीते हुए जाम छलकाते हैं और गमजदा होते हैं तो चुपचाप बिना किसी से कुछ कहे सुने उसे उदरस्थ करते जाते हैं।

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टीम इंडिया की हार पर लोग खिलाड़ियों की खेल प्रतिभा पर कम मौसम विशेषज्ञों की उलटबांसी पर अधिक नाराज हैं। उन्होंने कह रखा था कि सेमी फाइनल के दिन बारिश आ सकती है। जब उन्होंने कहा था तब बारिश आई क्यों नहीं? इसमें किसकी साजिश रही? बारिश आती तो डकवर्थ लुईस जी आते। वह आते तो मानो पूरे मुल्क के लिए सेंटा क्लाज जी आते। बिना ठीक से खेले ही जीत का तोहफा आता। हारते-हारते जीत का लुत्फ उठाने का अवसर मिल जाता। बिना कुछ किये धरे जो मिलता है उसका स्वाद अलौकिक होता है। इसी से चमत्कार प्रकट होता है। आस्था बलवती होती है।
टीम इंडिया के हारने से भिलेज के मुखिया से लेकर आप वाले नेता तक और नुक्कड़ वाले पनवाड़ी से लेकर रिवॉल्विंग चेयर पर पसर कर अफसरी दिखाने वाले बड़के बाबू तक सभी आहत हैं। टीम जीतती तो आप वालों को तमाम मारधाड़ के बावजूद इतना कवरेज न मिल पाता। किसी का कुछ खोता है तभी दूसरे को कुछ मिलता है।
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