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व्‍यंग्‍य: चल यार झाड़ू मार !

जबसे उन्होंने हाथ में झाड़ू ले स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की है, सच मानिए, उसी दिन से हमारे घर में गंद जमा होना इकट्ठा हो गया है।

व्‍यंग्‍य: चल यार झाड़ू मार !
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नई दिल्‍ली. मि त्रों! पहले हमारे घर में प्यार था, मनुहार था। देश स्वच्छ था या नहीं पर हमारा घर चकाचक रहता था। पत्नी जब भी मौका मिलता बीच में ही रोटी खाना तक छोड़ घर को बुहारने लग जाती। फर्श ऐसे चमाचम रहते कि मैं तो फर्श में ही अपना चेहरा देख दाढ़ी कर लेता था पर जबसे उन्होंने हाथ में झाड़ू ले स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की है, सच मानिए, उसी दिन से हमारे घर में गंद जमा होना इकट्ठा हो गया है।

मि त्रों! पहले हमारे घर में प्यार था, मनुहार था। देश स्वच्छ था या नहीं पर हमारा घर चकाचक रहता था। पत्नी जब भी मौका मिलता बीच में ही रोटी खाना तक छोड़ घर को बुहारने लग जाती। फर्श ऐसे चमाचम रहते कि मैं तो फर्श में ही अपना चेहरा देख दाढ़ी कर लेता था पर जबसे उन्होंने हाथ में झाड़ू ले स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की है, सच मानिए, उसी दिन से हमारे घर में गंद जमा होना इकट्ठा हो गया है।
कल फिर घर में झाड़ू-पोंछा को लेकर हंगामा हो गया। पहली बार पत्नी ने बल का प्रयोग करते हुए मेरे हाथ में झाड़ू पकड़ाने का दुस्साहस करते हुए कहा, ‘देखो! जब तक मैं मंदिर जाकर आती हूं मुझे घर साफ मिला होना चाहिए। मुझे आपकी कोई दलील नहीं सुननी। कल तक तुम कूड़ा डालते थे और झाड़ू मैं देती थी। आज से कूड़ा मैं डालूंगी और झाड़ू तुम..।’
‘पर जरा सुनो तो सही,’ मैंने अपनी अभिमान के नीचे छिपी दयनीय स्थिति स्पष्ट करनी चाही पर भाड़ में भुनते चने की तरह उसने चप्पल पहनते कम पटकते अधिक कहा, ‘अब मैं कोई बहाना नहीं सुनने वाली। जब तक मैं मंदिर जाकर आती हूं मुझे घर साफ मिला होना चाहिए, पीएमओ आफिस की तरह। वरना मुझसे बुरा कोई न होगा।’
‘इतना कड़ा फैसला?’ मैंने झाड़ू परे फेंकते हुए कहा, ‘हद हो गई! ऑफिस में जाकर सरकारी लाज के लिए तनिक हाथ में झाड़ू क्या पकड़ लिया मुझे तो तुम बाई ही समझने लगी। आज क्या हो गया तुम्हें? झाड़ू लगाने को अपने देवता को कह रही हो? औरतों के काम र्मद करें, कम से कम ये मुझसे तो न होगा!’
‘फिर तो ऑफिस में बड़े शान से पेंट-कोट पहने पीए के साथ झाड़ू देते..।’
‘अरे वह ऑफिस था, ऑफिस! वहां तो तुम्हें पता ही नहीं कि पगार के लिए क्या-क्या करना पड़ता है? पर घर में तो मुझे खुदा के लिए र्मद बने रहने दो प्लीज!’ ‘र्मद हो तो क्या हो गया! जब वे पीएम होकर सड़कों तक में झाड़ू लगा सकते हैं तो तुम अपने घर में झाड़ू क्यों नहीं लगा सकते?’ बेगम! अब माजरा समझ में आया! इतने दिनों से हमारे घर में झाड़ू-झाड़ू क्यों नाच रहा है? तो ये आग हमारे घर में उनकी लगाई हुई है। अरे साहब! गजब के र्मद हो आप भी! दो मिनट झाड़ू क्या पकड़ी, देश भर की महिलाओं को मदरें के खिलाफ भड़का दिया।
‘देखो, वे अकेले रहते हैं और मेरे साथ तुम रहती हो! ऐसे में मेरा झाड़ू लगाना तर्कसंगत नहीं! ऊपर जाकर जब तुमसे वे पूछेंगे कि घर में र्मद से झाड़ू पोंछा करवाती क्यों थीं तो क्या जवाब दोगी? रही बात उनकी! अब उनको तो झाड़ू लगाना ही है न!’ मैंने धर्म का आखिरी हथियार फेंका पर बेकार! अब धर्म पत्नियां, धर्म पत्नियां कहां रही साहब? ‘मुझे कुछ नहीं सुनना! रात को तभी खाना मिलगा जो घर में झाड़ू लगा हुआ मिलेगा। मुझे आते ही घर बिलकुल साफ मिलना चाहिए बस!’
‘पर भागवान! सारे घर में झाड़ू?’ ‘हां!’
‘पर उन्होंने तो दो हजार उन्नीस तक संपूर्ण स्वच्छ भारत की बात कही है। चलो, हम महीने भर में घर साफ करने का समझौता कर लेते हैं।’पानी में रहकर मगर से आप बैर करने का दम बांध सकते हैं पर घर में रहकर पत्नी से बैर? कोई नालायक से नालायक ही ऐसा कदम नहीं उठाएगा।
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