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भ्रष्टाचारी एक हों!

जहां काम सीधे-सीधे नहीं हो पाता भ्रष्टाचारी उसे दो मिनट में सुविधा शुल्क के साथ कर डालता है।

भ्रष्टाचारी एक हों!

न, न, मैं इस युक्ति से कतई सहमत नहीं कि भ्रष्टाचार व्यवस्था की दीमक है! अरे, भ्रष्टाचार तो व्यवस्था को हर प्रकार के अतिरिक्त बोझ से बचाकर रखता है! जहां काम सीधे-सीधे नहीं हो पाता भ्रष्टाचारी उसे दो मिनट में सुविधा शुल्क के साथ कर डालता है। इससे अतिरिक्त समय और र्शम दोनों का बचाव होता है! मैं तो सात साल की सजा सोच-सोचकर ही हैरान व परेशान हूं। ये तो ऐसे हो गया, जैसे भ्रष्टाचारी ने किसी को अगवा कर डाला हो। किसी का माल-पानी लूट लिया हो।

भले ही आप मुझसे सहमत न हों, लेकिन मुझे यह कहने में रत्तीभर हर्ज नहीं कि भ्रष्टाचारी धरती का सबसे शांत प्राणी है। उसे केवल अपने काम (भ्रष्टाचार) से मतलब रहता है। दुनिया कहां जा रही है, कौन किसके बारे में क्या कह रहा है, उसे नहीं मतलब। न वो किसी को छेड़ता है न गलियाता। फिर भी, सरकार, बुद्धिजीवी, आम आदमी उसके पीछे हाथ-पैर धोकर पड़े रहते हैं दरअसल, कानून बनाने वालों को इस बात का एहसास ही नहीं कि भ्रष्टाचार करने में कित्ती मेहनत और अकल की जरूरत होती है!

साथ-साथ, जान और इज्जत का भी कित्ता जोखिम रहता है। लोग ऐसा समझते हैं कि ऊपरी या अंडर द टेबल कमाई बहुत आसान होती है, अमां करके देखिए कभी, नानी तो क्या पुरखे तक याद आ जाएंगे, मेरा दावा है! मुद्दे की बात यह है कि भ्रष्टाचार के नाम पर भ्रष्टाचारियों का उत्पीड़न निरंतर जारी है! बहरहाल, अब समय आ गया है कि देश भर के भ्रष्टाचारी एक हों! सरकार के खिलाफ आंदोलनरत हों!

ऐसे कानून अगर यों ही बनते रहे तो एक दिन भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा! भ्रष्टाचार की हिफाजत के लिए भ्रष्टाचारी संघर्ष करें, मैं उनके हमेशा साथ हूं!इधर, जब से भ्रष्टाचार पर सात साल की सजा होने का कानून बनने की खबर आई है, तब से मेरा दिल बैठे चला जा रहा है। दिल में यकायक भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के प्रति सहानुभूति दोगुनी हो गई है! जी तो कर रहा है कि अभी इस जालिम कानून को निशाने पर लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ आरटीआई डाल दूं, लेकिन प्रधानमंत्रीजी की स्वच्छ इमेज का ख्याल करते हुए कदम पीछे खींच लेता हूं। मगर फिर भी इस कानून के विरूद्ध अपने मन की बात कहूंगा तो जरूर। कहने में जाता ही क्या है।
मैं केंद्र सरकार के इस भ्रष्टाचार निरोधक कानून का खुले दिल से विरोध करता हूं! और पूछना चाहता हूं कि आखिर देश के भ्रष्टाचारियों ने ऐसा कौन-सा महा-पाप कर दिया है, जो उन्हें भ्रष्टाचार की खातिर सात साल जेल में रहना पड़ेगा? क्या खाने-पीने-कमाने का हक केवल नेताओं-अफसरों-उद्योगपतियों को ही है, भ्रष्टाचारियों को नहीं? नेता चाहे कित्ते ही करोड़ का घपला-घोटाला कर दे फिर भी रहता वो नेता ही है, लेकिन अगर भ्रष्टाचारी दो पैसे की ऊपरी कमाई कर ले तो लोग बाग तुरंत उस पर तरह-तरह के आरोप लगाने बैठ जाते हैं!
उसे व्यवस्था और देश पर कलंक बताते हैं। जबकि यह आज तक का रिकॉर्ड है कि कभी किसी भ्रष्टाचारी ने किसी नेता-अफसर-उद्योगपति पर घूसखोरी का इल्जाम नहीं लगाया है। न ही उन्हें खुलेआम गरियाया है! भ्रष्टाचारी हर किसी की भावनाओं की कद्र करना बहुत अच्छे से जानता है। जित्ता नेता देश में विकास के प्रति तत्पर रहता है, उत्ता ही भ्रष्टाचारी भी। अपने पेट या अपने परिवार की खातिर दो पैसों की ऊपरी कमाई कोई अपराध तो नहीं?
न, न, मैं इस युक्ति से कतई सहमत नहीं कि भ्रष्टाचार व्यवस्था की दीमक है! अरे, भ्रष्टाचार तो व्यवस्था को हर प्रकार के अतिरिक्त बोझ से बचाकर रखता है! जहां काम सीधे-सीधे नहीं हो पाता भ्रष्टाचारी उसे दो मिनट में सुविधा शुल्क के साथ कर डालता है। इससे अतिरिक्त समय और र्शम दोनों का बचाव होता है! मैं तो सात साल की सजा सोच-सोचकर ही हैरान व परेशान हूं। ये तो ऐसे हो गया, जैसे भ्रष्टाचारी ने किसी को अगवा कर डाला हो। किसी का माल-पानी लूट लिया हो।
भले ही आप मुझसे सहमत न हों, लेकिन मुझे यह कहने में रत्तीभर हर्ज नहीं कि भ्रष्टाचारी धरती का सबसे शांत प्राणी है। उसे केवल अपने काम (भ्रष्टाचार) से मतलब रहता है। दुनिया कहां जा रही है, कौन किसके बारे में क्या कह रहा है, उसे नहीं मतलब। न वो किसी को छेड़ता है न गलियाता। फिर भी, सरकार, बुद्धिजीवी, आम आदमी उसके पीछे हाथ-पैर धोकर पड़े रहते हैं। दरअसल, कानून बनाने वालों को इस बात का एहसास ही नहीं कि भ्रष्टाचार करने में कित्ती मेहनत और अकल की जरूरत होती है! साथ-साथ, जान और इज्जत का भी कित्ता जोखिम रहता है।
लोग ऐसा समझते हैं कि ऊपरी या अंडर द टेबल कमाई बहुत आसान होती है, अमां करके देखिए कभी, नानी तो क्या पुरखे तक याद आ जाएंगे, मेरा दावा है! मुद्दे की बात यह है कि भ्रष्टाचार के नाम पर भ्रष्टाचारियों का उत्पीड़न निरंतर जारी है! बहरहाल, अब समय आ गया है कि देश भर के भ्रष्टाचारी एक हों! सरकार के खिलाफ आंदोलनरत हों! ऐसे कानून अगर यों ही बनते रहे तो एक दिन भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा! भ्रष्टाचार की हिफाजत के लिए भ्रष्टाचारी संघर्ष करें, मैं उनके हमेशा साथ हूं!
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