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व्यंग्य : ठंडे शोले

अनुवांशिकता से हाड़-मांस मिलता है, रंग-रूप मिलता है, राजनीति नहीं मिलती।

व्यंग्य : ठंडे शोले
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जब कोई रास्ता नहीं सूझा तो मांईकमान ने बिट्टू को पास बैठाया, लाड से सिर पर हाथ फेरते हुए बोलीं देख बिट्टू, एक बात अच्छी तरह से समझ ले, राजनीति सीखने की चीज है। अनुवांशिकता से हाड़-मांस मिलता है, रंग-रूप मिलता है, राजनीति नहीं मिलती लेकिन कुर्सी तो मिलती है ना मॉम। वो समय गया बिट्टू जब बिना कुछ किए लोग पीएम बन जाया करते थे। वक्त की नजाकत को समझो, अब तुम बड़े हो रहे हो। तुमको बाकायदा राजनीति सीखना पड़ेगी।
किससे सीखूं! पार्टी का जो भी सामने आता है सीधे पैर छूने लगता है, यहां तक कि बूढ़े भी। तुम ही क्यों नहीं कुछ सिखा देती मॉम? बिट्टू पिछले कुछ समय से अनमना चल रहा था। मैंने तुम्हें मुस्कराना सिखाया था बिट्ट। तो मैं मुस्कराता तो हूं ना? अपन हारे थे तब भी मुस्कराया था, मीडिया ने अच्छे से कवर भी तो किया था। अरे बिट्टू, सही समय पर मुस्कराना राजनीति है, गलत समय पर मुस्कराने से गलत मैसेज जाता है।
तुम्हें इस फर्क को समझना चाहिए। मॉम तुमने ही तो कहा था कि जनता और कैमरे के सामने मुस्कराया करो लेकिन दु:खियों, पीड़ितों, समस्याग्रस्त लोगों की बात मुस्कराते हुए सुनना अच्छी बात नहीं हैं।बिट्टू नाराज हो गया। यों भी सारा दिन अकेले रहते बोर होता है। उस पर मॉम के लेसन का हेडेक। अरे भाई थाउजंड रुपीज का नोट हर समय थाउजंड रुपीज ही होता है। मुस्कराना हर समय मुस्कराने के अलावा और क्या हो सकता है।
एक टाइम ये मीनिंग दूसरे टाइम पर वो! मांईकमान ने एक बार और समझाने की कोशिश की-देखो बिट्टू, एक बार तुम सही समय पर मुस्कराना और आंसू बहाना सीख गए तो समझ लो कि राजनीति का बहुत कुछ सीख गए। हिंदुस्तान की रिआया बड़ी भावुक होती है।कौन सिखाएगा मुझे? बिट्टू कुछ देर सोच कर बोला।
अपनी गरज के लिए हमें विरोधियों से भी सीखना चाहिए। टीवी पर रामायण में बताया था ना, लक्ष्मण ने रावण से सीखा था। तुम उधर के भीष्म पितामह से सीख सकते हो। अभी वे तीरों से बिंधे पड़े हैं, पर होश में हैं।बिट्टू दनदनाते हुए भीष्म पितामह के बंगले पर पहुंचे। चारों तरफ करीब करीब सन्नाटा था। अंदर वीडिओ पर कोई फिल्म चलने की आवाज आ रही थी। हीरो चीख रहा था, गब्बरसिंग, तेरे एक एक आदमी को चुन चुन के मारूंगा। मां का दूध पिया हो तो सामने आओ बुजदिलों। बिट्टू थोड़ी देर रुका, सोचा इस वक्त जाना ठीक होगा या नहीं। लौटने का मन बनाया ही था कि एक कर्मचारी ने बताया कि आप मिल लीजिए, ये फिल्म तो यहां रातदिन चलती रहती है।
पितामह ने बिट्टू को प्यार से गले लगा लिया। अंकल मॉम ने ये पापड़ भेजे हैं आपके लिए।थैंक्स, देखो तुम्हारी मेरी पीड़ा एक ही है बिट्टू। तुम तो मेरे पास सीखने भी आ गए, पर मैं किसके पास जाऊं!मैं तो आपसे बहुत छोटा हूं अंकल।राजनीति में छोटा-बड़ा कुछ नहीं होता है, जो भी होता है पीएम इन वेटिंग होता है। जो कि तुम भी रहे हो।जो हुआ उसे दुनिया वाले क्या जाने अंकल, आप तो मुझे कुछ सिखाइए।
क्या सिखाऊं! आपकी मांईकमान ने मुझे सिखाने योग्य समझा यही बहुत बड़ी बात है वरना हमारी पार्टी वाले तो.., खैर। मुझे कुछ टिप्स दीजिए ना। शोले पिक्चर देखा करो। उसमें, गब्बर, लास्ट में हारता है। एक उम्मीद और हौसला मिलेगा। अभी तो तुम्हें लंबा सफर तय करना है।
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