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व्यंग्य : डोनाल्ड ट्रंप कमिटमेंट के मामले में एंटी सलमान खान हैं

वाशिंगटन पोस्ट के फैक्ट चैक डेटाबेस के मुताबिक उन्होंने राष्ट्रपति बनने के बाद से अभी तक 12 हजार से ज्यादा बार झूठ बोला है। हिन्दुस्तानी नेता इस प्रतिभा के मामले में उनके आगे पानी भरते हैं। वे भी एक कार्यकाल में इतने झूठ नहीं बोल सकते। बिना डरे सरेआम झूठ बोलने के मामले में भारतीय नेता अभी उनके आगे बच्चे हैं। ऐसी महान शख्सियत उर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति भारत आ रहे हैं।

Namaste Trump: डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को दी चेतावनी, कहा अल बगदादी को हमने खत्म किया हैअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)

वो भारत आ रहे हैं। दुनिया के सबसे शक्तिशाली शख्स का तमगा अपनी छाती पर लिए हुए, देश के सबसे शक्तिशाली देश के प्रथम पुरुष के रूप में। वो बहुत हद तक चाचा चौधरी के साबू की तरह हैं। कॉमिक्स में साबू को जब गुस्सा आता था, तब कहीं ज्वालामुखी फटता था, लेकिन उनको जब गुस्सा आता है तो ईरान, अफगानिस्तान या किसी भी दूसरे देश में बम गिरते हैं। पूरा विश्व दहल जाता है। वो कभी किसी की नहीं सुनते।

अपने मन से भी मन की बात नहीं करते और फिर अपने मन से ही फैसला ले लेते हैं। उनका मन भी बेचारा बड़े मौकों पर आखिरी वक्त तक कंफ्यूज रहता है कि पता नहीं वो क्या बोल दें। कमिटमेंट के मामले में वो एंटी सलमान खान हैं। वो अपने किसी कमिटमेंट की नहीं सुनते। बस जो दिल में आए वही कर डालते हैं। एक पल ये कमिटमेंट की तो दूसरे पल दूसरी कमिटमेंट कर पहली को दिल-ओ-दिमाग से डिलीट कर देते हैं। वो पुराने वादों का लोड नहीं लेते। वो सत्य को उतना ही नापसंद करते हैं, जितना पाकिस्तान, हिन्दुस्तान को।

बस कहने को ही इन देशों का सम्मान करते हैं। हमेशा सच नहीं बोल सकते। वो असत्य के प्रति निष्ठावान हैं। वो इतने झूठ बोलते हैं कि उनके झूठ बोलने पर शोध हो रहे हैं। वाशिंगटन पोस्ट के फैक्ट चैक डेटाबेस के मुताबिक उन्होंने राष्ट्रपति बनने के बाद से अभी तक 12 हजार से ज्यादा बार झूठ बोला है। हिन्दुस्तानी नेता इस प्रतिभा के मामले में उनके आगे पानी भरते हैं। वे भी एक कार्यकाल में इतने झूठ नहीं बोल सकते। जबकि भारत में एक कार्यकाल पांच साल का है और अमेरिका में चार का। सरल शब्दों में कहें तो बिना डरे सरेआम झूठ बोलने के मामले में भारतीय नेता अभी उनके आगे बच्चे हैं। वो आरोपों के दाग को फूलों का हार समझते हैं। संसद में महाभियोग का सामना करने से लेकर वीडियो गेम में दुश्मनों का सामना करने तक सभी खेल वो निर्विकार भाव से खेलते हैं।

ऐसी महान शख्सियत उर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति भारत आ रहे हैं। उनके स्वागत की तैयारियां चल रही हैं। अहमदाबाद की सूरत बदल रही है। लोग सोच रहे हैं कि अगर शहर के अच्छे दिन अमेरिकी राष्ट्रपति के आने से ही आते हैं तो इस बंदे को होली-दिवाली और ठंड की शादियों तक में अहमदाबाद आने का निमंत्रण देते रहना चाहिए। लगातार ऐसे प्रयास किए जाने चाहिएं कि वे समय-समय पर शहर में आते रहें। अहमदाबाद की शक्ल बदली तो बाकी शहर के लोग भी इस आमंत्रण का विस्तार करते हुए मुंडन संस्कार, गृह प्रवेश जैसे आयोजनों में भी उन्हें बुला सकते हैं। हिन्दुस्तान में विकास नेताओं से कदमताल करता है। नेताजी गांव आएंगे तो विकास आएगा, उनके आने से पहले ही अफसर लोग गांव पहुंच जाते हैं। पूरे गांव का चकाचक कर दिया जाता है। अगर नहीं आएंगे तो जिला मुख्यालय पर कितनी भी नाक रगड़ लो, विकास रुठकर बैठा रहेगा। किसी मंत्री को जब अचानक किसी छोटे से गांव में पहुंचना होता है तो वहां हैंडपंप लग जाते हैं, खडंजे बिछ जाते हैं, बिजली आए न आए खंभे लग जाते हैं, दो-चार शौचालय बन जाते हैं। कुल मिलाकर छोटा मोटा विकास हो लेता है और इस छोटे मोटे विकास को विकास से अंजान लोग बड़ा विकास मान लेते हैं। इसी तरह प्रधानमंत्री किसी शहर के दौरे पर पहुंचते हैं तो पूरा सरकारी अमला ऐसे काम में लग जाता है, जैसे कबीर का कल करे सो आज कर वाला दोहा घोंट के पी गए हों। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति का शानदार स्वागत होगा ही। बारात में दूल्हा घोड़ी पर आता है, अमेरिकी राष्ट्रपति एयरफोर्स वन नाम के हवाई बेड़े में आता है। वो अपनी गाड़ी-अपना घोड़ा साथ रखता है। स्वागत का लाइव टेलीकास्ट होगा। देखने को तैयार हो जाइए। हो सकता है बैकग्राउंड में गाना बजे, पिया तू अब तो आजा। कई समझौते अटके पड़े हैं तू आजा। डॉलर की ज्वाला लगी पड़ी है, आके बुझा जा। वैसे, मेरा निजी सुझाव है कि ट्रंप की अमेरिकी बारात का स्वागत पान पराग से होना चाहिए।

(वरिष्ठ व्यंग्यकार पीयूष पांडे की कलम से)

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