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व्यंग्य : आप बहुत अच्छे हैं

मैंने अपनी पत्नी से कहा कि ये बहुत अच्छे कवि हैं त्यों ही वे अपनी पोथी जैसी डायरी निकाल धुआंधार कविताएं सुनाने लगे।

व्यंग्य : आप बहुत अच्छे हैं
एक दिन दुर्योग से मेरे घर एक स्वनामधन्य कवि महोदय पधारे। स्वागत-सत्कार के बाद ज्यों ही मैंने अपनी पत्नी से कहा कि ये बहुत अच्छे कवि हैं, त्यों ही वे अपनी पोथी जैसी डायरी निकाल धुआं-धार कविताएं सुनाने लगे। लगातार बोरियत से मैं अधमरा हो गया।
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प्रशंसा के अनमोल बोल के श्रवण ग्रहण करते ही तब-मन में खुशी की फुरफुरी करंट सी तुरंत दौड़ने लगती है। ‘आप बहुत अच्छे हैं या बहुत अच्छी हैं।’ तारीफ के ये जुमले, फूलों वाले किसी गमले से कम खूबसूरत नहीं होते हैं। प्रशंसात्मक शब्द रसात्मक, कर्ण प्रिय तथा सर्वप्रिय माने जाते हैं। यह सेंट-पर्सेंट, पेटेंट शैली, शिष्टाचार और लोकाचार की स्वीट, शॉर्ट व स्मार्ट कला है, जिससे द्विपक्षीय भला है। दुनियादारी हो या कोई यारी, उसे और भी प्यारी बनाने का यह हुनर स्वीकार्य एवं अनिवार्य है। यह सच है कि प्रशंसा मूर्ख को भी अच्छी लगती है। तकिया कलाम जैसा ऐसा अंदाज अपना उल्लू सीधा करने और गुलाबी कामयाबी की चाबी है।
अगर अच्छे को अच्छा और सच्चे को सच्चा कहा जाए तो यह बड़ी सी नहीं बल्कि सड़ी सी बात है। जो निंदनीय है उसे प्रशंसनीय कहना अर्थात शेष को विशेष कहना ही अकलमंदी है। चतुराई से ज्यादा कारगर चालाकी कहलाती है। आजकल इस सत्य व तथ्य को अपने भेजे और कलेजे में सुस्थापित करना है कि सदाबहार मिलनसार कहलाने हेतु ‘आप बहुत अच्छे हैं’ की तकनीक बहुत नीक है जो ‘हर्र लगे न फिटकरी रंग चोखा’ वाली कहावत को चरितार्थ करती है। इससे प्रशंसक एवं प्रशंसित दोनों कृतार्थ होते हैं। रेत से भी तेल निकालने का यह फोकटिया ढंग अपने आप में खुशरंग है। घटिया को भी बढ़िया कहने की मंशा, प्रशंसा के योग्य है।
‘आप बहुत अच्छे हैं’ सुनने के लिए अच्छे-अच्छे मरे-मिटे जाते हैं। ऐसी मैजिक ड्रामेबाजी से भला कौन राजी नहीं है। खुशी होने से ही खुशी मिलती है, दिल की कली-कली खिल जाती है और चेहरे को चमक मिल जाती है। यदि आप अपने किसी तथाकथित आत्मीय के दर्शन होते ही ‘आप बहुत अच्छे हैं’ का प्रदर्शन करेंगे तो वह आपका स्वागत, बार-बार आभारपूर्वक करेगा। फिल्मी तर्ज पर ‘तुमसे अच्छा कौन है, तुम सा नहीं देखा’ सुनाने से फायदे ही फायदे हैं।इस रीति-नीति में सच्चाई का नहीं बल्कि स्वयं की भलाई और मलाई का ध्यान रखा जाता है। फिर भी इतना ध्यान तो जरूर देना चाहिए कि अति से इति होती है और ज्यादा मिठास में कीड़े पड़ जाते हैं। आगे-पीछे सोच-समझकर प्रशंसा-वाचन करें। गोबर को गणेश, ढेर को शेर और बेर को कुबेर कहने से चापलूसी, चाटुकारिता व चमचागिरी छलकने या झलकने लगती है। कहीं पिट गए व्यक्ति को फिट और हिट कहना उसे मखमली जूता मारना है।
