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व्यंग्य : एक जरूरी सूचना

आगे ध्यान रखना, फिर मत फंस जाना। सो तो ध्यान रखेंगे, लेकिन अभी इस केस में कुछ कीजिए ना।

व्यंग्य  : एक जरूरी सूचना
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जवाहर चौधरी-
पहले एक जरूरी सूचना। आगे जो पढ़ने जा रहे हैं उसका संबंध किसी सरकार, पार्टी या नेता से नहीं है। अगर पढ़ते वक्त आपको ऐसी किसी बात का ख्याल आ जाए तो उसे अपनी निजी जोखिम की तरह कृपया सावधानी से लें। अपनी इस गलती के लिए आप स्वयं जिम्मेदार माने जाएंगे। हां तो बात ये है कि अपने अच्छे दिनों की उम्मीद में वह अखबार में वैवाहिकी कॉलम देख रहा था। सच ये है कि जवानी की दहलीज पर अकेला खड़ा खड़ा उब चुका वह, ऐसा मान रहा था कि शादी के बाद आदमी के अच्छे दिन आ जाते हैं। हाथ की रेखाएं और जन्मकुण्डली वह हमेशा अपनी पतलून की दाईं जेब में तैयार ही रखता है।
जैसे ही कोई ज्योतिषी दिखा कि फौरन सामने। अच्छे दिनों का सारंगी वादन सुन कर वह इतना तन जाता जितना कि साठ साल में उसका बाप-दादा भी कभी नहीं तने। जवानी के सपनों की मत पूछो, फोरलेन हाईस्पीड होते हैं। बात शादी की हो तो मल्टीकलर, घोड़ी बैंड बाजा सब एक साथ, यानी अच्छे दिन फोर्थ-फिफ्थ गियर में। ज्योतिषी ने कहा बस आपके अच्छे दिन आने वाले हैं, थोड़ी बाधाएं हैं वो मैं हटा दूंगा। कुछ दे जाओ और घर जा कर प्रतीक्षा करो। समझो अच्छे दिन पीछे पीछे आ ही रहे हैं।
एक सुबह उसे विज्ञापन से पता चला कि किसी को योग्य वर चाहिए। वह योग्य है इसमें उसे कोई शक नहीं था। संपर्क हुआ, बात हुई, लड़की वाले अच्छे दिनों का शगुन ले कर आ गए। ऐसे मौकों पर लड़कों को अक्सर घंटियां सुनाई देती हैं, ज्यादातर मामलों में वे इसे मंगलध्वनि मान लेते हैं। लड़की थी, उसकी छोटी बहन यानी साली साहिबा थीं, लड़की के भाई, मामा, अम्मा, भौजी, ताउ, ताई यानी पूरी पार्टी साथ। मामा बोले शादी तुरंत करेंगे, आखिर सब कारेबारी हैं, सब जल्दी लौटना चाहते हैं। अंधा क्या चाहे एक अंधी।
कुछ उसने नहीं देखा-सोचा, कुछ वे नहीं देख-सोच रहे। मौके पर मार ले वो मीर। उसने भी फटाफट शादी के दानों को भुना लिया। वो क्या कहते हैं आप लोग चट मंगनी, पट ब्याह हो गया, लड़की रो-घो के घर में आ गई। और किसे कहेंगे अच्छे दिन।
हफ्ता भर में चार मंदिर, आठ होटल, पांच सिनेमा और हजारों की खरीददारी हुई। स्क्रिप्ट की मांग के बावजूद यहां कुछ और नहीं बताया जाएगा, हालांकि सामान्य परिस्थितियों में सब कुछ सामान्य होता रहा।
आठवें दिन की सुबह वह कुछ देर से उठा, पता चला कि दुल्हन मेहंदी लगे हाथों के साथ गायब है। फोन लगाने के लिए हाथ बढ़ाए तो पाया कि उसका फोन भी गायब है। शंका हुई तो अलमारी देखी, जेवर, कपड़े वगैरह सब गायब। और तो और खुद उसके कपड़े भी नदारद पाए गए। वह बाहर निकल कर शोर मचाना चाहता था, लेकिन लुटापिटा,अद्र्घनग्न-पीके कैसे तो बाहर निकलता और किसको कुछ कहता।
दिनों बाद विकास टी स्टाल पर वह एक पुलिसवालाजी साहब को समोसों के बाद चाय सेवन करवाते हुए बता रहा है कि वो रिश्तेदार नहीं पूरी गैंग थी। किसी तरह मेरे अच्छे दिन बरामद करवाओ साहब। साहब बोले- तुम तो घोचूंनंदन हो यार, अच्छे दिन ऐसे आते हैं क्या, हनुमान जी का परसाद है कि हाथ आगे किया और फांक लिया!
आगे ध्यान रखना, फिर मत फंस जाना। सो तो ध्यान रखेंगे, लेकिन अभी इस केस में कुछ कीजिए ना। पुलिस केस है, कोर्ट कचहरी में बीस-पच्चीस साल तो लगते हैं, बरामद हो जाएगा, लेकिन हिम्मत रखो। पच्चीस साल, यूं निकल जाएंगे, अभी देखते देखते।
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