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शिखर पर सानिया मिर्जा बढ़ा भारत का गौरव

भारतीय टेनिस को नई ऊंचाई देने वाली सानिया मिर्जा का युगल रैंकिंग में दुनिया की नंबर एक महिला खिलाड़ी

शिखर पर सानिया मिर्जा बढ़ा भारत का गौरव
भारतीय टेनिस को नई ऊंचाई देने वाली सानिया मिर्जा का युगल रैंकिंग में दुनिया की नंबर एक महिला खिलाड़ी बनने पर हर देशवासी गर्व महसूस कर रहा है। यह उपलब्धि हासिल करने वाली वे पहली भारतीय महिला खिलाड़ी हैं। स्विट्जरलैंड की मार्टिना हिंगिस उनकी जोड़ीदार हैं। उनसे पहले भारत के सिर्फ लिएंडर पेस और महेश भूपति युगल रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंचे हैं। सानिया आज जिस मुकाम पर पहुंची हैं उसमें उनकी अथक मेहनत और एकाग्रता का अहम योगदान है। आम तौर पर आम जनता को किसी खिलाड़ी की सफलता ही ज्यादा दिखाई देती है, लेकिन उसके पीछे उसकी कितनी मेहनत, त्याग और संघर्ष छिपा होता है, वह नहीं दिखता है। सानिया मिर्जा में टेनिस के प्रति खास जुनून ही उन्हें औरों से अलग करता है। उनमें खेल के प्रति गजब का समर्पण और संघर्ष करने की क्षमता है।
हाल ही में बैडमिंटन में साइना नेहवाल दुनिया की नंबर वन महिला खिलाड़ी बनने का कारनामा की थीं। जाहिर है, खेलों में भारतीय महिलाओं का शिखर पर पहुंचना देश के लिए गौरव की बात है। सानिया मिर्जा का जन्म मुंबई में हुआ था। हालांकि उनके पिता इमरान मिर्जा को कुछ समय के बाद हैदराबाद जाना पड़ा था, जहां पारंपरिक रूप में सानिया का बचपन गुजरा। निजाम क्लब हैदराबाद में सानिया ने छह साल की उम्र से टेनिस खेलना शुरू किया था। महेश भूपति के पिता और भारत के सफल टेनिस खिलाड़ी सीके भूपति से सानिया ने अपनी शुरुआती कोचिंग ली। तब सानिया के पिता के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह उनको प्रोफेशनल ट्रेनिंग करवा सकें। इसके लिए उन्होंने कुछ बड़े व्यापारिक समुदायों से स्पांसरशिप ली। सानिया को शीर्ष की ओर ले जाने में उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि का महत्वपूर्ण योगदान है। वर्ष 2005 में प्रतिष्ठित टाइम पत्रिका द्वारा सानिया को एशिया के 50 नायकों में नामित किया गया था। वहीं 2010 में एक मशहूर अखबार ने उन्हें भारत की गौरवान्वित 33 महिलाओं की सूची में नामित किया था। सानिया जब 14 वर्ष की भी नहीं थीं तब उन्होंने पहला आईटीएफ जूनियर टूर्नामेंट खेला था। सानिया के जीवन में सबसे रोचक मोड़ तब आया जब भारत की तरफ से वाइल्ड कार्ड एंट्री करने के बाद उन्होंने विम्बलडन में डबल्स के दौरान जीत हासिल की।वे भारत की तरफ से ग्रैंड स्लैम जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी हैं।
सानिया वर्ष 2003 से 2013 तक यानी लगातार एक दशक तक महिला टेनिस संघ (डब्ल्यूटीए) के एकल और डबल में शीर्ष भारतीय टेनिस खिलाड़ी के रूप में अपना स्थान बनाए रखने में सफल रही हैं। बेहतर खेल के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार और पद्मश्री सम्मान दिया गया है। वे यह सम्मान पाने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी हैं। हालांकि व्यक्तिगत जीवन में सानिया का विवादों से भी गहरा नाता रहा है, लेकिन उन्होंने इसकी परवाह किए बगैर खेल पर ध्यान केंद्रित रखा और कई खिताब अपने नाम किए। सानिया कई अंतरराष्टÑीय प्रतियोगिता सहित महिला युगल में विम्बलडन, मिक्स्ड डबल्स में आॅस्ट्रेलियन ओपन, फ्रेंच ओपन खिताब अपने नाम कर चुकी हैं। अभी वे तेलंगाना की ब्रांड एम्बेसेडर भी हैं। देश को उनसे और भी उम्मीदें हैं। पूरे देश की ओर से इसके लिए उन्हें शुभकामनाएं।
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