एक पत्नी-प्रताड़ित पति को उसकी पत्नी कहती है कि तुम बहुत खराब हो। ऐसे में यदि उस भाग्यवान को कह दिया जाए कि आप बहुत अच्छे हैं तो उसके अंदर भयंकर आग लग जाएगी। वैसे तो समय पर दूसरे के तवे पर अपनी रोटी सेंकी जा सकती है। उदर जैसे उदार एक महानुभाव से मनचाही मदद प्राप्त करते रहने वाले एक घाघ की यह आदतन और इरादतन उक्ति ‘आप बहुत अच्छे हैं’ जितनी फलप्रद है, उतनी सुखप्रद है। एक मातहत कर्मचारी अपने बॉस को ‘आप बहुत अच्छे हैं’ बोलकर कई तरह से लाभान्वित होता रहता है। इस उक्ति से बढ़कर कोई युक्ति नहीं है।
आदमी जब जिंदा रहता है अपनी निंदा सहता है लेकिन मरणोपरांत उसे प्राय: सभी कहते हैं, ‘वह बहुत अच्छा आदमी था।’ बिना तारीफ के प्यार के रिश्ते भर लगते हैं। चेहरे के मेकअप जैसी औपचारिकता की मानसिकता हमारी आधुनिकता का प्रतीक है। अगर दांपत्य जीवन को नागफनी जैसा बारहमासी हरा भरा बनाए रखना है तो इसी फॉर्मूले को धनुष जैसे एंगल से आंखें मूंदकर अपनाना दाल में नमक की तरह जरूरी है।
परिचय, संवाद, मेल-मिलाप और प्रेम-प्रसंग के संग ‘आप बहुत अच्छे हैं’ का आदान-प्रदान संबंध को सुगंधित व आनंदित करता है। जब कॉलेज के प्रोफेसर साहब अपनी सुमुखी और सुलोचना शिष्या के श्री मुख से ‘आप बहुत अच्छे हैं सर।’ सुनते हैं तब उन्हें बुढ़ापे में भी जवानी के रोमांच का अहसास होने लगता है। फिर कृपा भी बरसती है।
एक हाई-फाई पहुंच और पकड़ वाले नेताजी हैं, जिन्हें मैं हमेशा ‘बहुत अच्छे’ कहता रहता हूं। इसके परिणाम-स्वरूप मुझे भी आड़ में झाड़ काटने के चांस एडवांस में मिल जाते हैं। दोष-दर्शन अभद्रता है जबकि प्रशंसा-प्रदर्शन शिष्टता है। अपनी शराफत को आफत से बचाए रखना है तो इस तरह के अनमोल बोल सदैव डिसप्ले करते रहें-‘आप बहुत अच्छे हैं,’ ‘आप आज खूब जंच रहे हैं, जम रहे हैं।’ ‘आप यत्र-तत्र-सर्वत्र चाहे और सराहे जा रहे हैं।’ इस वशीकरण मंत्र की बदौलत नाना प्रकार की दौलत भी मिल सकती है।
जब से मैंने एक संपादक जी को ‘आप बहुत अच्छे हैं’ कहना शुरू किया है तबसे मेरी रचनाएं धड़ल्ले से छपने लगी हैं। इस प्रकार की प्रशस्ति की प्रस्तुति यदि मॉडर्न महिलाआें द्वारा की जाती है तो सोने में सुहागा कहलाती हैं। यार और रिश्तेदार इसे प्यार और सम्मान का वांटेड इजहार मानते हैं। इस सूक्त वाक्य का तीर अचूक रहता है।
कहीं-कहीं इस स्टाइल से लेने के देने भी पड़ सकते हैं। एक दिन दुर्योग से मेरे घर एक स्वनामधन्य कवि महोदय पधारे। स्वागत-सत्कार के बाद ज्यों ही मैंने अपनी पत्नी से कहा कि ये बहुत अच्छे कवि हैं त्यों ही वे अपनी पोथी जैसी डायरी निकाल धुआंधार कविताएं सुनाने लगे। लगातार बोरियत से मैं अधमरा हो गया था। वैसे ऐसी दुर्घटनाएं कम होती हैं।
शब्द-शक्ति में पारंगत व्यक्ति की सर्वत्र रंगत है। ‘आप बहुत खराब हैं’ यह सीधे मुंह पर कहने से सिर पर गाज गिर सकती है लेकिन ‘आप बहुत अच्छे हैं’ कहने से खुश होकर कंजूस भी जूस पिला सकता है। कसीदा पढ़ने का यह सलीका लोकप्रियता में आगे बढ़ने का विशेष स्पेस दे सकता है।
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