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व्‍यंग्‍य- आतंकवाद के अच्‍छे बच्‍चे: हमला करने नहीं, बस कुछ दिन गुजरात में बिताने आ रहे थे

ऐसे दिनों में स्कूली बच्चे चांदनी रात में नौका विहार जैसे निबन्ध न लिखते हुए समय और मेधा का अपव्यय नहीं करते ।

व्‍यंग्‍य- आतंकवाद के अच्‍छे बच्‍चे: हमला करने नहीं, बस कुछ दिन गुजरात में बिताने आ रहे थे

आतंकवादियों की नौका समन्दर में लापता हो गई, वे उसी तरह से गुम हो गए जैसे नटखट बच्चे गली मोहल्ले में टोली बना कर ‘हरा समन्दर गोपी चंदर’ खेलते हुए इधर- उधर छुप जाते हैं। वे ‘अच्छे बच्चे’ टाइप टेरिरिस्ट थे। ‘वे हमारे यहां हमला- वमला करने नहीं, बस कुछ दिन गुजरात में बिताने आ रहे थे ।’ कोस्ट गार्ड उनके पास उनकी जांच पड़ताल करने नहीं , कराची हलवे की रेसिपी पूछने गए थे।

शुरू हुआ एक रचनात्मक अभियान, बच्‍चों की मौलिक अभिव्‍यक्ति का माध्‍यम है 'दीवार पत्रिका'

आतंकवादियों की नौका समन्दर में लापता हो गई, वे उसी तरह से गुम हो गए जैसे नटखट बच्चे गली मोहल्ले में टोली बना कर ‘हरा समन्दर गोपी चंदर’ खेलते हुए इधर- उधर छुप जाते हैं। वे ‘अच्छे बच्चे’ टाइप टेरिरिस्ट थे। ‘वे हमारे यहां हमला- वमला करने नहीं, बस कुछ दिन गुजरात में बिताने आ रहे थे ।’ कोस्ट गार्ड उनके पास उनकी जांच पड़ताल करने नहीं , कराची हलवे की रेसिपी पूछने गए थे।
अच्छे बच्चे
समन्दर में गुम हो गए हैं और हमारी जांच एजेंसी उन्हें ढूंढ़ने में मशगूल हैं । सबको पता है कि वे गए कहीं नहीं है किसी लहर के साये में दुबके बैठे हैं । वे हमारी ‘सेकुलर’ सोच के बगीचे में छुपम -छुपाई खेल रहे हैं । वे दम साधे सबको हैरान किए हैं। वे इस खेल के माहिर खिलाड़ी हैं। इतनी आसानी से कहां मिलने वाले हैं।
मुंबई वाले खेल में तो एक अनाड़ी प्लेयर आ गया था, उसने सारा गेम बिगाड़ दिया। सारी पोलपट्टी खोल दी वरना तो यही पता लगना था कि वहां कोई टेरेरिस्ट नहीं, शिवकासी के मुर्गा छाप पटाखे वाले अपने उत्पादों को परखने के लिए वहां आये थे ।
अच्छे दिनों में सब अच्छा ही अच्छा होता है। ऐसे दिनों में स्कूली बच्चे चांदनी रात में नौका विहार जैसे निबन्ध न लिखते हुए समय और मेधा का अपव्यय नहीं करते । वे नौकाटन के जरिये पर्यटन की नई परिभाषा गढ़ते हैं। ‘अच्छे बच्चे’ रक्तपात और दहशत का बेहद मानवीय चेहरा हैं। वे नाव में बैठकर पड़ोसियों का कुशलक्षेम पूछने के लिए आते हैं। क्षेत्र का अमन चैन उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होती है।
शांति के लिए वे निरंतर प्रयास रहते हैं। उसके लिए यदि कुछ बच्चों की किलकारियों को बंद करना पड़े तो वे इस काम में कोताही नहीं बरतते। पेशावर में वे यही काम तो करने गए थे ’उनसे वहां चूक यह हुई कि उन्होंने हँसते हुए बच्चों के साथ वो बच्चे भी मार डाले जिन्हें हंसना तक ठीक से नहीं आता था’बड़े कामों में ऐसी छोटीमोटी चूक तो हो ही जाती है ।
नौका विहार वाले बच्चे वस्तुत: गए कहीं नहीं है । बस आंखों से ओझल हो गए हैं । उनको जब यह पता लगेगा कि उन्हें ढूंढ़ने वाले चले गए तो वे हंसते हुए, एक दूसरे से ठिठोली करते और अमन चैन का परचम लहराते पानी की सतह पर आ जाएंगे। इनका खेल कभी न खत्म होने वाला है। इनकी नौका कालजयी हैं। इनके मकसद अजेय हैं । इनके हाथ रक्त से सने हैं । इनकी भूख आदमखोर है। इनके चेहरे पारदर्शी हैं ।
सरलता से दिखते नहीं। जल में जल का भेष भर लेते हैं, इसलिए खोजने पर मिलते नहीं। विमानों को हवा में उड़ा देना या उड़ा कर कंधार ले जाना इनका लक्ष्य है। इनको मरघट की शांति अच्छी लगती है । रोती हुई औरतों की आवाज में ये सुकून पाते हैं। इनके मन्तव्य स्वर्गिक हैं । जन्नत में इनके लिए वन्दनवार बंधे हैं । सारे ऐशोआराम के सामान वहां हैं ।
नौका वाले बच्चों के मर जाने की अपुष्ट खबर है । लेकिन वे कैसे मर सकते हैं? नेक सोच और आचरण वाले इस तरह से कभी मरा नहीं करते। वे थे, वे हैं, उनकी दास्तान जिन्दा है। उनका प्रेरक प्रसंग अशेष है। उनकी खिलंदड़ रूहें नया खेल रच रही होंगी। वे नए लिबास में पूरी तैयारी के साथ अपनी अदृश्य नौका में बैठ कर नए गंतव्य की थाह ले रहे होंगे । ‘अच्छे बच्चों’ की नौकाएं यूं नहीं डूबा करतीं!
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