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पढिए व्‍यंग्‍य: कोहरा, भूत, चोर व प्रेमी

प्रेमिका के पिता और भाइयों को प्रेमी की उपस्थिति का पता नहीं चलता और वह ठुकाई से बच जाता है।

पढिए व्‍यंग्‍य: कोहरा, भूत, चोर व प्रेमी

कोहरा मचा हुआ है, विकट। ना, बात सिर्फ राजनीतिक संदभरें में नहीं हो रही है। राजनीति के अलावा और भी काम है साहब जिंदगी में। कोहरे के सामाजिक आयाम होते हैं, कोहरे के कूटनीतिक आयाम होते हैं। कोहरे के भूतिया आयाम होते हैं। कोहरा सिर्फ कोहरा नहीं होता, कोहरा बहुत कुछ होता है। कोहरे से बढ़कर बहुत कुछ होता है। बहुत-बहुत ही कुछ होता है। कोहरे का गहरा सामाजिक, राजनीतिक, कूटनीतिक, रक्षात्मक और सांस्कृतिक महत्व है। जैसा कि विज्ञ लोग जानते हैं कि कोहरा प्रेमियों, भूतों और चोरों के लिए बहुत ही उपयुक्त स्थिति पेश करता है। प्रेमियों के लिए कोहरे का महत्व यह है कि दस गज दूर खड़े प्रेमिका के पिता और भाइयों को प्रेमी की उपस्थिति का पता नहीं चलता और वह ठुकाई से बच जाता है और खर्च से भी। जिन गतिविधियों के लिए उस प्रेमिका को किसी सिनेमा हॉल में ले जाकर मोटी रकम खर्च करनी पड़ती, थैक्स टू कोहरा, वह मुहल्ले की मुहल्ले में सस्ते में संपन्न हो जाती हैं।

प्रेम की गतिविधियों में कोहरा इस तरह से अपना सामाजिक योगदान करता है। चोरों के लिए तो कोहरा ही उत्तम माहौल पेश करता है। बगल के कमरे से चोरी करके निकलो, तो बगल के कमरे वाले नहीं देख सकें। कोहरे के दिनों में पब्लिक अपने घर आकर जल्दी सो जाती है, जो चोरी के लिहाज से खासी मुफीद स्थिति है। बस दिक्कत यही है कि कोहरे में कि चोर को कोहरे में चोरी करने जाना पड़ता है। हो सकता है कि रामजी के घर चोरी करने जाना हो, पर शामजी के घर चला जाये। जहां हो सकता है कि माल ज्यादा मिल जाये, या नहीं मिले। सो इतनी टेंशन तो रहती है, पर इतना टेंशन भी चोर नहीं लेगा, तो आलसी हो जायेगा और बिना मेहनत के ही खाने की आदत पड़ जायेगी। अच्छा-खासा कर्मठ चोर ऐसी सूरत में नेता की अवस्था तक पतित हो सकता है। सो चोर कोहरे को एकदम से नहीं कोसते।
भूत तो जैसा कि सभी जानते हैं कि कोहरे में ही निकलते हैं। तमाम टीवी चैनल जो अब भूत और अपराधियों के बूते ही चल रहे हैं, गर्मियों में भूत की स्टोरी दिखाते हैं, तो उसमें भी कोहरा डाल देते हैं। गर्मी में कोहरा, कोहरे में भूत, भूत में टीआरपी। कोहरे और भूत का साथ कुछ इसी तरह का है, जैसे डिफेंस डील में कमीशन कट का। बिना कोहरे के भूत की कल्पना करें, कैसे लगेगा। कुछ जमेगा नहीं, बल्कि अब तो हम कोहरामय भूत के इतने आदी हो गये हैं कि कोई असली भूत बगैर कोहरे के निकल आये, तो उसपे हंसने लगेंगे। अबे तेरे आने के साथ कोहरा नहीं आया, तो तू भूत कैसा। कोहरे में भूतों को चाहिए कि चोरों और प्रेमियों को डरायें नहीं। ये भी अपने प्रोफेशनल काम पर निकलते हैं, उन्हें भी उनका काम करने दिया जाना चाहिए।
कोहरे के राजनीतिक इस्तेमाल भी संभव हैं। उदाहरण के लिए भारत और पाकिस्तान कोहरे का इस्तेमाल करके युद्ध को हमेशा के लिए टाल सकते हैं, बस दोनों के बीच एक संधि हो कि दोनों की वायुसेनाओं में कॉर्मशियल एयरलाइंस के पायलट, रेल और बस के ड्राइवर बतौर पायलट रखे जायेंगे। फिर होगा यूं कि दोनों वायुसेनाओं के चीफ जैसे ही अटैक का ऑर्डर देंगे-दोनों साइड के पायलट कह देंगे कहां जायेंगे साहब, कोहरा पड़ रहा है। फ्लाइट कैंसल। कोहरे में कहां उड़वाओगे फ्लाइट। फ्लाइट जायेगी ही नहीं, तो अटैक कैसे होगा। जब तक कोहरा खुलेगा, तब तक मामला सैटल हो चुकेगा। तो इस तरह से हम देख सकते हैं कि अंतरराष्ट्रीय, कूटनीतिक, रणनीतिक, रक्षात्मक संबंधों में भी कोहरा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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