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व्‍यंग्‍य: सम्मान या अपमान, शर्मीले पोज में मुस्कुराते हुए दिखना कतई-कतई मूर्खतापूर्ण काम है

सम्मान झेलना हरेक के लिए आसान काम नहीं है, एक हद तक निर्लज्ज होना पड़ता है।

व्‍यंग्‍य: सम्मान या अपमान, शर्मीले पोज में मुस्कुराते हुए दिखना कतई-कतई मूर्खतापूर्ण काम है
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अपमान झेलना मुश्किल काम है (अगर आप नेता ना हों, तो) पर साहब सम्मान झेलना भी आसान काम नहीं है। आप कल्पना करें कि आपका सम्मान समारोह हो रहा हो, लेक्चर चल रहे हों कि वाह साहब क्या आदमी हैं। क्या शानदार रचनाकार हैं। सोचिये अगर आप इससे सहमत होने लगें समारोह में कि जी हां, मैं बहुत बढ़िया आदमी हूं। जी आप ठीक कहते हैं कि मैं शानदार रचनाकार हूं। अगर कोई अपनी तारीफ से सहमत होने लगे, तो समझिये कि वह बदतमीज आदमी है। वो समझे या नहीं कि पब्लिक समझने लगती है कि कतई छिछोरा और बदतमीज बंदा है, खुद अपनी ही तारीफ से बढ़-चढ़ कर सहमत हो रहा है।

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तो बंदा क्या करे, अपनी तारीफ से असहमत हो जाये-ना मैं कतई बढ़िया आदमी नहीं हूं। ना मैं कतई शानदार रचनाकार नहीं हूं, अपने सम्मान समारोह में जाकर कोई ऐसे करे, तो उसे कतई बेवकूफ माना जायेगा। अबे तुम्हें पता था कि तुम अपने सम्मान समारोह में आ रहे हो और आकर ऐसी बातें कर रहे हो, तो बेवकूफ तो माने जाओगे।
तीसरा रास्ता है कि ग्रामीण नव-वधू की तरह धीमे-धीमे शर्मीली मुस्कुराहट चेहरे पर चेंपे रहें। वैसे अब तो ग्रामीण वधुएं भी वैसी शर्मीली नहीं रहीं। सम्मान झेलना भी टेढ़ा काम है साहब। शर्मीले पोज में मुस्कुराते हुए दिखना कतई-कतई मूर्खतापूर्ण काम है। सम्मान झेलना हरेक के लिए आसान काम नहीं है, एक हद तक निर्लज्ज होना पड़ता है। ये बात कहो, तो लोग कह उठते हैं अगर लज्जा होती तुममें, तो इतना और ऐसा काहे लिखते।
सम्मान से डरने लगता हूं मैं और अपने सम्मान-समारोह के इच्छुकों से कह देता हूं कि आप मेरा सम्मान करते हैं अच्छी बात है, पर इस बात को कैश के जरिये अभिव्यक्त कीजिये। चेक या कैश लिफाफे में बंद करके मुझे दे जाइये, चुपके से। दान की तरह सम्मान को भी गुप्त रखिये। हर साल करते रहिए सम्मान। अभी कल दिल्ली में एक सम्मान समारोह में मुझे सम्मान के तौर पर एक शाल गिफ्ट किया गया, गिफ्टिंग की फोटू अखबार में छपी। फोटू में सम्मान करनेवाली संस्था के अध्यक्ष, महासचिव, उपसचिव, ट्रेजरार, वित्तीय अधिकारी, प्रचार सचिव, एक शाल और मैं था। कुल फोटू में मेरा हिस्सा दशमलव 10 प्रतिशत था। सम्मानक संस्था के अधिकारी और शाल सारी फोटू घेर गये।
मेरी मां ने डपटा मुझे-ये तेरे सम्मान का फोटू या अपमान का। एक शाल तक तुझे छह लोग मिलकर देते हैं। किसी लेडी किट्टी पार्टी के किसी मेंबर के परिवार में शादी होती है, तो हर लेडी 1000 रुपये देती है, एक शानदार गिफ्ट का डौल बन जाता है। ऐसी हालत तेरे सम्मान की हो गयी, छह लोगों ने पचास -पचास रुपए शाल के इकट्ठे किये और तुझे एक शाल दे दिया। अगली बार तीन सौ रुपए मुझसे ले लेना शाल के, खबरदार आगे से ऐसे सम्मान की फोटू किसी अखबार में दिखी तो।
अपने सम्मान की फोटू मां को दिखाने में डर लगे, ऐसे सम्मान से डरना चाहिए साहब। सम्मान-पुरस्कार विषयक शोध से पता चला कि सम्मान दूर के लोग ही करते हैं, दूर के ही कर सकते हैं, क्योंकि पास के करीब लोग बहुत करीब से सब कुछ जानते हैं। जैसा भी हो, गैरों से शालवाला सम्मान अर्जित करके खुश रहना चाहिए। अपने लोग सम्मान पर उतर आयें, तो आदमी को बेइज्जत होते देर नहीं लगती है।
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